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लॉकडाउन में आईआईएम की स्टडी:कोरोना काल में जिन लोगों को नहीं मिला इमोशनल सपोर्ट वे हुए हाइपर एंग्जाइटी के शिकार

इंदौरएक महीने पहले
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  • इंदौर में तनाव लेने वालों का औसत 68.5 फीसदी रहा
  • इमोशनल सपोर्ट के आधार पर भी भावनात्मक सेहत जांची गई
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अनुराग शर्मा, लॉकडाउन के दौरान लोगों की भावनात्मक सेहत जानने के लिए आईआईएम इंदौर ने एक स्टडी की है। इसकी रिपोर्ट कहती है, कोरोना के कारण देश के 55 फीसदी लोग अत्यधिक तनाव से ग्रस्त थे। इंदौर में तनाव लेने वालों का औसत 68.5 फीसदी रहा। बीमारी के दौरान  समाज की ओर से मिले इमोशनल सपोर्ट के आधार पर भी भावनात्मक सेहत जांची गई। देश के 76 फीसदी लोगों को मध्यम से अधिक भावनात्मक सहारा मिला। इंदौर के लिए ये आंकड़ा 64.45 फीसदी है। रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक तनाव महसूस करने वाले लोग, कम भावनात्मक सहारा मिलने वाली श्रेणी में भी थे। 
ये आंकड़े देश के अलग-अलग शहरों के रेड जोन में रहने वाले 568 परिवारों से सर्वे आधार पर निकाले गए। कोराना काल में जिन लोगों को नहीं मिला इमोशनल सपोर्ट वे हुए हायपर एंजायटी के शिकार। आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु राय, प्रोफेसर वैजयंती और प्रोफेसर एकता अग्रवाल ने यह स्टडी की।

इंदौर के 83.48% लोगों ने सरकारी प्रयासों को सराहा
सर्वे में सरकार के निर्णयों पर लोगों के भरोसे को भी जांचा गया। लॉकडाउन और अनलॉक के दौरान सरकार और स्थानीय प्रशासन की नीतियों, लिए गए निर्णयों और प्रयासों पर आधारित सवाल किए गए। सर्वे में शामिल 83 फीसदी लोगों ने सरकार पर मध्यम से अधिक स्तर का भरोसा जताया। सर्वे में शामिल इंदौर के 83.48 फीसदी लोगों ने सरकारी प्रयासों को सराहा और भरोसा जताया।   

अध्ययन में दस से ज्यादा शहर; नौकरीपेशा, युवा, गृहिणियों और छात्रों को किया शामिल
कोरोना से मौतों, संक्रमण के बाद के सामाजिक भेदभाव, नौकरी जाने का डर, अनजान खतरों से बचने सहित अन्य कारणों ने हर वर्ग के लोगों को तनाव दिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए एक सामाजिक बदलाव की जरूरत है जो उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लोगों को फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने और सही तरीके विकसित करने के लिए तैयार कर सके। अध्ययन के लिए मप्र के अलावा  दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के शहरों को शामिल किया गया है। इन शहरों के मध्यम से उच्च आय वर्ग के नौकरीपेशा और व्यापार करने वाले युवाओं, गृहिणियों और 20 की उम्र से अधिक के छात्रों से सवाल के आधार पर आंकड़े जुटाए गए।

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