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चोरल के जंगल में ऑर्डर पर तस्करी:तस्कर की काॅल रिकॉर्डिंग आई सामने, बोला- गाड़ी भरकर लकड़ी रखी है, कितने पैसे दोगे?

इंदौरएक महीने पहले
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तुम्हारे यहां धरपकड़ चल रही है? हां, चल तो रही, लेकिन मैं तो जुगाड़ से छूट जाता हूं - Dainik Bhaskar
तुम्हारे यहां धरपकड़ चल रही है? हां, चल तो रही, लेकिन मैं तो जुगाड़ से छूट जाता हूं

इंदौर वन मंडल की सबसे संवेदनशील चोरल रेंज में तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम लकड़ी खरीदने वालों को मोबाइल लगाकर डिमांड पूछ रहे हैं। चोरल में वन क्षेत्र कितना खतरे में है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि चार दिन पहले करीब 8 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। आठ साल से जमीन पर कब्जा था।

चोरल रेंज का स्टाफ यहां चौकी भी नहीं बना पा रहा था। यहां जंगल काटकर खेत में तब्दील करने का काम खूब हुआ। पिछले दिनों विभाग ने अंतर सिंह नाम के व्यक्ति को पकड़ा था। उसकी पिटाई भी की थी। उसकी रिकॉर्डिंग अब सामने आई है।

डीएफओ नरेंद्र पंडवा का कहना है कि चोरल में अतिक्रमण करने वाले, पेड़ काटने वालों पर सख्ती की जा रही है, जो रिकॉर्डिंग सामने आई है, उसके आधार पर धरपकड़ की जाएगी। इन्हें जिलाबदर कराने के भी प्रयास किए जाएंगे।

तुम्हारे यहां धरपकड़ चल रही है? हां, चल तो रही, लेकिन मैं तो जुगाड़ से छूट जाता हूं

पहली रिकॉर्डिंग

अंतर सिंह - मनोहर भाई बोल रहा है क्या मनोहर - हां, मैं बोल रहा हूं, मेरा नंबर तुमको कहां से मिल गया?

अंतर सिंह - नंबर तो मेरे पास था पहले से, माल की जरूरत है कि नहीं? मनोहर- तुम्हारे यहां तो पकड़ा-धकड़ी चल रही है, तुमको भी तो पकड़ा था

अंतर सिंह - हां, धरपकड़ चल तो रही है, पर मैं तो छूट जाता हूं, जुगाड़ से मनोहर- चलो फिर मिलकर बात करते हैं अंतर सिंह - हां

दूसरी रिकॉर्डिंग

अंतर सिंह- हां, कौन बोल रहा है प्रकाश- हां, मैं प्रकाश बोल रहा हूं

अंतर सिंह - हां तो माल की जरूरत है क्या तुमको ? प्रकाश- लकड़ी को नदी के पार कहां उतार रहे हैं ये नाववाले।

अंतर सिंह - हां, तो मैं एक-दो दिन में आता हूं प्रकाश - अरे माल तो नाव वाले उतार ही नहीं रहे हैं, माल तुम्हारे पास कितना है

अंतर सिंह - एक गाड़ी भरकर तो रखा है, प्रकाश - कितने दिन में ले आओगे, तो मैं दूसरी नाव की व्यवस्था करूं

अंतर सिंह - एक दो दिन में ले आऊंगा माल, पैसे कितने दोगे? प्रकाश - तुम माल पटक जाओ, माल का हिसाब तो अपन कर लेंगे, रात में माल पटक जाना, फिर उसको ठिकाने भी लगाना है।

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