गरबे की धूम:गरबों के गीत हवा के झोंकों में दूर तक सुनाई दे रहे, डांडियों की खनक मद्दम

इंदौर17 दिन पहलेलेखक: राहुल दुबे
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पंढरीनाथ का गरबा स्थल। दो साल पहले यहां पैर रखने की जगह नहीं रहती थी। - Dainik Bhaskar
पंढरीनाथ का गरबा स्थल। दो साल पहले यहां पैर रखने की जगह नहीं रहती थी।
  • 400 गरबा आयोजन, 2000 से ज्यादा स्थानों पर माता की प्रतिमाएं विराजित

मोती तबेला की ओर से यशंवत रोड या मोती तबेला की ओर से... आप जैसे ही पंढरीनाथ मंदिर की तरफ शाम के वक्त आगे बढ़ेंगे तो गरबों के गीत कानों में नवरात्र का उत्साह पैदा करते हैं। लाउड स्पीकर पर बज रहे गीत सुनकर एक बारगी तो लगता है कि पंढरीनाथ मंदिर के पीछे आठ फीट ऊंचा मंच लगा होगा और लाल, पीले कपड़े में युवक-युवतियां गरबे कर रहे होंगे।

मंदिर के पीछे लाइटिंग भी है, माता भी विराजी हैं। धूप के धुएं में मां की मूरत देखते ही बन रही है, लेकिन बस कमी है तो गरबों की... पंढरीनाथ से गुजर रहा हर व्यक्ति एक बार तो गाड़ी को धीमी कर नजारा देख रहा, पैदल चलने वाला मां को प्रमाण भी कर रहा है। कोई परिवार साथ में निकला है तो 2019 में हुए गरबों की याद ताजा करके मुस्करा देता है।

आयोजक जिनका चेहरा पसीने से लाल, बात करने की फुर्सत तक नहीं रहती थी, वह आज कुर्सी डाले मोबाइल में मैसेज, वीडियो देखने में व्यस्त दिखे...। पंढरीनाथ ही नहीं शहर के उन सभी प्रमुख स्थानों, जहां माता बैठाते हैं, गरबे होते हैं, वहां क्या हाल है, पढ़िए रिपोर्ट-

800 से ज्यादा संगठन शहर में करवाते हैं आयोजन

  • 40 से ज्यादा माता मंदिर हैं शहर में
  • 150 से ज्यादा मंडल जनसहयोग वाले
  • 100 टाउनशिप में भी होते हैं गरबा

माता विराजीं, लाइटिंग भी की

महू नाका चौराहा के समीप बालदा कॉलोनी में भी माता इस साल स्थापित की हैं। गरबे के दिनों जैसा माहौल बनाने लाइटिंग भी की है, लेकिन कमी है तो गरबा करने वालों की। इस बार माता का पंडाल तरण पुष्कर की दीवार से सटकर बनाया तो है, लेकिन रात नौ बजे केवल आरती के लिए ही मोहल्ले के लोग जुटे हैं। शाम 7 बजे से ही माता के भजन, गरबे के गीत फुल साउंड में बज रहे हैं।

माता के दर्शन करते निकल जाइए

नंदलालपुरा के गरबे भी चर्चित हैं। रात 9 बजे से ही कृष्णपुरा से जवाहर मार्ग जाने वाले मंडी के रोड को बंद कर िदया जाता था, लेकिन इस बार माता विराजी हैं, गीत बज रहे, आरती भी हो रही, गरबे के लिए आयोजकों ने किसी कन्या को नहीं कहा। कार, दो पहिया वाहन से लोग दर्शन करते हुए निकल रहे हैं। माता को देखने के बाद बीते सालों में हुए गरबों की याद ताजा कर लेते हैं।

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