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कब खत्म होगी 'सांसों' की बेबसी:ऑक्सीजन चाहिए 130 टन, मिल रही 110 टन, 30 दिन बाद भी हालात नहीं सुधरे

इंदौर5 दिन पहले
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बेबसी की कतार। - Dainik Bhaskar
बेबसी की कतार।

एक महीने से जारी ऑक्सीजन संकट अभी भी समाप्त नहीं हुआ है। शहर को रोज 130 टन ऑक्सीजन की जरूरत है, जबकि आपूर्ति सिर्फ 110 टन की ही हो पा रही है। यानी 20 टन ऑक्सीजन के लिए मरीजों के परिजन को हर दिन घंटों कतार में लगना पड़ रहा है। पीथमपुर से अभी एक प्लांट से करीब 1500 सिलेंडर और नए शुरू हुए प्लांट से 3500 सिलेंडर हर दिन ऑक्सीजन की सप्लाय हो रही है। पीथमपुर में रिकॉर्ड समय में ऑक्सीजन प्लांट शुरू करने वाले एमसीएल ग्रुप के करण मित्तल ने कहा ऑक्सीजन और भी बढ़ाई जा सकती है। समस्या अभी सिलेंडर की कमी की आ रही है। यदि इंदौर के औद्योगिक क्षेत्रों में रखे हुए सिलेंडर और मिल जाएं तो ऑक्सीजन सप्लाय बढ़ जाएगी।

प्रदेश में कहीं भी ऑक्सीजन प्लांट लगाओ, मदद राज्य सरकार करेगी

प्रदेश में ऑक्सीजन प्लांट लगाने पर अब सरकार निवेशक को 75 करोड़ तक की मदद देगी। मप्र शासन ने उद्योग संवर्धन नीति के तहत यह नई नीति 1 मई से लागू की है। प्रदेश में पात्र इकाई जिनकी उत्पादन क्षमता न्यूनतम 10 क्यूबिक मीटर प्रति घंटा ऑक्सीजन उत्पादन की होगी, उन्हें यंत्र व संयंत्र और भवन (भूमि एवं रिहायशी इलाकों को छोड़कर) में किए गए पूंजी निवेश पर 50 प्रतिशत तक की मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता देय होगी। उक्त सहायता की अधिकतम सीमा 75 करोड़ होगी। पात्र इकाइयों को प्रचलित विद्युत टेरिफ पर एक रुपए प्रति यूनिट की छूट दी जाएगी।

1243 रेमडेसिविर निजी अस्पतालों को और मिले

लंबे समय बाद निजी अस्पतालों को एक हजार से ज्यादा रेमडेसिविर के डोज मिले हैं। 102 निजी अस्पतालों को 1016 डोज आवंटित हुए वहीं चार अस्पतालों ने अपने स्तर पर 227 डोज बुलवाए। इस तरह 106 अस्पतालों के पास 1243 डोज आवंटित हुए। वहीं रात को शासन के पास 14 हजार से अधिक डोज प्राप्त हुए। इसमें भी इंदौर को डोज आवंटित होंगे, जो मंगलवार को अस्पतालों को आवंटित किए जाएंगे। इन डोज में मेडिकल कॉलेज इंदौर को 384 डोज मिलेंगे। हालांकि स्वास्थ्य विभाग को मिलने वाले डोज अभी स्पष्ट नहीं हैं।

जांच में गलत निकला रेमडेसिविर तो अस्पताल पर रासुका लगाएंगे

रेमडेसिविर का आवंटन हर दिन अस्पतालों को आईसीयू, एचडीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के अनुपात में हो रहा है। अस्पताल से भी सूची मांगी जाती है कि किस मरीज को उन्होंने लगाया। कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि हम सूची की लगातार जांच कर रहे हैं। यदि कहीं से भी यह सूची गलत पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ रासुका लगाई जाएगी। यह अस्पताल संचालक की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करें कि सही व्यक्ति को यह डोज लगे।

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