ग्राउंड रिपोर्टMP में लंपी से तड़प रही गायें:हालत देख लोग कर रहे मवेशियों की मौत की प्रार्थना, मंत्री बोले- सब कंट्रोल में है

इंदौर/मंदसौर16 दिन पहले

मध्यप्रदेश में लंपी वायरस के अटैक से मवेशी तड़प-तड़पकर मर रहे हैं। घरों के चबूतरों और बाड़ों में दर्द से रंभाती गायों को देख लोगों की आंखों में आंसू आ रहे हैं। कुछ गायों और बछड़ों का शरीर इतना गल गया है कि वे तड़पते हुए सांस लेने का प्रयास कर रहे हैं। प्रार्थनाएं की जा रही हैं कि भगवान इन मवेशियों को जल्दी उठा लें।

इधर, सरकार इन सबसे बेखबर है। पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल से जब भास्कर ने सवाल किया तो उनके पास कोई जवाब नहीं है, जबकि इंदौर के नजदीक एक गांव में खुद सरपंच ने 25 से ज्यादा गायें मरने की बात कही है। गांव से दूध खरीदना बंद कर दिया है। लोगों को आशंका है कि सरकार ने कदम नहीं उठाया तो मध्यप्रदेश में भी राजस्थान जैसे हालात बन सकते हैं। वहां भी जब लंपी का शुरुआती दौर था, तो सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। हालात लगातार बिगड़ते चले गए। राजस्थान सरकार का कहना था- सब कंट्रोल में है। यही कहना मध्यप्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री का भी है- सब नियंत्रण में है।

भास्कर ने मध्यप्रदेश के 6 जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट की।

सबसे पहले इंदौर, भास्कर टीम के सामने गाय ने तोड़ा दम
इंदौर शहर से 60 किमी दूर देपालपुर का सेमदा गांव। भास्कर टीम रामचरण बमोत्रिया के बाड़े में पहुंची। टीम के सामने ही एक गाय ने दम तोड़ दिया। रामचरण ने जेसीबी बुलवाई और गांव से दो किलोमीटर दूर जंगल में गड्‌ढा खुदवाकर गाय को दफनाया। पवन ने बताया कि उनकी दो गायों की मौत हो चुकी है। अभी तीन गायें और एक बछड़ा बीमार है। गांव के रमेश गायों को सहलाते हुए खुद हल्दी से इलाज करते दिखे। उनके पास ही बैठे किसान कमल ने बताया कि गांव में 200 गायें बीमार हैं। हमारी नींद उड़ी हुई है। सरपंच गजराज बमोत्रिया से बात की तो उन्होंने 25 से 30 गायों के मरने की बात कही। गांव की सौदराबाई ने 50 गायों की मौत की बात कही। रश्मि चौहान और दिनेश केवट ने बताया कि रोज एक गाय की मौत हो रही है। उधर, पशु चिकित्सा विभाग सिर्फ 1 गाय के मरने और 89 बीमार में से 72 गायों के रिकवर होने की बात कह रहा है, लेकिन मैदानी हकीकत इसे सिरे से झुठलाती है। आज मंगलवार सुबह ही गांव के कल्याण पटेल, जगन्नाथ मालवीय और रमेश की गायों ने दम तोड़ दिया।

भास्कर की खबर के बाद पशु मेले में खरीद-बिक्री पर रोक

दैनिक भास्कर ने जब इंदौर और उसके पास के गांव के हालात को बताया तो मंगलवार शाम में इंदौर संभागायुक्त पवन कुमार शर्मा ने संभाग के सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया। कहा- वह अपने-अपने जिलों में शिविर आयोजित कर पशुओं का टीकाकरण और इलाज सुनिश्चित करें। सेवा पखवाड़े के तहत समस्त जिलों में गौशालाओं में गौसेवा कार्यक्रम का आयोजन 27 सितंबर को किया जाना है। वहीं, इंदौर जिले के अन्तर्गत लगने वाले समस्त पशु हाट बाजारों में पशुओं का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित कर दिया गया है। लंपी वायरस फैलने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी किया गया है। इंदौर, देपालपुर, हातोद, महू, सांवेर, मल्हारगंज, जूनी इंदौर, कनाडिया, राऊ, खुड़ैल, भिचोली हप्सी की सीमाओं में पशु वाहनों का प्रवेश और आवागमन प्रतिबंधित रहेगा।

मृत गायों को दफनाने का खर्च 2 हजार रुपए...

