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  • There is no less than 5 hours to buy milk, vegetables and groceries, yet people are increasing the crowd in 9 to 12

ग्राउंड जीरो से भास्कर / दूध, सब्जी, किराना खरीदने के लिए 5 घंटे कम नहीं होते, फिर भी 9 से 12 में भीड़ बढ़ा रहे लोग

तस्वीर गुरुवार को नंदानगर की। फल-सब्जी लेने पहुंचे लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया। तस्वीर गुरुवार को नंदानगर की। फल-सब्जी लेने पहुंचे लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया।
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तस्वीर गुरुवार को नंदानगर की। फल-सब्जी लेने पहुंचे लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया।तस्वीर गुरुवार को नंदानगर की। फल-सब्जी लेने पहुंचे लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया।

  • सफाई में नंबर 1 शहर की इन दिनों असंयम नजर आ रहा है, लॉकडाउन के चौथे और कर्फ्यू के लोग सड़कों पर नजर आए
  • सोशल डिस्टेंसिंग की बिलकुल परवाह नहीं की। सुबह 6 से शाम 6 तक अलग-अलग क्षेत्र से लौटकर हरिनारायण शर्मा की रिपोर्ट

दैनिक भास्कर

Mar 27, 2020, 05:13 AM IST

इंदौर. सफाई में नंबर 1 शहर की इन दिनों संयम की परीक्षा है, लेकिन लॉकडाउन के चौथे और कर्फ्यू के दूसरे दिन ज्यादातर लोग असंयमित नजर आए। सोशल डिस्टेंसिंग की बिलकुल परवाह नहीं की। सुबह 6 से शाम 6 तक अलग-अलग क्षेत्र से लौटकर हरिनारायण शर्मा की रिपोर्ट...

सुबह 6 से 9 :सुबह रही शांति, न आवागमन हुआ न मंदिरों में बजी घंटियां 
रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले शहरवासी सुबह उठते हैं तो पहले साढ़े 5 बजे की इंदौर-महू ट्रेन की आवाज से या फिर 6 या 8 बजे वाली ट्रेन की आवाज से। लेकिन 23 मार्च से यह नियम टूट गया है। बाहर घूमने वाले भी नजर नहीं आ रहे। लॉकडाउन का गुरुवार को चौथा दिन था। अब न ट्रेन की आवाज न राजेंद्र नगर, केसरबाग, मेघदूत या रीजनल पार्क पर घूमने वालों की भीड़। चैत्र नवरात्रि में अन्नपूर्णा मंदिर के बाहर भी सुबह 5 बजे से दुकानें खुल जाती थीं, लेकिन गुरुवार को वह भी बंद थीं। मंदिर की घंटी भी बजी तो सिर्फ पुजारी के हाथों। इक्का-दुक्का आसपास के ही लोग बाहर से दर्शन कर जा रहे थे। महू नाका से अन्नपूर्णा, मालगंज तक दूध वाले और पेपर बांटने वाले ही नजर आ रहे थे। संगम नगर में सुबह जब 7 बजे से कर्फ्यू खुला तो दूध लेने वालों की भीड़ रही, लेकिन उसमें भी लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन किया।

तस्वीर दवा बाजार की। दवाई अत्यावश्यक सामग्री है, लेकिन भीड़ में खरीदारी करने पहुंच रहे लोग। 

