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कोरोना मरीजों के इलाज की स्थिति;:होम आइसोलेशन व एडमिट मरीजों का लगभग समान है ट्रीटमेंट, केवल आइसोलेशन पर जोर

इंदौर3 दिन पहले

तीसरी लहर में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ अधिकांश के ए सिम्टोमैटिक होने के कारण उन्हें होम आइसोलेट ही किया जा रहा है। केवल 3-4 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो सरकारी MRTB व अन्य प्राइवेट अस्पतालों में एडमिट हैं। खास बात यह कि अस्पताल में भी एडमिट मरीजों में आधे से ज्यादा को भी वही ट्रीटमेंट दिया जा रहा है जो होमआइसोलेट मरीजों को। इसका कारण है कि अस्पताल में एडमिट ये वे मरीज हैं जिनके यहां आइसलोट होने के लिए अलग से रूम या व्यवस्था नहीं है। बाकी मरीजों को साथ में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व अन्य बीमारियां हैं तो उसकी दवाइयां अलग से चल रही है। इलाज में खास जोर आइसोलेशन पर है कि संक्रमित एक स्थान पर आइसोलेट रहे और अन्य को संक्रमित न करें।

अभी शहर में 5600 से ज्यादा एक्टिव केस हैं। इनमें से 96% से ज्यादा होमआइसोलेट हैं। अभी कोरोना प्रोटोकॉल के तहत इन्हें पहले दिन ही एक बार में मेडिसिन की किट दी जा रही है जिसमें एक हफ्ते की दवाइयां हैं। एक हफ्ते बाद इन मरीजों को नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद इन्हें डिस्चार्ज किया जा रहा है। कई तो ऐसे हैं जिनकी रिपोर्ट 4 से 5 दिनों में ही नेगेटिव आ रही है। उधर, अस्पताल में एडमिट मरीजों को भी अधिकतम 5 दिनों में ही डिस्चार्ज किया जा रहा है। केवल बुजुर्ग या कोमार्बिड (दूसरी बीमारियां भी) को ही एकाध हफ्ते एडमिट रखना पड़ रहा है। अभी ICU में एक भी मरीज होने की सूचना नहीं है। इसके पीछे कारण नए वैरिएंट की अटैकिंग क्षमता कम होना है क्योंकि यह रेसपिरेटरी सिस्टम में केवल अपर लेवल (गले तक) ही इफेक्ट कर रहा है। दूसरा खास कारण ज्यादातर मरीजों का वैक्सीनेट होना है जिनके कारण वे सुरक्षित है।

इन स्थितियों में हो रहा है होम आइसोलेशन का इलाज

- कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव होने के साथ बिल्कुल सामान्य लक्षण हो क्योंकि कई मरीज तो ऐसे भी हैं कि उन्हें न तो सांस लेने में परेशानी है और न सर्दी-खांसी। ऐसे को होम आइसोलेट किया जा रहा है।

- बिल्कुल सामान्य सर्दी-जुकाम हो।

- जिनके घर अलग से रूम के साथ लेट-बाथ अटैच हो।

- संक्रमित मरीज के पास सीधे तौर पर किसी का आना-जाना न हो।

- पहले दिन RRT (रैपिड रिस्पांस टीम) द्वारा उसके घर जाकर उसकी हिस्ट्री खंगाली जाती है। इसके साथ ही उसे होम आइसोलेट कर परिवार व नजदीकी लोगों के सैम्पल लिए जाते हैं।

- RRT द्वारा संक्रमित मरीज को जिस रूम में होम आइसोलेट किया जाना है उसका निरीक्षण कर फिर सहमति दी जाती है।

- अगर वहां परिवार के अन्य लोगों की आवाजाही की संभावना है तो फिर एडमिट कराया जाता है।

- इसके साथ ही मेडिसिन की एक किट दी जाती है। इसमें टेबलेट एंजियोथ्रोमाइसिन, टेबल मल्टी विटामिन, टेबलेट सेट्रिजिन, टेबले पेरासिटामॉल, टेबलेट रेनीटिडिन, टेबलेट जिंक, टेबलेट विटामिन सी आदि दी जाती है। इसके साथ ही ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है।

- दिन में दो बार कोविड कंट्रोल रूम से दो बार वीडियो व ऑडियो कॉल कर फॉलोअप लिया जाता है।

- फिर एक हफ्ते में नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

…और अस्पताल में एडमिट मरीजों की इलाज की स्थिति

- ऐसे मरीज जिनमें सामान्य लक्षण हैं लेकिन घर में आइसोलेट होने की व्यवस्था नहीं थी उन्हें भी अस्पताल में टेबलेट एंजियोथ्रोमाइसिन, टेबल मल्टी विटामिन, टेबलेट सेट्रिजिन, टेबले पेरासिटामॉल, टेबलेट रेनीटिडिन, टेबलेट जिंक, टेबलेट विटामिन सी आदि दी जाती है।

- अस्पताल में उन मरीजों को एडमिट किया जा रहा है जिन्हें ज्यादा सर्दी-खांसी या बुखार है। उन्हें इन दवाइयों के अलावा बुखार नहीं उतरने या अन्य कोई परेशानी होने पर अलग-अलग दवाइयां दी जाती है।

- बुजुर्ग व कोमॉर्बिड मरीजों को कोरोना की दवाइयों के साथ उन्हें पूर्व से चल रही ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या जो भी बीमारी है, की दवाइयां दी जाती है।

- एडमिट दो कारणों से ही किया जा रहा है। एक तो घर पर आइसोलेट नहीं होने के कारण वे अन्य किसी को संक्रमित न करें और दूसरा उन्हें ज्यादा सर्दी-खांसी या बुखार हो।

- MRTB अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. सलिल भार्गव के मुताबिक पहले मरीजों को जो ACQF दवाई उपयोग करते थे, अब नहीं की जा रही है। रेमडेसिविर का उपयोग जरूरत के हिसाब से किया जाता है। स्टेराइड व अन्य दवाइयां जो पहले उपयोग की जाती थी, अभी भी की जा रही है। एंटीबायोटिक्स व ऑक्सीजन जरूरत के हिसाब से उपयोग की जाती है।

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