मालवा-निमाड़ में MIC पर दंगल:इंदौर-उज्जैन में पेंच; रतलाम में भोपाल से तय होंगे नाम, खंडवा में 15 दावेदार

इंदौर3 महीने पहलेलेखक: संतोष शितोले

नगर निगम चुनाव में महापौर, पार्षदों और सभापति के निर्वाचन के बाद अभी सभी की नजर एमआईसी के गठन को लेकर है। जहां तक मालवा-निमाड़ में पांच नगर निगम की एमआईसी का सवाल है इसमें सबसे ज्यादा इंदौर और उज्जैन में घमासान है। देवास में एमआईसी का गठन हो चुका है। रतलाम में आठ नाम सामने आए हैं, इनके नाम लगभग तय हैं। वहीं खंडवा में 15 दावेदार हैं। यहां महापौर भी अपने पास कुछ विभाग रखेंगे।

यहां मालवा-निमाड़ की एमआईएसी गठन की पड़ताल के साथ पढ़िए कि एमआईसी क्या है? ये कैसे काम करती है, इस पर नियंत्रण किसका होता है? आमतौर पर जिस पार्टी का महापौर चुना जाता है उसी पार्टी के पार्षदों को एमआईसी में तवज्जो दी जाती है, लेकिन सिंगरौली की स्थिति से जानिए कि किस तरह विपक्षी दलों के पार्षदों को शामिल कर एमआईसी का गठन किया जाता है।

सबसे पहले जान लेते हैं प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर नगर निगम की स्थिति

इंदौर में वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला व मालिनी गौड के समर्थक पार्षदों को एमआईसी में शामिल किए जाने तो लेकर काफी होड़ मची है। इसे लेकर सूची भोपाल पहुंची है और संभावना है कि एक-दो में नाम घोषित कर दिए जाएंगे।

इंदौर में महिला पार्षद को लेकर भी खींचतान

इंदौर नगर निगम में एमआईसी में महिला पार्षद को शामिल करने और नहीं करने को लेकर भी काफी दबाव है। कोशिश की जा रही है कि इस एक महिला पार्षद को एमआईसी में रखा जाए लेकिन इसके बदले किसी अच्छे दावेदार पार्षद को बाहर रखना होगा। विधानसभावार ये हैं दावेदार-

विधानसभा : 1

निरंजन चौहान, अश्विन शुक्ल व पराग कौशल।

विधानसभा : 2

राजेंद्र राठौर व जितेंद्र कुमार यादव (जीतूू)। महिला में पूजा पाटीदार।

विधानसभा : 3

मनीष शर्मा व गजानन गावडे।

विधानसभा : 4

कमल लड्‌ढा व राकेश जैन।

विधानसभा : 5

राजेश उदावत, नंदकिशोर पहाडिया व प्रणव मंडल।

राऊ :
अभिषेक शर्मा (बबलू) व ओमप्रकाश आर्य। महिला में लक्ष्मी वर्मा।

गिदवानी को लेकर मालिनी गौड़ मुखर

विधानसभा 4 में इस बार कंचन गिदवानी के टिकिट को लेकर भी जमकर विरोध हुआ और सांसद शंकर लालवानी के खिलाफ नारेबाजी हुई थी। फिर गिदवानी के जीतने के बाद उनका नाम अपील समिति में शामिल किया जिसे लेकर फिर विरोध हुआ। इस पर उनका नाम काटा गया। अब एमआईसी को लेकर विधायक मालिनी गौड ने उनके नाम का जमकर विरोध किया है। ऐसे में महिला में पूजा पाटीदार व लक्ष्मी वर्मा के नाम हैं। हालांकि पूजा पाटीदार की संभावना भी कम ही है।

उज्जैन में डॉ. योगेश्वरी, दुर्गा व वर्मा के नाम तय

उधर, उज्जैन में एमआईसी में अनुभवी पार्षदों को प्राथमिकता देने पर विचार चल रहा है। इसे लेकर भाजपा संगठन की दो से तीन बैठकें हो चुकी हैं। संकेत हैं कि दक्षिण क्षेत्र से ज्यादा पार्षद जीते हैं इसलिए महापौर परिषद में भी इन्हें ही ज्यादा मौका मिलेगा। इसके लिए विधायक व मंत्री डॉ. मोहन यादव व उत्तर क्षेत्र के विधायक पारस जैन अपने-अपने समर्थक पार्षदों को शामिल करने की होड़ में है। दक्षिण में दो विधानसभा क्षेत्रों में निगम के 54 वार्ड हैं। इनमें उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 33 वार्ड हैं। भाजपा 18 वार्डों में जीती हैं जबकि दक्षिण विधानसभा में 21 वार्ड हैं। इनमें से भाजपा 19 वार्डों जीती है। कुल मिलाकर दक्षिण के वार्डों में भाजपा का दबदबा ज्यादा है।

यह है स्थिति

- डॉ. योगेश्वरी, दुर्गा और प्रकाश शर्मा के नाम लगभग तय। इनमें डॉ. योगेश्वरी तीसरी बार पार्षद बनी है।

