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IRL लैब में सैम्पलों की जांच शुरू लेकिन गति धीमी:MRTB में चोरों ने मशीनों को पहुंचाया था नुकसान, पूरी तरह ठीक होने में लगेगा समय

इंदौर2 महीने पहले
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MRTB हॉस्पिटल स्थित IRL Lab (Intermediate Reference Laboratory) में 15 दिन पहले चोरों द्वारा वायर चुराने के दौरान लैब की सैम्पल मशीनों को जो नुकसान पहुंचाया गया था, अब वहां काम शुरू हो गया है लेकिन गति धीमी है। मशीनों को पूरी तरह से ठीक होने में समय लगेगा। दरअसल, पहले जहां हर दिन 100 सैम्पल टेस्ट किए जाते थे वे अब आधे हो गए हैं। इसके चलते अभी भी सैकड़ों मरीजों के सैम्पल पेंडिंग हैं जिसमें काफी समय लग सकता है।

21 नवम्बर की रात बदमाश हॉस्पिटल की छत पर चढ़े और वहीं स्थित IRL लैब के केबल वायर काटकर चुराकर ले गए थे। इस दौरान उन्होंने मशीन को ढंकने वाली ग्रिल भी तोड़ दी। वारदात के दौरान बदमाशों ने मशीनों को नुकसान पहुंचाया था जिससे 300 से ज्यादा सैम्पलों की रिपोर्ट अटक गई थी। इस लैब में पूरे मप्र के सैम्पल टेस्ट किए जाते हैं। लैब में 2019 में 25 हजार व 2020 में 17 हजार सैम्पल टेस्ट किए गए थे। लैब प्रभारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि मामले में 3 दिसम्बर को मशीन सुधारने के लिए टेक्निकल टीम इंदौर आई थी। एक्सपर्टस ने सारी स्थिति जानी और पूरे प्रोजेक्ट के एक हिस्से को चालू किया है जबकि दूसरा हिस्सा अभी बंद है। उसके पार्टस के प्रस्ताव, बजट, ऑर्डर, डिलीवरी में अभी समय लगेगा। तब तक सैम्पलों टेस्टिंग जारी है लेकिन गति धीरे है। पहले जहां रोज 100 सैंपल टेस्ट होते थे, अभी 50 हो रहे हैं जिसके चलते समय लग रहा है। अभी नए सैम्पल नहीं लिए जा रहे हैं। पुराने सैम्पलों की टेस्टिंग पूरी होने के बाद फिर नए सैम्पल लिए जाएंगे।

करोडों की लागत वाली है मशीन

TB पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय व राज्य सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर काम किए गए हैं। इसी कड़ी में 2010 में CTD (Central TB Division), STB (State TB Office) व WHO (World Health Organisation) से जुड़े NGO, FIDR (Foundation for Innvation Diagonis and Research) ने संयुक्त रूप से इंदौर के MRTB हॉस्पिटल में इस लैब की स्थापना के साथ अमेरिका में निर्मित इस करोडों रु. की मशीन को इंस्टाल किया गया था। इस तरह एक दशक से यहां राज्यभर के सैम्पल टेस्ट जा रहे हैं। डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक एक बार मशीन पर 900 सैम्पल टेस्ट किए जाते हैं। इसमें जब भी सैंपल पॉजिटिव रहता है तो कई बार जांच की जाती है जो दो महीने तक चलती है।

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