न्यू एजुकेशन पॉलिसी:बीए, बीकॉम, बीएससी के 50 वोकेशनल विषयों का सिलेबस तैयार

इंदौर2 महीने पहलेलेखक: दिनेश जोशी
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न्यू एजुकेशन पॉलिसी में इस तरह के विषय आज के समय की जरूरत के हिसाब से तैयार किए गए हैं। - Dainik Bhaskar
न्यू एजुकेशन पॉलिसी में इस तरह के विषय आज के समय की जरूरत के हिसाब से तैयार किए गए हैं।
  • बीए में 25, बीकॉम में 5 और बीएससी में 20 वोकेशनल विषयों के विकल्प, 20 नवंबर तक किताबें भी आ जाएंगी

आखिरकार तीनों परंपरागत कोर्स बीकॉम, बीए व बीएससी के अनिवार्य सभी 50 वोकेशनल विषयों का सिलेबस तैयार हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसे जारी भी कर दिया है। अब 10 से 20 नवंबर के बीच किताबें भी छपकर आ जाएंगी। न्यू एजुकेशन पॉलिसी लागू होने के बाद से ही इन विषयों का सिलेबस नहीं आने पर सवाल उठ रहे थे।

यही नहीं, उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू भी कर चुका है। ऐसे में अगर सिलेबस जारी नहीं होता तो पढ़ाई प्रभावित होती। नई एजुकेशन पॉलिसी में बीकॉम, बीए व बीएससी प्रथम वर्ष के छात्रों को वोकेशनल कोर्स का कम से कम एक विषय चुनना अनिवार्य है। बीए में 25, बीकॉम में 5 एवं बीएससी में 20 वोकेशनल विषयों के विकल्प हैं।

ये हैं कुछ प्रमुख वोकेशनल विषय

  • नर्सरी प्रबंधन
  • एमएस ऑफिस
  • टेली
  • रामचरित मानस का दार्शनिक चिंतन
  • लोक प्रशासन: सिद्धांत एवं व्यवहार
  • हाउस कीपिंग एंड हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट
  • धन एवं बैंकिंग
  • अकाउंटिंग
  • कम्युनिकेटिव अंग्रेजी
  • भारतीय अर्थव्यवस्था एक परिचय
  • भारतीय राजनीतिक व्यवस्था
  • खनिज और चट्टानें
  • मधुमक्खी पालन
  • कम्प्यूटर फंडामेंटल
  • मानव रोग
  • गैर पारंपरिक ऊर्जा संसाधन

स्किल से जुड़े हैं विषय-

ये सारे विषय किसी न किसी स्किल से जुड़े हैं। न्यू एजुकेशन पॉलिसी में इस तरह के विषय आज के समय की जरूरत के हिसाब से तैयार किए गए हैं। ये सभी जॉब ओरिएंटेड प्रैक्टिकल विषय हैं। नई एजुकेशन पॉलिसी को कॉलेजों में समझाने का जिम्मा देख रहे डॉ. एमडी सोमानी का कहना है कि अब कॉलेजों को शासन की मंशा के अनुरूप पढ़ाई शुरू करा देना चाहिए, जिसे भी कोई असमंजस है, वहां हमारी टीम पहुंचकर तकनीकी बिंदु समझाएगी।

ये है चुनने का विकल्प

हर छात्र को एक इलेक्टिव, एक वोकेशनल विषय चुनना है, जबकि एक विषय आधार पाठ्यक्रम का होगा, जबकि दो मेजर एवं एक विषय माइनर भी चुनना अनिवार्य है। आधार पाठ्यक्रम में हिंदी, अंग्रेजी भाषा के साथ पर्यावरण भी शामिल है। ये तीनों ही अनिवार्य हैं। इसी में एक विषय और है।

चार साल का कोर्स

छात्र ग्रेजुएशन में चार साल का कोर्स पढ़ेंगे, उन्हें पीजी यानी पोस्ट ग्रेजुएशन एक साल का ही करना होगा। यूजी के तीसरे वर्ष का स्कोर 7.5 होने पर ही चौथे वर्ष में प्रवेश मिलेगा। इन छात्रों को चौथे वर्ष में रिसर्च मैथडलॉजी पढ़ना होगी। डिग्री भी इन्हें ऑनर्स (एवं रिसर्च) नाम से मिलेगी। नई एजुकेशन पॉलिसी में यूजी कोर्स में पहले साल में पढ़ाई छोड़ने पर सर्टिफिकेट मिलेगा। दूसरे साल के बाद एडवांस सर्टिफिकेट या डिप्लोमा मिलेगा। वहीं तीसरे साल के बाद डिग्री मिलेगी।

पोस्ट ग्रेजुएट में तीन विकल्प

  • पीजी में पहला दो साल का मास्टर्स होगा। यह उनके लिए होगा, जिन्होंने तीन साल का डिग्री कोर्स किया है।
  • दूसरा विकल्प चार साल के डिग्री कोर्स यानी ऑनर्स- रिसर्च के छात्रों के लिए होगा। ये छात्र एक साल का मास्टर्स अलग से कर सकेंगे,
  • जबकि तीसरा विकल्प 5 साल का इंटीग्रेटेड प्रोग्राम वालों के लिए होगा।

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