सुबह 9 से 12 : जैसे आपदा आ गई हो, ऐसी भीड़, एक व्यापारी के साथ मारपीट तक की

चंदन नगर के आसपास वाले क्षेत्र में भीड़ नजर आई। एक व्यक्ति से पूछा तो बोला क्या समझाएं, मेरे ही पड़ोस का एक परिवार पहले सुबह बिस्किट लेने गया। आधे घंटे बाद दूध लेने गया... उसके आधे घंटे बाद फूल लेने गया। पूरे परिवार के सदस्य 1-1 करके बाजार में जा रहे हैं और घूमकर आ रहे हैं। कल रात को ही गली में पुलिस आई, चार-पांच को सजा भी दी, फिर भी नहीं मान रहे। निगम ने एहतियातन सब्जी वालों और किराना दुकानों के सामने चूने से गोले बना दिए थे, बावजूद कई जगह लोग पास-पास खड़े होकर किराना ले रहे हैं और दवा की दुकान पर भी यही हो रहा है। खजराना चौराहे पर पुलिस तैनात है। आनंद बाजार ग्रेटर कैलाश रोड पर भी बड़ी संख्या में पुलिस है और जगह-जगह बैरिकेडिंग है। आने-जाने वालों से पूछताछ हो रही है। चंदन नगर की गलियों में 5-10 लड़के झुंड में खड़े होकर लोगों को देख रहे हैं। मल्हारगंज, कैलाश मार्ग और धान गली में किराना और थोक सामान की 200 से ज्यादा दुकानें हैं। यहां सबसे ज्यादा भीड़ थी। आसपास के लोग परेशान हुए और नाराज भी। एक व्यापारी अशोक तलरेजा ने आपत्ति भी ली, कि पता नहीं कहां से आ गए? हमारी सुरक्षा के साथ यह खिलवाड़ है? एक व्यक्ति ने तलरेजा के साथ ही मारपीट कर दी। यहीं के रहवासी अरुण गर्ग ने टीआई को फोन किया। फिर पुलिस आई और सोशल डिस्टेंस बनाया। 

दोपहर 12 से 2 : किराना, सब्जी-फल, मोबाइल दुकान चालू, मेडिकल, बैकरी पर उमड़ पड़े लोग

दोपहर 12 बजे अन्नपूर्णा मंदिर पर सन्नाटा, आगे किराना दुकान पर भीड़, मोबाइल दुकान भी चालू थी। मेडिकल, बैकरी पर भीड़, नजारा ऐसा जैसे आज के बाद ताला लग जाएगा। उषा नगर में भीड़ थी। 200 से ज्यादा लोग खरीदी कर रहे थे। डेयरियां बंद थीं। शायद यहां तक दूध नहीं पहुंचा या सुबह ही बिक गया। रहवासी मनीष वैशम्पायन चाहते थे पनीर खरीदना, ताकि अगले कुछ दिन परेशानी न आए। बड़ा गणपति, कालानी नगर में भी यही हाल थे। जिंसी में आम दिनों की तरह माहौल था। प्रशासन का यहां भी कोई खौफ नहीं था। एमजी रोड पर भी यही स्थिति। वाहनों की आवाजाही बेहिचक हो रही थी फिर चाहे दोपहिया हो या चार पहिया? केसरबाग, मधुबन चौराहा, लोकमान्य पर भी इसी तरह की खरीदी हो रही थी। एयरपोर्ट रोड पर दोपहर 1 बजे तक किराना की दुकानों में भीड़ कम हो गई थी। इस दौरान एक या दो लोग ही दुकानों पर पहुंचे। ये भी दुकान के बाहर ही खड़े रहकर सामान लेते दिखे।

दोपहर 2 से 5 : माहौल शांत ही रहा, कहीं भीड़ नहीं, पुलिस वाले भी राहत महसूस करते दिखे

माहौल फिर शांत हो गया था। जैसे खरीदी से पेट भर गया हो। चोइथराम मंडी के सामने कुछ महिलाएं फुटपाथ पर थीं, जो घर के काम (सड़क पर ही घर होने से) निपटा रही थीं। चोइथराम चौराहे पर दो जवान थे, वे भी सुस्ताते नजर आए। बीआरटीएस पर आई बस, सिटी बस बंद है, इसलिए पूरे 11 किमी के इस ट्रैक पर शांति पसरी थी। इक्का-दुक्का गाड़ियां ही नजर आईं। कुछ चौराहों पर बैरिकेड्स थे, लेकिन पुलिस नहीं? शायद शाम होने और धूप छंटने के इंतजार में हो। यही हाल एमजी रोड, जवाहर मार्ग का था। सुबह और दोपहर की बजाय शाम को शांत थी। हालांकि शाम 6 बजे बाद जरूर फिर हल्ला होने लगा, लेकिन तब तक पुलिस सक्रिय हो चुकी थी, हर चौराहे पर फिर से बैरिकेड्स और चेकिंग शुरू हो गई थी। सोशल मीडिया पर प्रशासन ने सख्ती के संदेश भेजने शुरू कर दिए थे।  

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