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MP के TB मरीजों की रिपोर्ट अटकी:इंदौर के MRTB हॉस्पिटल से वायर काट ले गए चोर, लैब मशीनें बंद हुईं; सैंपल नहीं लिए जा सकेंगे

इंदौर6 महीने पहले

MRTB (मनोरमा राजे TB हॉस्पिटल) में दो दिन पहले रात को चोर यहां IRL Lab (Intermediate Reference Laboratory) के वायर चुराकर ले गए। वायर काटने से लैब की सैंपल मशीनों को भी नुकसान हुआ है। इससे IRL लैब की मशीनों ने काम करना बंद कर दिया है। लैब में TB की जांच होती है। अब ये मशीनें बंद होने से सैकड़ो मरीजों के सैंपलों की रिपोर्ट अटक गई है। अब मशीनों से संबंधित कंपनियों के इंजीनियर्स को बुलाना पड़ेगा। नुकसान का आकलन होगा। इसके बाद नए सिरे से काम होगा। ऐसे में समय भी लग सकता है। दूसरा यह कि इस लैब में पूरे मप्र के TB सैंपल टेस्ट किए जाते हैं। इसमें दो माह का समय लगता है। अब मशीनें बंद होने से करीब एक हफ्ते तक पूरे राज्य के सैंपल टेस्ट नहीं हो सकेंगे।

घटना शनिवार-रविवार की दरमियानी रात हुई थी। इन दो दिनों में सरकारी अवकाश था। बदमाश हॉस्पिटल की छत पर चढ़े। यहां से ही IRL लैब के केबल वायर काटकर चुराकर ले गए। इस दौरान उन्होंने मशीन को ढंकने वाली ग्रिल भी तोड़ दी। लैब के HOD डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि चोरी गए केबल की कीमत 30 हजार रु. है, लेकिन वारदात के दौरान बदमाशों ने मशीनों को नुकसान पहुंचाया है, उससे 300 से ज्यादा सैंपलों की रिपोर्ट अटक गई है। इसके साथ ही मशीनों के ठीक नहीं होने तक नए सैंपल नहीं लिए जा सकेंगे। इस लैब में पूरे मप्र के सैंपल टेस्ट किए जात हैं। लैब में 2019 में 25 हजार व 2020 में 17 हजार सैंपल टेस्ट किए गए थे।

करोड़ों की लागत की हैं मशीन

TB पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय व राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर काम किए गए हैं। इसी कड़ी में 2010 में CTD (Central TB Division), STB (State TB Office) व WHO (World Health Organisation) से जुड़े NGO, FIDR (Foundation for Innvation Diagonis and Research) ने संयुक्त रूप से इंदौर के MRTB हॉस्पिटल में इस लैब की स्थापना के साथ अमेरिका में निर्मित इस करोड़ों रु. की मशीन को इंस्टॉल किया गया था। इस तरह एक दशक से यहां राज्यभर के सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं।

एक हफ्ते तक टेस्ट नहीं हो सकेंगे!
डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक एक बार मशीन पर 900 सैंपल टेस्ट किए जाते हैं। इसमें जब भी सैंपल पॉजिटिव रहता है तो कई बार जांच की जाती है, जो दो महीने तक चलती है। अब चोरों द्वारा मशीनों को नुकसान पहुंचाने से कंपनी के एक्सपर्ट आकर इसका आकलन करेंगे। फिर जो भी पार्ट्स खराब होगा, वो रिप्लेस होगा या नया लगेगा, उसके ऑर्डर जारी होंगे। फिर पार्ट्स आने व लगाने में समय लगेगा। ऐसे में कम से कम एक हफ्ते सैंपल टेस्ट नहीं किए जा सकेंगे।

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