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वेंटिलेटर न मिलने से गर्भवती की मौत:पेट में था 8 महीने का बच्चा, इंदौर के हर बड़े नेता को फोन लगाया; सोनू सूद भी मदद नहीं कर पाए

इंदौर2 वर्ष पहले
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महिला का ऑक्सीजन लेवल 40 तक पहुंच गया था। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के लिए फौरन वेंटिलेटर वाले बेड की व्यवस्था करने के  लिए कहा था। - Dainik Bhaskar
महिला का ऑक्सीजन लेवल 40 तक पहुंच गया था। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के लिए फौरन वेंटिलेटर वाले बेड की व्यवस्था करने के लिए कहा था।

इंदौर में समय पर वेंटिलेटर न मिलने के कारण शुक्रवार देर रात एक प्रेग्नेंट महिला की मौत हो गई। महिला की जान बचाने के लिए बड़े-बड़े नेताओं को फोन किए गए। यहां तक कि मुंबई में एक्टर सोनू सूद को भी फोन किया गया, लेकिन कोई भी मदद नहीं कर सका। महिला के गर्भ में 8 महीने का बच्चा था।

करणी सेना के जिलाध्यक्ष (इंदौर) अनुराग राघव ने बताया कि शुक्रवार रात उनके परिचित का फोन आया। उनकी पत्नी की हालत गंभीर थी। बेड नहीं मिलने से वे परेशान हो रहे थे। मैंने अपने स्तर पर बेड पता किया। कहीं भी ICU बेड नहीं मिला। इसके बाद ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ उसमें लगने वाले उपकरणों की व्यवस्था की गई। दो-तीन घंटे बाद उन्हें नेहरू नगर के एक निजी अस्पताल में बेड मिला।

शुक्रवार रात करीब 10 बजे उनका कॉल आया। उन्होंने बताया कि हालत बहुत खराब है, डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के लिए कहा है। उनका ऑक्सीजन लेवल घटकर 40 पहुंच गया था। उन्होंने बताया कि डॉक्टर ने कहा है कि वेंटिलेटर की व्यवस्था करनी होगी। हमने शहर के हर बड़े नेता अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी से भी संपर्क नहीं हो पाया। रात करीब साढ़े 12-1 बजे के बीच मुंबई में एक्टर साेनू सूद को कॉल किया और उनसे मदद की गुहार लगाई। सूद ने भी मैसेज के जरिए वेंटिलेटर की व्यवस्था करने की अपील की, लेकिन रात करीब साढ़े 3 बजे पहले गर्भ में पल रहे बच्चे की पल्स आना बंद हुई, इसके कुछ देर बाद उसकी मां ने भी दम तोड़ दिया। महिला की एक पांच साल की बेटी भी है। उनके पति प्राइवेट जॉब करते हैं।

राघव ने सोनू सूद से भी रात में मदद मांगी थी।
राघव ने सोनू सूद से भी रात में मदद मांगी थी।

निजी अस्पताल में काम करने वाली आया ने भी दम तोड़ा
शुक्रवार को भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। निजी अस्पताल में काम करने वाली आया (बाई) आशा ने भी बिना इलाज के दम तोड़ दिया। 18 साल का बेटा मां को लिए इधर-उधर भटकता रहा, लेकिन उन्हें कहीं बेड नहीं मिला। बेड दिलाने के लिए स्कूल की एक शिक्षिका ने प्रशासनिक अधिकारी को फोन लगाया, लेकिन बेड का नाम सुनते ही अफसर ने फोन रख दिया। आखिरकार बेटा मां को घर ले आया। वहां उनकी मौत हो गई।

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