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न्यायपालिका में जजों की कमी:पेंडिंग केस 56 लाख, नई नियुक्ति नहीं हुईं तो 6 महीने में 50% खाली हो जाएंगे 12 हाईकोर्ट

इंदौरएक महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।
  • 2020 में सिर्फ 50 की नियुक्ति, 7 हाईकोर्ट में आधे से कम जज

देश के 25 उच्च न्यायालयों में 56 लाख से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं। लेकिन इनमें से 7 में आधे जज भी नहीं हैं। हालात यह है कि स्वीकृत 1079 पदों के मुकाबले जजों की संख्या महज 661 रह गई है। 2020 में सिर्फ 50 जजों की नियुक्ति हो पाई है जो बीते 4 सालों में सबसे कम है।

जजों की कमी के चलते दो साल पहले तक प्रति जज 6700 लंबित मुकदमों का औसत भी अब 8500 तक पहुंच गया है। फिलहाल सभी हाईकोर्ट में रोजाना लगभग 45 हजार मुकदमे लिस्ट होते हैं। यदि स्वीकृत पद भर जाएं, तो रोजाना 70 हजार मुकदमों की सुनवाई हो सकेगी।

साल 2021 में जहां 90 जज रिटायर हो रहे हैं, वहीं कार्यकाल खत्म होने की कगार पर बैठे 60 एडिशनल जजों को परमानेंट भी किया जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में हाईकोर्ट जजेस एसोसिएशन की याचिका पर फैसला सुनाते हुए माना था कि हर 10 लाख आबादी पर 50 जज होने चाहिए। जबकि फिलहाल महज 19 जज ही हैं। यही कारण है कि हाईकोर्ट में एक मुकदमे का फैसला आने में औसतन 4 साल निचली अदालतों मे फैसले का औसत समय 7 साल तक पहुंच चुका है।

जजों की कमी के लिए एक कारण यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम हाई कोर्ट कॉलेजियम से आई लगभग 35% अनुशंसाएं अस्वीकृत कर देता है। केंद्र सरकार भी कई मामलों में नाम अस्वीकृत कर वापस सुप्रीम कोर्ट के पास भेज देती है। पिछले साल ही 20 से ज्यादा नाम ऐसे थे, जिनकी कॉलेजियम द्वारा दोबारा अनुशंसा करने पर भी केंद्र ने प्रस्ताव लंबित रखें। वहीं हाई कोर्ट कॉलेजियम से अनुशंसा मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट इन्हें केंद्र सरकार को भेजने में औसतन 4 माह (119 दिन) लगा देता है।

नियुक्ति के पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट, शिकायतों आदि की जांच में भी लंबा समय लग जाता है। विधि मंत्रालय भी अनुशंसा राष्ट्रपति के पास भेजने में लगभग इतना ही समय (127 दिन) ले लेता है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि रिक्त पदों का आकलन कर हाईकोर्ट से छह महीने के बजाय साल भर पहले ही प्रस्ताव आने चाहिए। नियुक्ति प्रक्रिया का समय 8 से 6 माह तक भी हो सके तो काफी सुधार हो सकता है।

हर 5वां लंबित मुकदमा 10 साल पुराना
56 लाख लंबित केसों में लगभग एक लाख, 30 साल पुराने हैं। 4 से 10 साल के बीच के केसों की संख्या 13 लाख है। करीब 20% यानी हर पांचवां मुकदमे को फैसले के इंतजार में 10 साल हो चुके हैं।

सुनवाई के लिए 2 से 5 मिनट
अभी पटना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और राजस्थान में सुनवाई के लिए औसतन 2-3 मिनट मिलते हैं, वहीं इलाहाबाद, गुजरात, कर्नाटक, एमपी और ओडिशा में यह औसत समय 4-5 मिनट है।

फैक्ट शीट

  • 60 हाईकोर्ट जज अगले 6 महीने में ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे
  • 90 जज इस साल होंगे रिटायर, 60 का कार्यकाल खत्म होने के नजदीक
  • 1079 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 661 जज ही नियुक्त हैं।
  • 40% पद खाली, लंबित 56 लाख मामलों में 16 लाख आपराधिक
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