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एडवांसमेंटट प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे:अपोलो हॉस्पिटल में नई तकनीक से मरीज की एंजियोप्लास्टी की गई

इंदौरएक महीने पहले
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अपोलो अस्पताल में हार्ट के मरीज को बायोरसोर्बेबल वैस्क्यूलर स्केफोल्ड्स लगाकर एन्जियोप्लास्टी की गई। - Dainik Bhaskar
अपोलो अस्पताल में हार्ट के मरीज को बायोरसोर्बेबल वैस्क्यूलर स्केफोल्ड्स लगाकर एन्जियोप्लास्टी की गई।

अपोलो अस्पताल में हार्ट के मरीज को बायोरसोर्बेबल वैस्क्यूलर स्केफोल्ड्स लगाकर एन्जियोप्लास्टी की गई। स्वदेशी तकनीक का यह एक ऐसा स्टेंट है जो शरीर में धीरे-धीरे घुल जाता है। इससे फायदा यह होता है कि खून पतला करने वाली दवाइयों का इस्तेमाल कम हो जाता है। मरीज को यह लंबे समय तक नहीं देना पड़ती है। मध्य भारत का यह पहला अस्पताल है, जहां इस स्टेंट का उपयोग किया गया है। सामान्य रूप से मेटेलिक स्टेंट्स लगाए जाते है, जो हमेशा शरीर में रहते हैं।

अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट इंटरवेंशन कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोशन राव ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी का एडवांस वर्शन है, जिसमें बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर घुल जाता है। पूर्व में जो डिवाइस उपयोग में लिए जाते थे वह 150 माइक्रोंस के बराबर था जबकि यह सिर्फ 100 माइक्रोंस जितना मोटा होता है।

यह बलून केथेटर पर आधारित होता है। इसे तीन रेडियोमार्कर्स के जरिए आसानी से स्केफोल्ड्स को सही स्थिति में स्थापित कर सकते हैं। इंटरवेंशन कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सरिता राव ने बताया कि छह महीने बाद यह डिजॉल्व होना शुरू हो जाती है। टीम में डॉ. क्षितिज दुबे, डॉ. विकास गुप्ता और डॉ. विवेक चंद्रावत का सहयोग रहा। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अशोक बाजपेयी ने बताया कि आगे भी कार्डियो केयर के ट्रांसफार्म से जुड़े एडवांसमेंटट प्रयासों को आगे बढ़ाएंगे।

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