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ब्लैक फंगस:सस्ते एम्फोसिटिरिन को मरीजों की ना 600 महंगे वाले इंजेक्शन बुलवाए

इंदौर17 दिन पहले
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एमवायएच का वह वार्ड, जहां ब्लैक फंगस पीड़ित भर्ती हैं। - Dainik Bhaskar
एमवायएच का वह वार्ड, जहां ब्लैक फंगस पीड़ित भर्ती हैं।
  • एमवायएच में सस्ते एम्फोसिटिरिन लगते ही मरीजों में उल्टी, सिरदर्द होने लगा था

हिमाचल प्रदेश की फार्मा कंपनी सेे दो दिन पहले 12 हजार 240 एम्फोसिटिरिन-बी इंजेक्शन (कनवेंशनल, लाइपोलाइज्ड) की खेप मिली तो मरीज राहत की सांस ले रहे थे, लेकिन अब इन्हीं इंजेक्शन पर सवाल उठ रहे हैं। इन इंजेक्शन के साइड इफेक्ट 30 से 70 प्रतिशत तक हो सकते हैं।

एमवाय में भर्ती 300 में से करीब दो सौ से ज्यादा मरीजों को यह इंजेक्शन दिए जाने थे। शनिवार को इंजेक्शन लगाते ही मरीजों ने सिरदर्द, उल्टी, कंपकंपी की शिकायत की। बाद में मरीजों से कहा गया कि रविवार को डॉक्टर की निगरानी में इन्हें लगाया जाएगा।

एक मरीज के परिजन ने बताया कि इंजेक्शन लगाते ही ऑक्सीजन लेवल 74 तक चला गया था। वहीं वार्ड 29 में भर्ती एक मरीज के परिजन आकाश वर्मा ने बताया कि मां को इंजेक्शन लगने के 5 से 10 मिनट बाद ही जोर से ठंड लगने लगी थी।

रविवार को कम मरीजों को यह इंजेक्शन दिए गए। डॉक्टर ने खुद खड़े होकर यह इंजेक्शन लगवाए। इसे सलाइन में मिलाकर लगाया गया। स्टाफ को निर्देश दिए कि धीमी गति से यह दिए जाएं। उधर, मरीजों ने सस्ते इंजेक्शन पर विरोध जताया तो रविवार को 600 एम्फोसिटिरिन-
बी लाइपोजोमल बुलवाए गए।
सामान्य साइड इफेक्ट है, इसमें चिंता की बात नहीं डीन डॉ. संजय दीक्षित का कहना है ये सब नोन कॉम्प्लीकेशंस हैं। दो से तीन घंटे में मरीज सैटल हो जाता है। चिंता की बात नहीं है। डॉक्टर लगातार मॉनिटरिंग करते हैं।

एम्फोसिटिरिन-बी लाइपोलाइज्ड सलाइन में मिलाकर धीमी गति से देना जरूरी
धीमी गति से यह दवा मरीज को दी जाती है। रोज मरीज की किडनी, पोटेशियम और मैग्नीशियम आदि की जांच करना जरूरी है। लाइपोलाइज्ड इंजेक्शन अंतिम प्राथमिकता होती है। उसी मरीज को दिए जाते हैं, जिनकी किडनी स्वस्थ है।

कुछ मरीजों ने शिकायत की थी, यह कॉमन समस्या है
Q. शनिवार कोे जिन मरीजों को एम्फोसिटिरिन-बी इंजेक्शन दिए गए, उनमें साइड इफेक्ट्स सामने आए हैं?
A. कुछ मरीजों ने शिकायत की थी। यह कॉमन समस्या है।
Q. रविवार को भी उन्हें वही दवा दी गई?
A. नहीं। जिन मरीजों में हल्का इन्फेक्शन है, उन्हें पोसोकोनॉजोल टैबलेट दी गई है। जिनमें संक्रमण दिमाग तक गया है, उन्हें एम्फोसिटिरिन-बी लाइपोजोमल इंजेक्शन ही दिए जाएंगे।
Q. पोसोकोनॉजोल पर्याप्त मात्रा में
उपलब्ध है?
A. हां। अब पर्याप्त संख्या में है। उन मरीजों को दे रहे हैं, जिनमें हल्का संक्रमण है।
Q. सस्ते वाले एम्फोसिटिरिन-बी लाइपोलाइज्ड इंजेक्शन मरीजों को अब नहीं दिए गए?
A. नहीं, ऐसा नहीं है। कुछ मरीजों को दिए गए हैं। पूर्ण सहमति के साथ धीमा डोज दिया गया है। मॉनिटरिंग के साथ यह इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। साइड इफेक्टस् एम्फोसिटिरिन-बी लाइपोजोमल में भी होते हैं। किडनी फंक्शन की मॉनिटरिंग उसमें भी करना पड़ती है।
दो दिन से लाइपोजोमल नहीं मिल रहे थे, तीसरे दिन आए 600
प्रशासन को 12 हजार इंजेक्शन मिले। उसके बाद लग रहा था कि शायद अब दवा की किल्लत की समस्या दूर होगी लेकिन यह इंजेक्शन लगवाने से ज्यादातर लोग बच रहे हैं। लाइपोजोमल इंजेक्शन का आवंटन दो दिन से नहीं हुआ था।

मरीजों में साइड इफेक्ट सामने आने के बाद रविवार को 600 इंजेक्शन बुलाए गए। निजी अस्पतालों में भर्ती कई मरीज अब भी इसी इंजेक्शन का इंतजार कर रहे हैं। बाजार में यह उपलब्ध नहीं है, क्योंकि सरकार ने नियंत्रण में ले लिया है।

कंपनियों से परिजन सीधे संपर्क कर रहे हैं तो उन्हें बताया जा रहा है कि कच्चा माल नहीं है तो इंजेक्शन कैसे बनाएंगे। परिजन का कहना है कि सरकार प्रयास करे। भले ही विदेश से मंगवाए, लेकिन बुलवाए जरूर।

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