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नहीं रुकी 'जीवन रक्षक' की कालाबाजारी:कोविड पेशेंट के परिवारवालों से रेमडेसिविर तो मंगवाते पर उसे लगाते नहीं, चोरी कर बाहर बेच देते; 4 मेल नर्स से 5 इंजेक्शन जब्त

इंदौर7 महीने पहले
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इंदाैर में क्राइम ब्रांच ने रेमडेसिविर की ब्लैक मार्केटिंग करने वाले गिराेह काे पकड़ा है। निजी अस्पताल में मेल नर्स होने का फायदा उठाकर ये लोग इंजेक्शन तो मंगवाते, लेकिन पेशेंट को लगाने की जगह उसे चुरा लिया करते थे।

इसके बाद इंजेक्शन को बाहर बेच देते थे। अब तक आरोपी 30 से ज्यादा इंजेक्शन बेच चुके हैं। पुलिस ने 4 आरोपियों के पास से 5 इंजेक्शन जब्त किए हैं। इसके अलावा, इनके पास से एक कार, 60 हजार 650 रुपए नकद और मोबाइल जब्त किए हैं।

कार में बैठकर ग्राहक के आने का इंतजार कर रहे थे।
कार में बैठकर ग्राहक के आने का इंतजार कर रहे थे।

कोरोना काल में लगातार हो रही रेमडेसिविर की कालाबाजारी रोकने के निर्देश डीआईजी मनीष कपूरिया ने सभी थानों को दिए हैं। क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी, बाणगंगा क्षेत्र में लव कुश चौराहे के आसपास सफेद रंग की कार (MP-33/C-6765) में चार युवक रेमडेसिविर बेचने की फिराक में हैं। ये चारों मेल नर्स होने के साथ ही होम आइसोलेशन वाले पेशेंट के प्राइवेट केयर टेकर का भी काम करते हैं। इस पर टीम गठित कर बाणगंगा पुलिस के साथ मौके पर रवाना किया गया।

टीम ने पाया कि लवकुश चौराहा सर्विस रोड पर श्मशान के सामने कार खड़ी है। जांच के दौरान कार में चवार लोग बैठे मिले। ड्राइवर सीट पर बैठे युवक ने अपना नाम संदीप ओझा पिता रामजीवन ओझा निवासी ए-1/101, करोल बाग सांवेर रोड बताया। उसने बताया, वह मूलत: श्री आनंदपुर ट्रस्ट सुखपुर अस्पताल ईशागढ़, अशोकनगर का रहने वाला है। वहीं, कार सवार तीन अन्य युवकों ने अपना नाम चिरंजीव पिता रूपसिंह निवासी सिल्वर सी-1 करोल बाग बाणगंगा, हरिराम पिता गणेश राम केवट निवासी 501 हरसिंगार बिल्डिंग बाणगंगा और सोनू पिता कन्हैया बैरवा निवासी करोल बाग सी-1/613 बाणगंगा बताया।

तलाशी में नके पास से 5 इंजेक्शन मिले। इसकी कीमत करीब 50 हजार रुपए है। इनसे इंजेक्शन को लेकर कागजात मांगे, जो वे दिखा नहीं पाए। पूछताछ में इन्होंने मेल नर्स की नौकरी करना स्वीकार किया। बताया कि ये इंजेक्शन उन्होंने कोविड मरीजों के परिवारवालों से मंगवाए थे। उन्होंने उक्त इंजेक्शन को कोविड मरीज को नहीं लगाया, बल्कि उसे चुरा लिया।उसे ऊंची कीमत पर अन्य मरीज को बेचने वाले थे। उन्होंने बताया कि अब तक वे इसी प्रकार से 30 से अधिक इंजेक्शन बेच चुके हैं। वे एक इंजेक्शन को 25000 से 40000 रुपए में बेचते हैं।

पुलिस आरोपियों से अब तक उन्होंने किन-किन से इस प्रकार की धोखाधड़ी की और किन्हें इंजेक्शन बेचे, इस संबंध में मेडिकल स्टोर और अस्पताल की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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