हमारा घर, हमारा विद्यालय:सुबह 10 बजे घर पर ही बजी स्कूल की घंटी, बच्चे तैयार होकर क्लास के लिए बैठे; शनिवार को मस्ती पाठशाला होगी

इंदौरएक वर्ष पहले
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मोहल्ले के बच्चे एक घर में ही पढ़ाई करने पहुंचे। इस दौरान सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा। - Dainik Bhaskar
मोहल्ले के बच्चे एक घर में ही पढ़ाई करने पहुंचे। इस दौरान सभी ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा।
  • योजना के तहत सोमवार से शुक्रवार तक सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक विषय के अनुरूप क्लाश चलेगी
  • शनिवार शाम को 2 घंटे विद्यार्थी अपने पारिवारिक बड़े-बुजुर्गों से कहानियां सुनकर उन पर नोट्स तैयार करेंगे

प्रदेश के हर घर में सोमवार सुबह स्कूल की घंटी सुनाई दी। यह हुआ है कोरोना संकटकाल में विद्यार्थियों की शैक्षिक निरंतरता बनाए रखने के लिए, राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हमारा घर, हमारा विद्यालय योजना के तहत। इस योजना के तहत सोमवार से बच्चों को घर पर ही स्कूली वातावरण में पढ़ाई करवाई जा रही है। इस दौरान बच्चे पढ़ेंगे, लिखेंगे कहानियां सुनेंगे और उन पर नोट्स भी तैयार करेंगे।

क्लास में पहुंचे बच्चे को पहले मास्क दिया गया। इसके बाद उसने पढ़ाई शुरू की।
क्लास में पहुंचे बच्चे को पहले मास्क दिया गया। इसके बाद उसने पढ़ाई शुरू की।

इसकी औपचारिक शुरुआत पिछले दिनों मंत्रालय में फेसबुक लाइव कार्यक्रम हमारा घर, हमारा विद्यालय में विभाग की प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी ने किया था। उन्होंने पालकों से आग्रह किया है कि बच्चों को घर पर भी अध्ययन का वातावरण उपलब्ध कराएं। उन्हें घर में ही एक उचित स्थान दें, जहां वे बिना किसी व्यवधान के अपनी पढ़ाई कर सकें।

सुबह 10 बजे पालकों ने बताई घंटी

यह योजना प्रदेश के कक्षा 1 से 8 तक के विद्याथिर्यों के लिए बनाई गई है। वे अपने घर पर ही विद्यालय के वातावरण में पढ़ाई कर सकेंगे। घर के स्कूल में सुबह 10 बजे पालक द्वारा घंटी/थाली बजाकर स्कूल शुरू किया गया। इसी प्रकार दोपहर 1 बजे घण्टी/थाली बजाकर अवकाश किया जाएगा। इससे बच्चों को घर में ही विद्यालय का आभास होगा। इस कार्यक्रम के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र ने एक सुझावात्मक समय सारिणी भी पालकों और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई है।

बड़े बुजुर्गों ने बच्चे सुनेंगे कहानियां

समय-सारिणी के अनुसार, सोमवार से शुक्रवार सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक विषय के अनुरूप अध्ययन होगा। शनिवार को मस्ती की पाठशाला के तहत मनोरंजनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। शाम को 2 घंटे विद्यार्थी अपने पारिवारिक बड़े-बुजुर्गों से कहानियां सुनकर उन पर नोट्स तैयार करेंगे और योग तथा अन्य खेलकूद की गतिविधियों का आयोजन अपने घर पर ही करेंगे। राज्य शिक्षा केन्द्र के द्वारा इस संबंध में अनेक पारंपरिक गतिविधियों के सुझाव भी प्रदान किए गए हैं।