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20 दिन पहले तेंदुए का शिकार:आरोपियों को देवास के करीबी गांव लेकर पहुंची इंदौर पुलिस, अवशेष बरामद; हिरण भी मार चुका है सरगना

इंदौर6 महीने पहले
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आरोपियों को ले जाया गया देवास। - Dainik Bhaskar
आरोपियों को ले जाया गया देवास।

शनिवार को इंदौर क्राइम ब्रांच ने पांच आरोपियों को तेंदुए की खाल और नाखून बेचते हुए गिरफ्तार किया था। सोमवार दोपहर खुडैल पुलिस पांचों आरोपियों को देवास के समीप उदयपुरा गांव लेकर पहुंची। यहां से मृत तेंदुए के अवशेष बरामद किए गए। आरोपियों ने तेंदुए को शिकार करने के बाद जंगल में एक जगह धारदार हथियारों से उसे काटा और फिर उसकी खाल जंगल में ही निकाली। शिकार करते समय पांचों आरोपियों ने पहले एक जानवर को मारकर जाल बिछाया था, जिसे तेंदुआ खाने आया और उसे बंदूक से मारकर उसकी खाल और नाखून जंगल में ही निकाल ली थी। आरोपियों ने बताया कि 20 दिन पहले उन्होंने शिकार किया था।

जाल बिछाने के लिए पाड़ा लेकर आए थे

सोमवार दोपहर जब उदयपुर के जंगलों में पुलिस द्वारा पांचों आरोपियों को ले जाया गया तो कई घंटों की मेहनत के बाद आरोपियों ने पुलिस को वह जगह बताई, जहां पर उन्होंने तेंदुए का शिकार किया था। आरोपी जंगल में 20 दिन पहले गए थे और उन्हें यह जानकारी लग गई थी कि इलाके में तेंदुआ घूम रहा है। उन्होंने पास के गांव से एक जानवर को खरीदा और फिर उसे चारा बनाकर जाल बनाया था। जैसे ही तेंदुआ उसे खाने आया, आरोपी चंपालाल कनौजिया ने बंदूक से गोली मारकर तेंदुए को मार डाला।

तेंदुए के अवशेष हुए बरामद
तेंदुए के अवशेष हुए बरामद

भरमार बंदूक, वो भी अवैध

आरोपी चंपालाल कनौजिया इस पूरे गिरोह का सरगना है। इससे पहले वह हिरण का शिकार कर चुका है। चंपालाल ने भरमार बंदूक अवैध तरीके से खरीदी थी। वर्तमान समय में भरमार बंदूक कम ही लोग इस्तेमाल करते हैं। इस कारण से चंपालाल ने जिस जगह से यह बंदूक खरीदी, पुलिस अब उस व्यक्ति की भी तलाश कर रही है। पहले भी शिकार करने के लिए चंपालाल ने इस बंदूक का इस्तेमाल किया था। चंपालाल के साथ पकड़ाए शाहरुख, अहमद, यासीन और सलीम से भी पुलिस पूछताछ कर रही है कि उन्होंने इससे पहले हिरण मार कर किसी व्यक्ति को बेचा था और इससे पहले वह अन्य कितने शिकार कर चुके हैं।

शिकार कर गाड़ दिए थे
शिकार कर गाड़ दिए थे

पहले काट चूका है 3 साल की सजा

चंपालाल कनौजिया पहले भी हिरण के शिकार में गिरफ्तार हो चुका है। देवास जेल में 3 साल की सजा काट चुका है। इसके बावजूद भी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह लगातार जंगल में जाकर जंगली जानवरों का शिकार करता है। आरोपी से पूछताछ में और भी अहम खुलासे होने की उम्मीद है

वनकर्मियों पर सवालिया निशान

पूरे मामले में जब पुलिस अधिकारियों से बात की गई तो उनका कहना था कि यदि जंगल के अंदर कोई व्यक्ति इतने बड़े हथियार लेकर जाता है तो क्या वनकर्मियों को इस बात की सूचना नहीं थी। भरमार बंदूक जिसका शिकारी उपयोग कर रहे थे, उसकी आवाज भी कई दूर तक जाती है। शिकार करते समय बंदूक की आवाज ना आना, यह भी आश्चर्य वाली बात है। वहीं आरोपियों ने जंगल में ही तेंदुए को मारा और उसके खून के निशान भी कई जगह दिखाई दे रहे थे, जिससे कि फॉरेस्ट की टीम जो रात दिन जंगल का मुआयना करती है उन्हें यह खून कैसे नहीं दिखाई दिया

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