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  • Rajni Jha's Composition Of Indore 'Ah Of The Shattering Petals!' Your Sinful Mind In Which Cruelty Prevailed.

BHASKAR कला-साहित्य मंच:इंदौर की रजनी झा की रचना 'बिखरती पंखुड़ियों की आह!', कैसे तेरे हाथ ना कापें, उस कोमल कपोल को तोड़ने में, हैवानियत की हद पार कर दी तूने, अपने चित्त को भरने में...

इंदौरएक महीने पहले
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बिखरती पंखुड़ियों की आह!

कली-सी कोमल कन्या थी वो, खिल भी अभी ना पाई थी।

हाय रे! तेरा पापी मन, जिसमें हैवानियत छाई थी।।

कैसे तेरे हाथ ना कापें, उस कोमल कपोल को तोड़ने में।

हैवानियत की हद पार कर दी तूने, अपने चित्त को भरने में।।

था कसूर उस किशोरी का क्या, ये आज बड़ा सवाल है।

क्या बेटी बनकर जन्मी थी इसलिए हुआ उसका ये हाल है?

क्यों हिय पे वश नहीं था तेरे, क्यों राक्षस बन उजाड़ा?

उस कन्या का उज्ज्वल सवेरा,

दिया है जख्म उसे जो तूने,

कभी ना भर पाएगी,

दुनिया की कोई दवा उस पे असर ना दिखलाएगी।

तुझको फांसी मिलने पर भी हमें तरस ना आएगी।।

उस बाला की बदहाली पर ये उठता बड़ा सवाल है।

क्या बेटी बनकर जन्मी थी इसलिए हुआ उसका ये हाल है?

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