क्रिमिनल का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट:ड्रग्स तस्करी में 12 साल की सजा हुई तो वड़ोदरा में बनाई मौत की कहानी

इंदौर2 महीने पहले

इंदौर एनसीबी द्वारा गुजरात पुलिस की सूचना पर ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है। कुछ समय पहले आरोपी का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट जेल प्रबंधन को दिया गया था। जेल प्रबंधन ने उसे सही मान लिया था। कुछ दिनों पहले गुजरात पुलिस ने एनसीबी इंदौर से संपर्क कर आरोपी के जीवित होने की सूचना दी। इसके बाद गुजरात पुलिस की निशानदेही पर एनसीबी आरोपी को पकड़कर इंदौर लेकर आई।

एनसीबी के जोनल अधिकारी ब्रजेंद्र चौधरी ने बताया कि वर्ष 2011 में देवास नाके के समीप 830 ग्राम मादक पदार्थ के साथ सात लोगों को गिरफ्तार किया था। उस समय पकड़ी गई ड्रग्स की कीमत 80 लाख के करीब आंकी गई थी। विभाग द्वारा पहले उसे हेरोइन माना गया था। लेकिन जब उसे लैब में टेस्ट कराया गया, तो वह Dextropropoxyphene नामक ड्रग्स निकला। इस मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों को 2019 में 12 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। बाकी तीन आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। इस मामले में आरोपी अभिषेक जैन निवासी अलीराजपुर को को 12 साल की सजा हुई थी।

कोविड का फायदा उठाकर ले ली थी पैरोल

एनसीबी द्वारा बताया गया कि जून 2020 में कोविड-19 में कई कैदियों को पैरोल पर छोड़ा जा रहा था। उसमें अभिषेक जैन के परिवार द्वारा भी पैरोल ले ली गई। अभिषेक जेल से बाहर आने के बाद सीधे गुजरात के वडोदरा गया। वहां पर उसने फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवाया और अपने परिवार को भेज दिया। परिवार द्वारा वह मृत्यु प्रमाण पत्र सीधे जेल प्रबंधन को दिया गया। जिसकी बिना जांच करे जेल प्रबंधन ने उसे मृत मान लिया। इसके बाद अभिषेक आराम से गुजरात में घूमता रहा।

बीकॉम करके कर रहा था फाइनेंस का काम

आरोपी अभिषेक जैन जब वर्ष 2011 में ड्रग्स तस्करी में पकड़ा गया, उस समय उसकी उम्र 25 वर्ष थी। उस समय अभिषेक बीकॉम की पढ़ाई कर रहा था और लोन कराने के लिए किसी निजी कंपनी में काम करता था। लेकिन रुपयों की जरूरत के कारण वह इस ड्रग्स के धंधे में पड़ गया वर्तमान समय में आरोपी अभिषेक की उम्र 36 वर्ष है।

जेल प्रबंधन से भी की जाएगी चर्चा

​​​​​​​ जोनल अधिकारी चौधरी का कहना था कि फर्जी सर्टिफिकेट दिखाकर आरोपी द्वारा खुद को मृत साबित करने के मामले में जेल प्रबंधन को भी पत्र लिखकर जानकारी मांगेंगे। वही गुजरात के वड़ोदरा में जहां नकली सर्टिफिकेट बनवाया गया, उसकी भी एनसीबी द्वारा जांच कर गुजरात पुलिस को सौंपी जाएगी।