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इंदौर में डेवलप हो रहा ग्रीन पॉकेट:SGSITS बिना खर्च के तैयार कर रहा कैंपस फॉरेस्ट और मियावाकी फॉरेस्ट, कॉलेज में 10 हजार पेड़ों से 2.9 एकड़ में बनेगा जंगल

इंदौर4 महीने पहले

5 बार से लगातार सफाई में नंबर वन आने के बाद इंदौर में अब बेहतर आबोहवा के लिए भी काम किया जा रहा हैं। आबोहवा सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच प्रदेश के सबसे पुराने इंजीनियरिंग कॉलेज SGSITS अपने परिसर में कैंपस फॉरेस्ट और मियावाकी फॉरेस्ट तैयार करने की प्रकिया शुरू कर दी हैं।

SGSITS प्रबंधन द्वारा बनाए जा रहे इन फॉरेस्ट की खास बात यह है कि इन्हें बिना किसी खर्च के तैयार किया जा रहा हैं। 30 एकड़ में बने कॉलेज कैंपस के लगभग 1.9 एकड़ में कैंपस फॉरेस्ट और लगभग 1 एकड़ में मियावाकी पद्धति से फॉरेस्ट तैयार जा रहा हैं। कॉलेज के कैंपस व मीडिया प्रभारी एलेक्स कुट्टी ने बताया कि लगभग 10 हजार नए पेड व पौधे यहां पर लगाए जाएंगे।

SGSITS 30 एकड़ जमीन पर फैला हुआ हैं जिसमें से 8 एकड़ जमीन पर ओपन स्पेस है। जिसमें लगभग 1 लाख से ज्यादा पेड़ और पौधे लगे हुए हैं। जिस कारण कैंपस की आबोहवा शुद्ध होने के साथ भूजल स्तर भी अच्छा हैं। वहीं कैंपस को ग्रीन पॉकेट बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा और कैंपस का टेम्प्रेचर भी थोड़ा कम रहेगा।

2 छोटे तालाब बनाएं अब लगाएंगे पौधे

कैंपस के मुख्य प्रवेश द्वार के पास ही दोनों फॉरेस्ट बनाया जा रहा हैं। जहां पर पिछले 2 माह में 2 नए छोटे तालाब बनाने के साथ ही गड्ढे तैयार करने के बाद गार्डन वेस्ट ज़मीन पर बिछा दिया गया है। एलेक्स ने बताया कि अभी यहां की मिट्टी ज्यादा उपजाऊ नहीं हैं। जिसे ठीक पर पौधे लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

15 रिचार्जिंग सिस्टम, एसटीपी से 8 एकड़ में होती हैं सिंचाई

कॉलेज कैंपस में हरियाली के साथ भूजल स्तर सुधारने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। कैंपस में जगह जगह वाटर रिर्चाजिंग सिस्टम बनाया गया हैं। कैंपस में लगभग 15 वाटर रिचार्जिंग पिट तैयार किए हैं। ग्रे वाटर साफ करने के लिए एसटीपी प्लांट लगाया गया हैं। जहां परिसर का गंदा पानी साफ कर कैंपस में लगे 1 लाख पेड़, पौधों सहित मैदान व गार्डन की सिंचाई की जाती हैं।

2 साल में तैयार किए पौधे

कैंपस प्रभारी एलेक्स ने बताया कि हमने कॉलेज में ही पिछले दो साल में 50 हजार से ज्यादा सीड बाल से पौधे तैयार किए हैं। जो अब इन फॉरेस्ट में लगाए जाएंगे। वहीं कॉलेज की सकारात्मक पहल को देख कर वन विभाग भी आगे रहकर हमें निशुल्क मदद करने की बात कह रहा हैं।

कैंपस का तापमान शहर से 20 प्रतिशत कम, एक्यूआई भी ज्यादा अच्छा

मप्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पूर्व वैज्ञानिक के अनुसार SGSITS कॉलेज कैंपस में एक्यूआई लेवल 60 से 65 के बीच ही रहता हैं। जबकि शहर के अन्य क्षेत्रों में एक्यूआई लेवल 80 से 90 के बीच रहता हैं। वहीं 1 लाख से ज्यादा पेड़ होने के कारण शहर के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले तापमान में 20 प्रतिशत की कमी रहती हैं।

पीटीसी और डेली कॉलेज में भी है मियावाकी फॉरेस्ट

मियावाकी टेक्निक से पुलिस ट्रेनिंग स्कूल और डेली कॉलेज में भी प्लांटेशन किया गया है। दोनों ही जगह यह प्रयोग सफल रहा है। पीटीसी में दो मियावाकी फॉरेस्ट हैं। एक में पांच हजार और दूसरे में तीन हजार पेड़ हैं। वहीं डेली कॉलेज में भी मियावाकी फॉरेस्ट है, जिसमें लगभग 40 हजार पेड़ हैं।

यह है मियावाकी टेक्नीक

मियावाकी फॉरेस्ट एक जापानी टेक्नीक हैं। जिसे डेंस प्लांटेशन भी कहा जाता है। इस टेक्निक में एक मीटर गहरे गड्ढे खोदे जाते हैं और पौधे दो- दो फीट की दूरी पर लगाए जाते हैं। सामान्य तरीके से लगाए जाने वाले पौधे एक साल में चार फीट तक ही बढ़ पाते हैं, जबकि मियावाकी टेक्नीक से लगाए गए पौधे एक साल में 10 से 12 फीट तक बढ़ जाते हैं। जिस कारण से अधिकतर पौधे तेज़ बारिश और आंधी के बीच भी सर्वाइव कर जाते हैं।

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