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सस्पेंड IAS अफसर की रिमांड 3 दिन बढ़ी:मामले के मुख्य गवाह डीपीओ शेख का तबादला, वर्मा को 17 तक रिमांड पर भेजा

इंदौर9 दिन पहले
जिला कोर्ट में पेश किया गया निलंबित आईएएस।

इंदौर में IAS अफसर संतोष वर्मा को बुधवार दोपहर जिला कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को 17 जुलाई तक रिमांड पर सौंपा है। रविवार देर रात एमजी रोड थाना पुलिस ने संतोष वर्मा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद मंगलवार देर रात वर्मा को पद से निलंबित कर दिया गया है। मामले में मुख्य गवाह मोहम्मद अकरम शेख जिला न्यायालय डीपीओ का तबादला भोपाल कर दिया गया है।

सूत्रों की मानें, तो मोहम्मद अकरम शेख इस मामले में शिकायत के बाद से ही पुलिस की मदद कर रहे थे। वहीं, केस में कानूनी दांव पेंच, आने वाली उलझनों को भी सुलझाने में मदद कर रहे थे। पुलिस शेख के माध्यम से केस को काफी हद तक सुलझा सकी है, लेकिन बुधवार देर शाम अचानक हुए शेख के तबादला सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं।

पुलिस की मानें, तो आदेश बनाकर IAS बने संतोष वर्मा इस मामले में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। अफसर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करके प्रमोशन लेने का आरोप है। संतोष वर्मा ने IAS कैडर अलॉट होने पर DPC (डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी) के लिए स्पेशल जज (CBI और व्यापमं) विजेंद्र रावत के फर्जी साइन कर रिपोर्ट तैयार की थी। IAS अफसर संतोष वर्मा नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल में तैनात थे। धार में पदस्थ वर्मा को इंदौर की रहने वाली बीमा एजेंट युवती से प्यार हो गया। इसके बाद दोनों का मिलना-जुलना बढ़ा। दोनों ने शादी कर ली। वर्मा ने शादी तो कर ली, लेकिन उसके साथ रहने में आनाकानी करने लगा। इसी से गुस्साई युवती इंदौर के लसूड़िया थाने पहुंची और वर्मा के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था।

तबादले का ऑर्डर
तबादले का ऑर्डर

बाबुओं पर साठगांठ का शक

पुलिस ने मामले में न्यायाधीश रावत की कोर्ट में पदस्थ बाबू महेश भाटी, कुश हार्डिया, नीतू चौहान और एक प्रधान लिपिक से पूछताछ की है। पुलिस को शक है, फर्जीवाड़े में कोर्ट में पदस्थ बाबू शामिल हो सकते हैं। इन्हें केस डायरी की जानकारी थी।

इसलिए बनाई थी फर्जी रिपोर्ट

7 अक्टूबर 2020 को संतोष वर्मा ने जिला कोर्ट से बनी हुई सर्टिफाइड कॉपी भोपाल मुख्यालय में पेश की। इसमें विवरण था कि लसूडिया थाने में जिस महिला ने उनके ऊपर शादी का झांसा देने की शिकायत की थी। उस केस का खात्मा हो चुका है। सर्टिफिकेट कॉपी की बदौलत ही उनका आईएएस प्रमोशन में नाम आ गया था। सूत्रों की मानें, तो जिस तारीख का सर्टिफिकेट भोपाल मुख्यालय में जमा कराया गया है, उस दिन कोर्ट जज की बैठक नहीं थी।

सूत्रों की मानें, तो 6 अक्टूबर को जिस जज द्वारा यह जजमेंट दिया जाना बताया जा रहा है। वह जज 6 अक्टूबर को अवकाश पर थे। सर्टिफिकेट कॉपी 7 अक्टूबर को कोर्ट से निकलना बताई गई है। वह संतोष वर्मा ने 8 अक्टूबर को यह कॉपी भोपाल में पेश कर दी थी।

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