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परशुराम की जन्मस्थली संवारने की तैयारी:इंदौर के जानापाव पहाड़ी पर साढ़े 7 नदियों का उद्गम स्थल, पहले चरण में साढ़े सात में से 3 नदियों का होगा विकास

इंदौर3 महीने पहले
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इंदौर से करीब 28 किमी दूर जानापाव भगवान परशुराम की जन्मस्थली है।  - Dainik Bhaskar
इंदौर से करीब 28 किमी दूर जानापाव भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। 

इंदौर के जानापाव पहाड़ी के विकास की तैयारी है। पहले चरण में साढ़े 7 में से 3 नदियों का विकास होगा। यह बात पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर ने कही है। उन्होंने कहा हम मिट्टी और पानी के शुद्धिकरण की दिशा ने तेजी से काम करेंगे। भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव के संपूर्ण विकास की डीपीआर तैयार है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना है।

यहां पहाड़ी पर साढ़े सात नदियों का उद्गम स्थल है। पहले चरण में तीन नदियों गंभीर, अजनार और बालम नदी पर काम होगा। इनकी विस्तृत योजना को मंजूरी देकर जल्द केंद्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। 17 जुलाई को केंद्र के जिम्मेदार इस पर बड़ी बैठक भी लेंगे। ठाकुर ने कहा अजनार में जहरीला पानी छोड़ने वालों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है। उन्होंने देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग की।

जानें, भगवान परशुराम की जन्म स्थली और उसने जुड़ी कथा...

  • महर्षि जमदग्रि की तपोभूमि तथा भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापाव, इंदौर की महू तहसील के राजपुरा कुटी (जानापाव कुटी) गांव में स्थित है।
  • मान्यता है कि जानापाव में जन्म के बाद भगवान परशुराम शिक्षा ग्रहण करने कैलाश पर्वत चले गए थे।
  • जहां भगवान शंकर ने उन्हें शस्त्र-शास्त्र का ज्ञान दिया था।
  • जानपाव पहुंचने के दो रास्ते हैं। एक रास्ता पहाड़ाें के बीच से होकर जाता है, जबकि दूसरा पक्का मार्ग है।

कुंड से निकलती हैं ये नदियां

  • जानापाव पहाड़ी से साढ़े सात नदियां निकली हैं। इनमें कुछ यमुना व कुछ नर्मदा में मिलती हैं।
  • यहां से चंबल, गंभीर, अजनार और सुमरिया नदियां व साढ़े तीन नदियां बालम, चोरल, कारम और नेकेड़ेश्वरी निकलती हैं। (कारम और नेकेड़ेश्वरी एक ही धारा में बहती हैं, इसलिए इन्हें डेढ़ नदी माना जाता है)
  • ये नदियां करीब 740 किमी बहकर अंत में यमुनाजी में तथा साढ़े तीन नदियां नर्मदा में समाती हैं।
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