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इंटरनेशनल प्रोस्टेट अवेयरनेस मंथ:रिसर्च में खुलासा; 50 की उम्र के बाद 50% से ज्यादा पुरुषों में पाए जा रहे प्रोस्टेट के सिम्टम्स

इंदौर19 दिन पहले

बीते सालों में प्रोस्टेट की समस्या से ग्रस्त पुरुषों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इंदौर सहित अन्य शहरों के रिसर्च के अनुसार 50 वर्ष की उम्र के बाद 50 से 80% पुरुषों में प्रोस्टेट के लक्षण पाए जा रहे हैं। वे इसे सामान्य लक्षण मान लेते हैं लेकिन इसे लेकर अवेयरनेस बहुत जरूरी है। सितम्बर माह इंटरनेशनल प्रोस्टेट अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जा रहा है। आइए जानते ह

सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि नागर के मुताबिक 50 साल की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट एनलार्जमेंट होने लगता है। यह यूरिनरी ब्लेडर और यूरिनरी टैक्ट पर दबाव डाल सकता है। इस कारण रात में बार-बार बार यूरिन आना, अचानक से यूरिन आना व कंट्रोल ना कर पाना, यूरिन होने के बाद भी संतुष्टि न हो पाना, यूरिन के प्रवाह में कमी आना व जोर लगाना पड़ना, रुक रुक कर यूरिन होना, यूरिन करने में जलन होना आदि प्रोस्टेट के लक्षण दिखने लगते हैं। प्रोस्टेट के लक्षण होने पर सोनोग्राफी द्वारा उसके आकार, यूरोफ्लोमिट्री टेस्ट द्वारा यूरिन का फ्लो, पीएसए (प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन) एवं अन्य टेस्ट करवाए जाते हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक प्रोस्टेट बढ़ने की समस्या को नज़र अंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका असर किडनी और अन्य ऑर्गन्स पर भी हो सकता है। डायबिटीज पेशेंट्स को इसे लेकर जागरुक रहना चाहिए। क्योंकि लोग इसे शुगर बढ़ने के कारण बार-बार यूरिन आने की समस्या मानते हैं। सामान्य तौर पर 50 वर्ष के बाद हर दूसरे साल में प्रोस्टेट की जांच पीएसए और सोनोग्राफी कराना चाहिए। पीएसए एक प्रोटीन है जो केवल प्रोस्टेट ग्लैंड द्वारा बनाया जाता है। पीएसए एक प्रकार की खून की जांच है जो प्रोस्टेट कैंसर को पता लगाने के लिए की जाती है। यह प्रोस्टेट कैंसर का स्क्रीनिंग टेस्ट है।

घबराएं नहीं बस ये बातें ध्यान

- यह इन्फेक्शन या किसी अन्य कारण नहीं बल्कि एज रिलेटेड डिसीज है।

- यह डिसीज जेनेटिक भी हो सकती है।

- प्रोस्टेट के बढ़ने की समस्या से पीड़ित हर पेशेंट को ऑपरेशन कराना जरूरी नहीं है।

- माइल्ड से मॉडरेट लक्षण होने पर उसे मेडिसिन द्वारा ट्रीट किया जाता है।

- सीवियर लक्षण या मेडिसिन से आराम नहीं मिल पाने, यूरिन में ब्लड, स्टोन होना, बार बार इन्फेक्शन होना या किडनी पर असर होने की स्थिति में ऑपरेशन की सलाह दी जाती है।

- यह दूरबीन का लेजर ऑपरेशन होता है जिसमें कोई कट-चीरा नहीं लगता है। पेशेंट को बिना दर्द के, बिना खून प्रवाह के लेजर द्वारा प्रोस्टेट की रुकावट वाला भाग निकाला जाता है। ऑपरेशन के बाद एक या दो दिन के लिए कैथेटर रहता है। यह सुरक्षित व अच्छे परिणाम देने वाला ऑपरेशन है।