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  • The Youth Spent Six And A Half Years In Jail On Suspicion Of Possessing Heroin, Destitute Wife And Child Wandered From Door To Door, Now Acquitted From Court

झूठे आरोप की सजा:हेरोइन रखने के शक में युवक ने साढ़े छह साल जेल में बिताए, बेसहारा पत्नी-बच्चा दर-दर भटके, अब जाकर कोर्ट से बरी

इंदौर20 दिन पहले
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गुलशेर - Dainik Bhaskar
गुलशेर
  • आरोप साबित नहीं कर पाई एनसीबी- जिस पुलिस चौकी का केस में जिक्र, उसके स्टाफ का बयान ही नहीं कराया

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के फर्जी केस की वजह से एक युवक को साढ़े छह साल जेल में रहना पड़ा। एनसीबी ने 400 ग्राम हेरोइन की मात्रा मिलना बताकर उसे गिरफ्तार किया था। ज्यादा मात्रा में हेरोइन मिलने के कारण उसे जमानत भी नहीं मिली। मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने केस को गलत मानते हुए युवक को बरी कर दिया। दरअसल, एनसीबी ने जो केस बनाया, उसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं दे पाया।

अधिवक्ता हिमांशु ठाकुर के मुताबिक, एनसीबी ने गुलशेर नाम के युवक को खजराना चौराहा पुलिस चौकी के पास से गिरफ्तार करना बताया। एफआईआर में उल्लेख किया कि युवक चौकी के पास टैक्सी से आया था। उसके पास 400 ग्राम हेरोइन थी। एनसीबी ने चालान पेश किया। इसके बाद ट्रायल शुरू हुआ। गुलशेर की ओर से जवाब दिया गया कि एनसीबी का पूरा केस ही झूठा है। गुलशेर घटना के वक्त वहां था ही नहीं।

इन आधार पर झूठा साबित हुआ केस
एनसीबी ने खजराना चौराहे की जिस पुलिस चौकी का एफआईआर में उल्लेख किया, उसके किसी स्टाफ को गवाह के रूप में पेश नहीं किया। जिस टैक्सी से युवक आया, उसके चालक के भी बयान नहीं कराए। चौराहे के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष गवाह भी पेश नहीं किए। कोर्ट ने सभी तथ्यों को देखने के बाद एनसीबी के केस को शंकास्पद मानते हुए गुलशेर को बरी कर दिया।

युवक का परिवार परेशान, राजस्थान से इंदौर आने का किराया भी नहीं था
गुलशेर राजस्थान में खेती करता था। खजराना में किसी काम से आया था। पत्नी ने बताया कि गुलशेर की गिरफ्तारी के बाद से ही बुरे दिन शुरू हो गए थे। घर में कमाने वाला कोई नहीं था। पांच साल के बच्चे को छोड़कर मैं कहीं नौकरी करने नहीं जा सकती थी। पड़ोसी, रिश्तेदारों से पैसे लेकर दिन काटे। दो साल तो बहुत ही भयावह रहे।

लॉकडाउन के कारण किसी से मदद भी नहीं मिल पाई। भोजन, राशन के पैकेट मिले तो पेट भर पाया। बच्चे का स्कूल भी छूट गया। राजस्थान से इंदौर आकर जेल में मिलना भी मुश्किल था। इतने पैसे भी नहीं थे। साल में दो-तीन बार ही मिलना हो पाता था। गुलशेर की गिरफ्तारी के समय बेटा पांच साल का था, जो अब 11 का हो गया।

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