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इसमें भी इंदौरी बैंक का घाटा!:महाराष्ट्र ब्राह्मण बैंक ने कोरोना काल में डिफॉल्टर्स से 56 करोड़ की जगह 4 लाख रुपए ही वसूले; 18 करोड़ की देनदारी के लिए बैंक बिल्डिंग होगी नीलाम

इंदौर/संतोष शितोले7 महीने पहले
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सहकारिता के क्षेत्र में वर्षों पुरानी स्थापित महाराष्ट्र ब्राह्मण सहकारी बैंक जो 16 साल पहले ही करोड़ों के घाटे में डूब गई थी, अभी भी उसकी हालत बहुत खराब है। 18 करोड़ की देनदारी चुकाने के लिए बिल्डिंग नीलामी की तैयारी तेज हो गई है। अब बैंक के दोनों भवनों को बेचने की तैयारी है। इसके लिए अलग-अलग तीन वेल्युअर्स से भवनों की कीमतें निकाली गई है। अब कमेटी द्वारा जल्द ही इसमें निर्णय कर नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 3400 डिफाॅल्टरों से 56 करोड़़ रुपए वसूलने हैं, लेकिन कोरोना काल के 14 माह में करीब 4 लाख रुपए की वसूली हो सकी है।

1990 से 2000 में बैंक के तत्कालीन संचालक मंडल द्वारा नियम विरुद्ध बैंक का संचालन करने और गड़बडियों के चलते बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे। फिर अलग-अलग दौर में चली सहकारिता विभाग की जांच में गड़बड़ियों की जांच की गई जो सही पाई गई। इसके बाद संबंधितों पर 2005 में केस दर्ज कर कार्रवाई की गई। इस बीच, बैंक करोड़ों के घाटे में डूब गई। संचालक भंग कर सहकारिता विभाग द्वारा बैंक का संचालन किया जा रहा है।

ऐसे हुए थे हालात खराब

2005 में बैंक के करीब 29 हजार जमाकर्ताओं के 40 करोड़ रुपए अटके गए थे। तब बैंक ने इनके रुपए लौटाने के लिए DICGC (डिपाजिट इंश्योरेंस क्रेडिट एंड गारंटी कॉर्पोरेशन) में अपील की थी। 2006 में DICGC ने छानबीन के बाद 28.66 करोड़ रु. की राशि दी थी। इसमें प्रत्येक जमाकर्ता को अधिकतम एक लाख रुपए का क्लेम किया गया था। DICGC की शर्त यह थी, बैंक तेजी से रिकवरी कर पहले 28.66 करोड़ रुपए वापस लौटाए। बैंक ने इसमें अपनी जमा राशि 5 करोड़ रुपए समेत 33 करोड़ रुपए जमाकर्ताओं में बांट दिए थे। इसके बाद भी 12660 जमाकर्ता ऐसे बचे, जिनकी जमापूंजी 17.46 करोड़ रुपए बाकी थी। बैंक ने हवाला दिया कि पहले उसे डिफाॅल्टरों से वसूली कर DICGC के 28.66 करोड़ रुपए देने होंगे। इसके बाद ही जमाकर्ताओं को रुपए लौटाए जाएंगे।

DICGC के इस आदेश के खिलाफ 13 जमाकर्ताओं ने 2008 में हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि बैंक पहले जमाकर्ताओं के रुपए लौटाए। इस पर DICGC ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि यह आदेश इन 13 जमाकर्ताओं के लिए नहीं बल्कि महाराष्ट्र बैंक सहित देशभर के इस तरह के सभी जमाकर्ताओं के लिए हैं। इस बीच तमाम पेंचों के बाद जमकर्ताओं को 8.87 % अनुपातिक वितरण किया गया जबकि 13 जमाकर्ताओं का मामला अधर में है।

मूल राशि 20 करोड़ रुपए भी वसूलने की स्थिति में नहीं बैंक

बैंक पर फिलहाल DICGC सहित अन्य की 18 करोड़ की देनदारी बकाया है। इसके चलते सालों से डिफाल्टरों से रिकवरी चल रही है लेकिन गति काफी धीमी है। इसका कारण यह भी है कि कई डिफाॅल्टरों का निधन हो गया और उनके वारिस चुकाने की स्थिति में नहीं है। कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। इनमें होम लोन, मॉडगेज व अन्य प्रकार के लोन हैं। बहरहाल, मार्च 2020 तक ऐसे ही चला लेकिन फिर मार्च में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद रिकवरी लगभग नहीं हो सकी। अभी मई 2021 तक बुमश्किल 4 लाख की ही वसूली हो सकी है। स्थिति यह है कि डिफाल्टरों के जो 56 करोड़ बाकी हैं, वह मूल राशि 20 करोड़ ही है जो बीते सालों में ब्याज सहित 56 करोड़ हो गई है लेकिन डिफाल्टर 20 करोड़ तक नहीं चुका पा रहे हैं। अब कारण यह है कि कोरोना काल में अधिकांश के नौकरी-धंधे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

50 बडे बकायादारों को नोटिस

बैंक ने हाल ही में बड़े 50 बकायदारों को नोटिस जारी किए हैं। अगर फिर भी वे रुपए चुकता नहीं करते हैं तो उनके निवास पर सूचना चस्पा की जाएंगी। इसके बाद तहसीलदार के माध्यम से जब्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरे दौर में छोटे बकायदारों को नोटिस जारी किए जाएंगे।

मुख्य भवन 3 करोड़ व दूसरा 1 करोड़ तक बिकेगा

इस बीच पिछले साल ही सहकारिता विभाग ने भोपाल स्तर पर सहमति के बाद बैंक के दोनों भवनों को नीलाम करने का फैसला लिया। इसके तहत पहले एक वेल्युअर से जेल रोड स्थित तीन मंजिला भवन का वेल्युएशन करने को कहा गया। यह रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग सहमत नहीं हुआ और सरकारी स्तर के वेल्युअर को जिम्मेदारी दी। इस रिपोर्ट के बाद एक अन्य वेल्युअर से रिपोर्ट मंगाई। इस तरह दोनों भवनों को लेकर तीन वेल्युअर्स ने अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंपी। खास बात यह कि इनमें जेल रोड (खातीपुरा) स्थित भवन की औसतन कीमत 3 से 3.30 करोड रु. व विजय नगर क्षेत्र के भवन की कीमत 1 करोड़ से 1.10 करोड़ रुपए आंकी गई है।

बताया जाता है कि मुख्य भवन शहर के बीच व्यवसायिक क्षेत्र में स्थित है जिसकी कीमत ज्यादा होनी चाहिए लेकिन चूंकि भवन काफी पुराना है इसलिए जमीन सहित यह मात्र 3 करोड़ में बिकेगा। बैंक परिसमापक डीएस चौहान ने बताया कि चूंकि अब कोरोना संक्रमण अब काफी कम हो गया है इसलिए अब इन रिपोर्ट्स को संयुक्त रजिस्ट्रार जगदीश कनौज की अध्यक्षता वाली कमेटी में रखा जाएगा। वेल्युएशन हो चुका है। ऐसे में अब कमेटी जल्द ही दोनों भवनों की नीलामी के लिए टेंडर जारी करेगी।

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