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सीराे सर्वे कल से:दो दिन पहले तक यही तय नहीं कि 2000 बच्चों के सैंपल इंदौर में ही जांचे जाएंगे या दिल्ली भेजेंगे

इंदौर4 महीने पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो

कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों में एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए सीरो सर्वे सोमवार से शुरू होगा, लेकिन दो दिन पहले तक यही तय नहीं हो सका कि दो हजार बच्चों से लिए जाने वाले सैंपल की जांच इंदौर में ही होगी या फिर सैंपल दिल्ली भेजे जाएंगे। शनिवार को भी एमजीएम मेडिकल कॉलेज में दिनभर इसी को लेकर विचार-विमर्श होता रहा। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में एंटीबॉडी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए पहले यह सोचा गया कि बच्चों के सैंपल जांच के लिए किसी निजी लैब भी भेजे जा सकते हैं।

फिर नई दिल्ली की एनसीडी लैब से मार्गदर्शन मांगा तो उन्होंने कहा कि ऐसी लैब में जांच करवाना पड़ेगी, जहां रिपीट जांच भी करवाई जा सके। अलग-अलग लैब का चुनाव नहीं कर सकते, क्योंकि पहली बार जिस मशीन और किट का इस्तेमाल जांच में होगा, दूसरी बार भी वैसी ही प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। ऐसे में विचार किया जा रहा है कि सारे सैंपल दिल्ली भेज दिए जाएं या उनके द्वारा बताई गई लैब में भेजे जाएं। सैंपल कहां जांचे जाएंगे, आज तय कर लेंगे : डीन डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि रविवार तक तय कर लिया जाएगा कि सैंपल किस लैब में जांचें जाएंगे। यदि मेडिकल काॅलेज में ही सैंपल जांचने के निर्देश मिलेंगे तो हम उसके लिए भी तैयार हैं।

लॉकडाउन और क्वारेंटाइन से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर : विशेषज्ञ

इंदौर | लॉकडाउन, फिर स्कूलों के लगातार बंद रहने और क्वारेंटाइन व्यवस्था से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर हुआ है। विशेषज्ञों ने यह बात शनिवार को कोविड-19 और मानसिक स्वास्थ्य विषय पर सेमिनार में कही। बाल मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. हीरल कोटाडिया ने कहा बच्चों में अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, मोबाइल एडिक्शन, खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। डॉ. राहुल माथुर ने टेलीमेडिसिन के जरिए काउंसलिंग का जिक्र किया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग प्रमुख डॉ. वीएस पाल ने “सायबर-कोंड्रिया” यानी इंटरनेट पर चल रही भ्रामक जानकारी और टीकाकरण के बारे में बताया।

वे बोले कि कुछ लोग वैक्सीन लगवाने को लेकर आशंकित रहते हैं। इसके लिए क्राइसिस काउंसलिंग पर जोर देते हुए डिजिटल टेक्नोलॉजी की उपयोगिता बताई। डॉ. विजय निरंजन ने कहा कि मरीज को दी जा रही अन्य दवाओं और जांचों की जानकारी मनोरोग विशेषज्ञ को होना जरूरी है। डॉ. रमन शर्मा ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण के दौरान हर चार में एक वृद्ध को अनिद्रा, अवसाद व याददाश्त में कमी जैसी मानसिक समस्या देखने को मिल रही है। रोकथाम तभी संभव है जब कसरत सहित उचित आहार व जीवनशैली अपनाई जाए।

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