इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट की कछुआ चाल:3% काम के लिए 229 करोड़ रुपए के टेंडर, 5.29 किमी में सिर्फ पतरे लगे

इंदौर10 महीने पहलेलेखक: दीपेश शर्मा
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अब दो साल में 17 किमी मेट्रो चलाने का दावा। - Dainik Bhaskar
अब दो साल में 17 किमी मेट्रो चलाने का दावा।

इंदौर मेट्रो के भूमिपूजन को 14 सितंबर को दो साल हो रहे हैं। 31.55 किमी रूट को 2023 में पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन दो सालों में 5.29 किमी रूट पर सिर्फ पतरे लग पाए हैं। इस अवधि में न तो कंसल्टेंट और कॉन्ट्रेक्टर के बीच का विवाद सुलझा और न ही प्रोजेक्ट को गति देने के लिए यहां अफसरों की नियुक्त हो पाई। भोपाल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को ही यहां का प्रभार सौंप दिया गया था। नतीजा यह हुआ कि 64 पिलर में से 6 की पाइलिंग में भी गड़बड़ी हो गई है। अब आईआईटी मुंबई को डिजाइन इंजीनियरिंग का काम सौंपने की तैयारी है।

विवाद का खामियाजा- 6 पिलर की पाइलिंग में गड़बड़ी, अब इसका जिम्मा IIT मुंबई को

इंदौर मेट्रो को लेकर कॉन्ट्रेक्टर दिलीप बिल्डकॉन और जनरल कंसल्टेंट में विवाद का नतीजा यह हुआ कि 5.29 किमी के 181 पिलर में जब 64 की जांच हुई तो पता चला 6 पिलर की पाइलिंग गड़बड़ है। जनरल कंसल्टेंट का कहना है, इनकी गहराई कम है। कॉन्ट्रेक्टर का कहना है कि चट्टान आने से और खुदाई संभव नहीं है। जांच आईआईटी मुंबई से कराई जा रही है।

इंदौर मेट्रो के बेपटरी होने के तीन प्रमुख कारण

1.प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक नहीं मिला इंदौर को

भोपाल मेट्रो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर साइमन फ्यूरी के पास ही इंदौर का प्रभार है। वे लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर समय विदेश में रहे। पूरा फोकस भोपाल पर ही रहा, क्योंकि सरकार उन्हें 24 लाख रुपए माह तनख्वाह देती रही। इंदौर उनकी प्राथमिकता में कभी था ही नहीं। प्रोजेक्ट फेल होने के बाद भी इंदौर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर की तलाश जारी है।

2.जिन अफसरों के कारण हुए विवाद, उन्हें हटाया

इंदौर की अतिरिक्त जिम्मेदारी डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस बालाकृष्णा, जियोलॉजिस्ट श्रीनिवास मल्लेमारी व विनोद भागवत की थी। अहमदाबाद मेट्रो से भी बालाकृष्णा व भागवत को प्रोजेक्ट अटकाने के आरोप में हटाया गया था। इस खुलासे के बाद भागवत को हटाया गया। मल्लेमारी की गड़बड़ी पकड़े जाने पर चलती मीटिंग से बाहर कर दिया गया।

3.डिजाइन वेरिफिकेशन इंजीनियर था ही नहीं

इंदौर मेट्रो के लिए डिजाइन वेरिफिकेशन इंजीनियर था ही नहीं। यहां की सारी डिजाइन कॉन्ट्रेक्टर अपने ही डिजाइन वेरिफिकेशन इंजीनियर से वेरीफाई करवा रहा था। इसी बात को लेकर जनरल कंसल्टेंट ने विवाद खड़ा किया। जबकि प्रोजेक्ट के लिए डिजाइन वेरिफिकेशन इंजीनियर एमपीएमआरसीएल को रखना था।

सरकार ने जो जिम्मेदारी दी थी, वही किया। अब विवाद खत्म हैं। दिसंबर 2023 तक 17 किमी गांधी नगर से मुमताज बाग रूट पर मेट्रो दौड़ेगी।
मनीष सिंह, पूर्व एमडी

कॉन्ट्रेक्ट की ही शर्तों का पालन करवाने पर सारे विवाद खत्म हो गए हैं। इससे ज्यादा कहने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूं।

अखिलेश अग्रवाल, टेक्निकल डायरेक्टर

विवादों के कारण काम पिछड़ गया है। अब नई टीम बना दी है। हर सप्ताह रिव्यू कर प्रायरिटी कॉरिडोर हर हाल में 2023 तक बनाएंगे।
छवि भारद्वाज, एमडी

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