- दुर्गा शक्तिसिंह चौधरी तीन बार की पार्षद हैं।

- प्रकाश शर्मा, रामेश्वर दुबे और शिवेंद्र तिवारी : एमआईसी में जाति समीकरण भी देखा जा रहा है। ऐसे में ब्राह्मण कोटे से प्रकाश की दावेदारी मजबूत है। इनमें से तीनों या दो तो लगभग तय है।

- दिलीप सिंह परमार को सिंधिया समर्थक होने का फायदा मिल सकता है।

- सुरभि सुनील चावंड, लीला वर्मा : एक पार्षद आरक्षित भी हो सकता है। इनमें से एक नाम संभव है।

- भारती विजय चौधरी व अंशु गोपाल अग्रवाल के नाम भी प्रस्ताव में है। इसके अलावा दिलीप सिंह, गब्बर भाटी, आशिमा गौरव सेंगर, कैलाश प्रजापत व रजत मेहता के नामों पर भी विचार किया जा सकता है।

खंडवा निगम एमआईसी में 15 से ज्यादा दावेदार, महापौर भी रखेंगे विभाग

खण्डवा नगर निगम में एमआईसी में 9 सदस्य हैं और गठन होना बाकी है। यहां कुल 50 पार्षद हैं जिनमें से 30 भाजपा के हैं। इनमें 15 से ज्यादा दावेदारी कर रहे हैं। नौ विभागों में से 2-3 विभाग खुद महापौर भी अपने पास रख सकते हैं। दावेदारों में राजेश यादव, आशीष चटकेले, गोपी शर्मा, रोशनी गोलकर, विक्की बावरे, दीना पंवार, सोमनाथ काले, आशीष शर्मा, मोनिका बजाज, प्रकाश यादव आदि हैं।

रतलाम में आठ संभावित के नाम आए सामने

रतलाम में एमआईसी का गठन नहीं हुआ है। महापौर प्रहलाद पटेल भोपाल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद इसकी घोषणा करेंगे। निगम में भाजपा के कई वरिष्ठ पार्षद चुनाव जीतकर पहुंचे हैं। इनमें तीन बार के पार्षद भगत सिंह भदौरिया, अनिता कटारा, पप्पू पुरोहित, धर्मेंद्र राका, विनोद संघवी, कविता चौहान, सपना त्रिपाठी और निशा पवन सोमानी को एमआईसी में जगह मिलने की उम्मीद है।

देवास : एमआईसी का हो चुका गठन

देवास में एमआईसी का गठन हो चुका है। इनमें पिंकी संजय दायमा, रितिका विनय सांगते (जल कार्य व सीवरेज), गणेश पटेल (लोक निर्माण तथा उद्यान विभाग), जितेंद्र मकवाना (राजस्व), अजय तोमर (वित्त एवं लेखा), सपना अजय पंडित (विद्युत एवं यांत्रिकी), धर्मेंद्रसिंह बैस (स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन), मुस्तफा अंसार अहमद हाथीवाले (यातायात एवं परिवहन विभाग), रामदयाल यादव (योजना एवं सूचना प्रौद्योगिकी) तथा शीतल गेहलोत (शहरी गरीब उपशमन विभाग) हैं।

जानिए क्या है एमआईसी

- एमआईसी सदस्य का काम सरकार के मंत्री की तरह काम होता है। इसमें 10 सदस्य होते हैं जिनके पास अलग-अलग चार्ज होता है।

- एआईसी के विभाग में रेवेन्यू, हेल्थ, जल कार्य, जन कार्य, ट्रैफिक, बिजली आदि विभाग होते हैं। राजनीतिक दृृष्टि से इनमें रेवेन्यू, हेल्थ तथा जल कार्य मलाईदार विभाग माने जाते हैं।

- एमआईसी सदस्य महापौर को रिपोर्ट करते हैं। महापौर भी समय-समय पर बैठक लेते हैं और उनकी जवाबदेही तय करते हैं।

- महापौर को अधिकार है कि वह किसी भी एमआईसी सदस्य को हटा भी सकते हैं और अन्य किसी पार्षद को भले ही वह अन्य पार्टी या निर्दलीय हो, उसे सीनियर पार्षद बतौर एडजस्ट कर सकता है।

- महापौर के पास अधिकार है कि वे कभी भी एमआईसी सदस्य को हटा सकते हैं। चुने गए किसी भी पार्षद को एमआईसी में शामिल कर सकते हैं।

- महापौर विपक्ष या निर्दलीय पार्षद को भी बना सकते हैं। मप्र में इस बार सिंगरौली में इस तरह के समीकरण बनेंगे। यहां महापौर के पास आम आदर्मी पार्टी के पांच ही पार्षद हैं, एमआईसी को पूरा करने के लिए अन्य दलों के पार्षदों को एमआईसी में शामिल करना होगा।

जानिए सिंगरौली की एमआईसी परिषद की स्थिति

इस बार सिंगरौली में आम आदमी पार्टी की रानी अग्रवाल महापौर बनी हैं। एमआईसी के लिए आप के 5 ही पार्षद हैं। ऐसे में 5 अन्य में दूसरी पार्टी या निर्दलीय पार्षद को एमआईसी में लिया जाएगा क्योंकि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। दूसरा निगम संविधान में भी दूसरे दल के पार्षदों को एमआईसी में लेने का प्रावधान है।

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