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जांच को भी डेंगू:5 से 12 लाख में आती है एलाइजा पद्धति से टेस्ट की मशीन, एक भी सरकारी अस्पताल में नहीं, रैपिड टेस्ट कर रहे उसे खुद ही मान्यता नहीं देते

इंदौर15 दिन पहलेलेखक: नीता सिसौदिया
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30 सरकारी अस्पताल, 80 से ज्यादा टेक्नीशियन, फिर भी सुविधा से वंचित। - Dainik Bhaskar
30 सरकारी अस्पताल, 80 से ज्यादा टेक्नीशियन, फिर भी सुविधा से वंचित।

शहर में डेंगू के मरीजों का आधिकारिक आंकड़ा 500 पार कर चुका है। जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब भी निजी लैब या मेडिकल कॉलेज के भरोसे है। शहर में ही 30 से ज्यादा सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन एक में भी एलाइजा पद्धति से डेंगू की जांच की सुविधा नहीं है। यह हालत तब है जब 80 से ज्यादा टेक्नीशियनों की फौज विभाग के पास है।

शहर के सरकारी अस्पतालों में 10 से ज्यादा में लैब हैं। एलाइजा पद्धति से जांच के लिए उपकरण 5 से 12 लाख रुपए में ही आ जाते हैं। दूसरी ओर हर साल विभाग करोड़ों रुपए डेंगू से बचाव, उपचार आदि से संंबंधित प्रचार-प्रसार, टीम के वेतन आदि पर खर्च कर रहा है।

हद यह है कि स्वास्थ्य विभाग सिर्फ एक अस्पताल में डेंगू की जांच कर रहा था और उसमें भी सिर्फ रैपिड जांच हो रही थी। इसे विभाग खुद ही मान्यता नहीं देता है। एमजीएम कॉलेज डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि एलाइजा टेस्ट में बहुत अधिक खर्च नहीं आता है।

इस मौसम में अभी तक डेंगू के मरीजों का अधिकारिक आंकड़ा 500 पार हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग रैपिड जांच को नहीं मानता है, यह एलाइजा जांच के पॉजीटिव मरीजों की संख्या है। लेकिन हैरानी यह है कि जिस रैपिड जांच को विभाग नकार रहा है, खुद के अस्पताल में भी सिर्फ वहीं जांच होती है।

40 लाख की आबादी वाले मप्र के सबसे बड़े शहर इंदौर में कहने तो करीब 40 सरकारी अस्पताल है लेकिन इनमें से एक भी एलाइजा जांच नहीं होती है। स्वास्थ विभाग रैपिड जांच में पॉजिटिव आने वाले डेंगू के मरीजों रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करता है। पीसी सेठी अस्पताल में रैपिड जांच से ही डेंगू का पता लगाया जा रहा है। रैपिड जांच के भरोसे ही लेबोरेटरी चलाई जा रही है। डेंगू की जांच के नाम पर स्वास्थ विभाग सिर्फ रैपिड जांच की जा रही है।

अभी तो रैपिड जांच भी बंद

पीसी सेठी अस्पताल में डेंगू की रैपिड जांच हो रही थी, जो बीते 15-20 दिन से बंद है। यह स्वास्थ्य विभाग का एकमात्र अस्पताल है जहां जांच होती है, लेकिन यहां भी किट नहीं है।

स्वास्थ्य विभाग की 10 से ज्यादा लैब में कोई पैथोलॉजिस्ट भी नहीं

नर्सिंग होम एक्ट के तहत शहर में 300 से ज्यादा लैब व डायग्नोस्टिक सेंटर पंजीबद्ध है। स्वास्थ्य विभाग लैब का पंजीयन तभी करता है, जब उसके पास कोई पैथोलॉजिस्ट हो। स्वास्थ्य विभाग के अधीन जिले में 10 से ज्यादा लैब हैं। जिला अस्पताल, पीसी सेठी, हुकमचंद पॉलीक्लिनिक, मांगीलाल चुरिया, नंदा नगर प्रसूति गृह, बाणगंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहित ब्लॉक स्तर पर लैब चल रही हैं, लेकिन किसी में पैथोलॉजिस्ट नहीं है। पैथोलॉजिस्ट के जिले में मात्र तीन पद मंजूर हैं। इनमें से एक पर विशेषज्ञ पदस्थ हैं दो खाली हैं।

सीधी बात- दौलत पटेल जिला मलेरिया, अधिकारी

कभी-कभी दिक्कत आती है, लेकिन जांच हो रही है

  • स्वास्थ्य विभाग के पास कितने लैब है जहां डेंगू की जांच की जा रही है?

- पीसी सेठी अस्पताल में जांच होती है।

  • वहां तो 15 दिन से किट ही खत्म हो गई?

- कभी-कभी दिक्कत आती है, जांच हो रही है।

  • हकीकत में वहां भी अब जांच बंद है?

- इसकी जानकारी नहीं, पता लगाते हैं।

  • एलाइजा जांच नहीं की जा रही?

- हम एमजीएम मेडिकल कॅालेज भेज देते हैं।

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