पशु पालकों का कहना है कि प्राइवेट वेटरनरी डॉक्टर की हर बार की फीस 1500 रुपए है। ऊपर से गायों को दफनाने के लिए खेत में ही बड़ा गड्‌ढा करने के लिए जेसीबी वाले को डेढ़ से दो हजार रुपए देने पड़ते हैं। इसके साथ नमक भी खरीदना पड़ता है।
पशु पालकों का कहना है कि प्राइवेट वेटरनरी डॉक्टर की हर बार की फीस 1500 रुपए है। ऊपर से गायों को दफनाने के लिए खेत में ही बड़ा गड्‌ढा करने के लिए जेसीबी वाले को डेढ़ से दो हजार रुपए देने पड़ते हैं। इसके साथ नमक भी खरीदना पड़ता है।

सेमदा के आसपास के गांव सेफ, जानिए सेमदा में ही क्यों फैली बीमारी...
सेमदा गांव के पास खटवाडी, खजरिया, लिम्बोदा सहित 15 से ज्यादा गांव हैं, लेकिन लंपी वायरस ने इसी गांव पर पूरी तरह से अटैक किया है। बीमार गायें भी स्वस्थ गायों के साथ रखी गई हैं। इससे बीमारी भी तेजी से फैल रही है। पशुपालकों के मुताबिक, सरकारी वेटरनरी का अमला तीन-चार दिन पहले आया था। गायों को देखा, इंजेक्शन लगाया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। देपालपुर नगर परिषद ने हर मंगलवार को यहां लगने वाले पशु हाट बाजार पर रोक लगा दी है।

लोन लेकर खरीदी गाय, 15 दिन में सबकुछ चौपट...
अशोक सोलंकी ने 50 हजार रुपए का लोन लेकर गाय खरीदी है और उसकी हालत नाजुक है। लोगों ने उनसे दूध खरीदना बंद कर दिया है। गांव के बद्रीनारायण तंवर ने बताया कि कुछ साल पहले तक गायों का बीमा होता था, लेकिन अब नहीं होता। किसान 30 हजार रु. से लेकर 70-80 हजार रुपए में गायें खरीदकर लाते हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनका सिर्फ दूध का ही व्यवसाय है। 15 दिन में सबकुछ चौपट हो गया।

मंदसौर के हर 6वें गांव में लंपी का कहर....
मंदसौर जिला राजस्थान बॉर्डर से लगा हुआ है। जिले के हर 6वें गांव में लंपी का कहर है। हफ्ते भर पहले 2 गांव सिंदपन और धमनार की 2 गायों में लंपी की पुष्टि हुई थी, लेकिन अब विभाग ने 10 पशुओं की मौत की पुष्टि की है। लेकिन, मौत का आंकड़ा इससे ज्यादा है।

पशुपालन विभाग ने भी माना है कि जिले के करीब 150 गांवों में 700 गोवंश में वायरस के लक्षण हैं। मंदसौर शहर में ही 25 गोवंश में लंपी वायरस के लक्षण मिले हैं। इन गोवंशों को कांजी हाउस भेजा गया है। ओम बड़ोदिया ने बताया कि शहर के पशुपालक बीमार गायों को छोड़ रहे हैं। पशुपालन विभाग के उपसंचालक मनीष इंगोले ने बताया कि राजस्थान की सीमा से सटे गांवों में एक लाख वैक्सीन के डोज लगाए जा चुके हैं। एक लाख डोज और मंगवाए गए हैं।

नीमच में 375 संक्रमित, 13 गायों की मौत
नीमच में भी हालात ठीक नहीं हैं। जिले के 147 गांवों में 400 से ज्यादा मवेशी लंपी वायरस से संक्रमित हैं। पशुपालन विभाग ने 13 मौतों की पुष्टि की है, पर असल आंकड़ा ज्यादा है। पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक डॉ. एचवी त्रिवेदी ने बताया कि हम बीमारी से प्रभावित और मृत गोवंश की जानकारी लगातार जुटा रहे हैं। पीड़ित मवेशियों को वैक्सीन भी लगा रहे हैं। वेटनरी विभाग का दावा है कि अब तक 34521 मवेशियों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। सोमवार को वैक्सीन खत्म हो गई। आज मंगलवार को नई खेप मिलने की उम्मीद है।

अब चंबल का भी हाल जान लीजिए...

