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अक्टूबर में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल फिर शुरू:हार्ट सर्जरी, न्यूरो सर्जरी सहित छह सुविधाओं से होगी शुरुआत, 15 जिलों के मरीजों को मिलेगा लाभ

इंदौर3 दिन पहले
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कई तरह की बीमारियों का आधुनिक संसाधनों के साथ इलाज व सर्जरी की मंशा से 232 करोड़ की लागत से बनाया गया सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (SSH) अक्टूबर से अपनी मूल सुविधाओं के साथ संचालित होगा। वैसे तो इस 10 मंजिला हॉस्पिटल में कई तरह की गंभीर बीमारियों के इलाज के साथ सर्जरी, ट्रांसप्लांट आदि भी होंगे लेकिन अक्टूबर में छह बीमारियों के इलाज व सर्जरी होंगी। इसके तहत यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी व हार्ट सर्जरी होंगी। इसकी तैयारियां अंतिम दौर में हैं जिसमें ऑपरेशन थिएटर का ही कुछ काम बाकी हैं। खास बात यह कि इसका लाभ इंदौर-उज्जैन के 15 जिलों के मरीजों को मिलेगा। शुरुआती दौर में 402 बेड से हॉस्पिटल का संचालन किया जाएगा। 15 अक्टूबर के बाद कभी भी इसका संचालन किया जा सकता है।

जुलाई में एससीएस मो. सुलेमान द्वारा इंदौर में ली गई बैठक में इसे अक्टूबर में शुरू करवाने की घोषणा की गई थी। इस बीच स्वास्थ्य विभाग की टीमें वैक्सीनेशन महाभियान, कोरोना टेस्ट आदि में जुटी रही। फिर जून 2021 में संक्रमण कम होने पर सबसे पहले सुपर स्पेशलिटी को कोविड हॉस्पिटल के दायरे से बाहर किया गया। दरअसल यह कई मल्टी डिसीज के इलाज व सर्जरी के लिए बनाया गया है लेकिन इसके शुभारंभ के कुछ दिनों बाद ही कोरोना की पहली लहर आई तो इसे कोविड हॉस्पिटल घोषित किया गया। फिर सबसे ज्यादा कोरोना के मरीज यहीं भर्ती रहे। इसके चलते यह अपनी मूल सुविधाओं के साथ शुरू नहीं हो सका। दूसरी लहर में तो स्थिति यह थी कि इसकी पांच मंजिलों में उपलब्ध 300 से ज्यादा बेड लंबे समय तक फुल रहे और मरीजों को लौटना पड़ा था।

सभी मंजिलों पर तैयारियां

वैसे कोराना काल में इस हॉस्पिटल सहित चारों सरकारी कोविड अस्पतालों एमटीएच, एमआरटीबी व न्यू चेस्ट सेंटर में तब 230 अस्थाई स्टाफ नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ व डॉक्टरों की नियुक्ति की थी, इन सभी की 30 जून को सेवाएं समाप्त कर दी गई। इसके बाद नर्सों व पैरामेडिकल के आक्रोश के बाद अब नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने तीन महीने के लिए 20 पदों पर फिर से अस्थाई नियुक्ति की है। वैसे पूरे हॉस्पिटल को जुलाई में ही सेनेटाइजेशन किया जा चुका है।

हॉस्पिटल के नोडल अधिकारी डॉ. एडी भटनागर ने बताया कि अक्टूबर से यहां यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी व हार्ट सर्जरी शुरू करने की पूरी तैयारी है। बस ऑपरेशन थिएटर का ही कुछ काम बाकी है। हॉस्पिटल की बेड क्षमता वर्तमान स्थिति में 402 बेड की है। अभी छठे फ्लोर तक बेड उपलब्ध हैं। सातवें फ्लोर पर ऑपरेशन थिएटर्स है व आठवें फ्लोर पर एकडेमिक ब्लॉक हैं। अभी हॉस्पिटल में तीन हार्ट सर्जन सहित 22 डॉक्टर्स हैं। 350 स्टाफ नर्सों पदों के लिए परीक्षाएं हो चुकी है। इसी माह इनमें से अधिकांश की पोस्टिंग यहीं होगी। इसके अलावा एमजीएम के अधीन ऑउटसोर्स कंपनी फिलहाल अस्पताल में एक ऑउटसोर्स कंपनी के 100 से ज्यादा कर्मचारी भी हैं। इनमें सफाईकर्मी, सिक्युरिटी गार्ड, फ्लोर इंचार्ज, सुपरवाइजर आदि हैं। इसके अलावा नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) का भी कुछ अस्थाई स्टाफ है।

6 आईसीयू व 10 ऑपरेशन थिएटर्स सहित तमाम सुविधाएं व इलाज

हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, कार्डियालॉजी, कार्डियक सर्जरी, मेडिकल गेस्ट्रोएन्ट्रोलॉजी, सर्जिकल नेफ्रोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, रिकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी व आर्गन्स ट्रांसप्लांट की सुविधाएं रहेगी। अस्पताल में 6 आईसीयू व 10 ऑपरेशन थिएटर्स हैं। वैसे प्लास्टिक सर्जरी, रिकन्स्ट्रक्टिव सर्जरी व आर्गन्स ट्रांसप्लांट की सुविधाओं में थोड़ा समय और लग सकता है। 402 बेड में से 210 बेड जनरल वार्ड में रहेंगे जबकि बाकी आईसीयू, प्राइवेट व सेमी प्राइवेट के रहेंगे।

बाहर के मरीजों को भी नहीं होगी परेशानी

खास बात यह कि अस्पताल में सारी सुविधाएं शुरू होने के बाद इसका लाभ इंदौर ही नहीं बल्कि इंदौर-उज्जैन संभाग के 15 जिलों को भी मिलेगा। कोरोना काल में भी इन जिलों के काफी मरीज यहां भर्ती रहे। दरअसल, जब अस्पताल का लोर्कापण हुआ था तब तीन फ्लोर तक संचालन किया जाना था क्योंकि बाकी फ्लोर्स पर फीटिंग, बिजली आदि का काम चल रहा था। फिर दूसरी लहर में मरीज इतने बढ़़ गए कि पांचवें फ्लोर तक तैयार कर ली गई। अब छठे फ्लोर तक मरीज भर्ती रहेंगे।

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