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  • That Is Why The Bhanwarkuan Police Station Is Not Shifting, Farming Is Being Done On This Land In Bada Bangarda, The Administration Has Opened The Case Again.

41 साल से डिक्री में फंसी 40 एकड़ जमीन:इसीलिए भंवरकुआं थाना नहीं हो रहा शिफ्ट, बड़ा बांगड़दा में इस जमीन पर हो रही खेती, प्रशासन ने फिर खुलवाया केस

इंदौर11 दिन पहले
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भंवरकुआं चौराहे के चौड़ीकरण नहीं होने के पीछे यूनिवर्सिटी को बड़ा बांगड़दा में प्रस्तावित करीब 40 एकड़ जमीन के आवंटन में आई समस्या बड़ा कारण बनी है। भंवरकुआं चौराहे पर चौड़ीकरण के लिए थाने को हटाकर यूनिवर्सिटी की जमीन पर विस्थापित करना था, वहीं इसके बदले में यूनिवर्सिटी की सालों पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए दी जाने वाली जमीन की मांग को पूरा करना था।

जब बड़ा बांगड़दा में जमीन बताई गई तो वहां पता चला कि मौके पर केवल 15 एकड़ के करीब ही जमीन क्लियर है, वहीं 20 एकड़ से ज्यादा जमीन पर कुछ किसानों का कब्जा है और वह खेती कर रहे हैं। जमीन साफ नहीं होने पर यूनिवर्सिटी भी थाने को जमीन देने के वादे से पीछे हट गई और चौराहे का चौड़ीकरण फिर अटक गया। आज इस जमीन की बाजार कीमत 50 करोड़ से ज्यादा है। प्रशासन कोर्ट भी गया था 10 साल पहले प्रशासन कोर्ट भी गया था, लेकिन इसके बाद मामला ठंडा पड़ गया। अब कलेक्टर मनीष सिंह ने इस मामले में एसडीएम पराग जैन और तहसीलदार मनीष श्रीवास्तव को जमीन वापस लेने के निर्देश दिए हैं।

राजस्व में किसानों के नाम दर्ज नहीं हुई, 12 साल के भीतर डिक्री से नामांतरण नहीं कराया तो यह शून्य हो जाती है

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यहां खेती करने वाले किसानों ने 1980 से 1985 के बीच कोर्ट से डिक्री ले ली, लेकिन यह राजस्व रिकॉर्ड में कभी भी इन किसानों के नाम दर्ज नहीं हुई यानी यह शासकीय ही है। अधिवक्ता अशोक एरन ने बताया कि डिक्री या जयपत्र कोर्ट द्वारा किसी जमीन के भूमिस्वामी और आधिपत्य को लेकर की जाती है।

इसमें कोर्ट से सर्टिफिकेट जारी होता है कि इस जमीन पर इनका स्वामित्व है। इस डिक्री को सक्षम न्यायालय से या प्रशासन से 12 साल के भीतर क्रियान्वित कराना होता है, यानी राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण कराना होता है। ऐसा नहीं होने पर यह शून्य हो जाती है।

होलकर काल में मिली थी किसानों को जमीन

साल 1940 में होलकर राज्य ने टीबी सेनोटोरियम बनाने के लिए यहां के किसानों से जमीन लेकर उन्हें छोटा बांगड़दा में जमीन दी थी। बाद में यह सेनोटोरियम अन्य जगह बन गया, ऐसे में यहां के भूस्वामी फिर लौट आए और उन्होंने बाद में यहां कोर्ट में जाकर डिक्री करा ली।

शासकीय भूमि से अवैध निर्माण व कब्जे हटाएं

सभी विभागों की हुई साप्ताहिक बैठक में कलेक्टर मनीष सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शासकीय भूमि पर किसी भी तरह के अवैध निर्माण और अतिक्रमण नहीं होने दें। जहां भी शासकीय अथवा नजूल भूमि पर अतिक्रमण व अवैध निर्माण है, उन्हें तुरंत हटाया जाए।

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