मुरैना में 800 के आसपास गोवंश बीमार, भिंड में भी 1 गाय की मौत

मुरैना का बड़ोखर एरिया। निर्माणाधीन मकान के किनारे फर्श पर पड़ा सांड...। शरीर में ऐसी कोई जगह नहीं बची, जहां गठानें नहीं उभरीं हाें। सांसें कभी तेज हो रही हैं तो कभी धीमी। आंखों से लगातार पानी बह रहा है, हालत देखकर एहसास हो सकता है कि मवेशी कितने कष्ट में हैं...।

मुरैना जिले की बात करें तो यहां 700 से 800 गोवंश को वायरस ने अपनी चपेट में ले रखा है। शहरभर में ही यह आंकड़ा 100 के पार है। बड़ोखर क्षेत्र में 25 से 30 गाय बीमार मिलीं। इलाज के अभाव में कई मवेशी मर चुके हैं।

भिंड में सबसे पहले अटेर के पाली गांव में पांच गायों में लंपी वायरस के लक्षण नजर आए थे। इसके बाद एक गाय लहार में संक्रमित मिली। पांच बीमार गाय गोहद कस्बे में आवारा घूमती हुई मिलीं। दो दिन पहले मेहगांव अनुविभाग के बरहद गांव में दो गाय संदिग्ध मिली थीं। लहार मिली संक्रमित गाय की मौत हो चुकी है। वायरस से लड़ने के लिए जिले में 10 हजार वैक्सीन पहुंचाई गई हैं।

गुना में धारा 144 लगाना पड़ी, नर्मदापुरम में 4 दिन में ही 25 केस आ गए...

गुना में पगारा में संक्रमित गाय मिली है। एक दिन पहले संक्रमित सांड इलाज के बाद चार घंटे तक शहर में पशुओं के बीच घूमता रहा। बाद में उसे कांजी हाउस स्थित आइसोलेशन वार्ड में पहुंचाया गया। पशु चिकित्सा विभाग का कहना है कि वायरस से पीड़ित पशुओं को खोजने के लिए 15 रैपिड रिस्पॉन्स टीमों का गठन कर दिया है। कलेक्टर फ्रेंक नोबल ए. ने भी लंपी वायरस को लेकर धारा 144 लगा दी है। जिले में पुश और हाट मेलों पर रोक लगा दी गई है।

नर्मदापुरम जिले में 15 सितंबर को लंपी वायरस ने दस्तक दी। 4 दिन में करीब 25 केस सामने आ चुके हैं। सबसे ज्यादा केस सिवनी मालवा ब्लॉक में मिले हैं। यहां चतरखेड़ा गांव में 11, भिलाड़िया में 1 और सिवनी गांव और शहर में 1-1 केस मिला है। पिपरिया ब्लॉक में 8 जानवर और केसला ब्लाक में 2 जानवर वायरस की चपेट में आए हैं। पशु चिकित्सा विभाग इन क्षेत्र में वैक्सीनेशन का काम कर रहा है। इसके लिए 5 हजार वैक्सीन बुलाई गई हैं।​​​​​

इंदौर से संतोष शितोले, मंदसौर से दीपक शर्मा, नीमच से मुकेश गुप्ता, गुना से आशीष रघुवंशी, मुरैना से रतन मिश्रा, भिंड से पवन दीक्षित, नर्मदापुरम से धर्मेंद्र दीवान की ग्राउंड रिपोर्ट।

गुजरात से लेकर जम्मू कश्मीर तक फैला रोग
अकेले राजस्थान ही नहीं यह बीमारी गुजरात, पंजाब, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों में फैल चुकी है। इस साल सबसे पहला केस गुजरात से सामने आया था। इसके बाद इसकी एंट्री राजस्थान समेत अन्य राज्यों में हुई। हरियाणा में भी हालात ऐसे ही है। यहां के 3 हजार गांवों में लंपी फैल चुका है।