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वाटर प्लस सिटी घोषित होने पर शहर गदगद:विजयवर्गीय बोले हमें अब इंदौर में वाटर ट्रांसपोर्ट पर भी विचार करना चाहिए, सिलावट ने अफसरों को किया सम्मानित

इंदौर4 महीने पहले
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इंदौर के वाटर प्लस सिटी घोषित होने पर शहर को इस उपलब्धि के लिए सभी ओर से शुभकामनाएं दी जा रही है। गुरुवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बधाई दी। उन्होंने कहा हमारी यह पुरानी इच्छा थी कि शहर की नदियों में साफ पानी बहे। इंदौर की नदियों में वाटर ट्रांसपोर्ट चलाए जाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर का ट्रैफिक जिस तरह से बढ़ रहा है उससे हमें एक वैकल्पिक ट्रैफिक का साधन जरूर मिल सकता है।

मंत्री सिलावट ने कमिश्नर, कलेक्टर व निगम कमिश्नर को पुष्पगुच्छ देकर शुभकामनाएं दी।
मंत्री सिलावट ने कमिश्नर, कलेक्टर व निगम कमिश्नर को पुष्पगुच्छ देकर शुभकामनाएं दी।

उधर, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने रेसीडेंसी कोठी कमिश्नर डॉ. पवन शर्मा, कलेक्टर मनीष सिंह एवं निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल को पुष्पगुच्छ देकर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि शहर स्वच्छता, स्मार्ट सिटी, वैक्सीनेशन, वाटर प्लस सिटी सहित कई मामलों में शहर का देश में रोशन किया है। इसके साथ ही आगे हर क्षेत्र में इसी प्रकार के सराहनीय कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

खास बात यह कि वाटर प्लस सर्टिफिकेट देश में किसी भी शहर को नहीं मिला है। इसके मिलने के बाद ही सेवन स्टार का दावा पक्का माना जा रहा है। देश में सूरत और अहमदाबाद के साथ नवी मुंबई भी वाटर प्लस के सर्वे के लिए इंदौर से मुकाबले में थे। इंदौर ने इसी के लिए 300 करोड़ रुपए में नाला टैपिंग कर दो नदियों और 27 नालों को सीवर मुक्त किया है। शहर के पांच हजार से ज्यादा परिवारों ने 20 करोड़ खर्च कर नाले में सीधे गिरने वाले आउटफॉल को बंद कर घर खुदवाने के साथ ड्रैनेज लाइन में कनेक्शन लिया। सबसे बड़ी चुनौती यह थी, सड़क या ड्रेनेज से पानी बहता नजर नहीं आना चाहिए। बारिश का सीजन होने से इंदौर के लिए यह चुनौती बहुत बड़ी थी कि कहीं भी पानी ज्यादा देर जमा नहीं रहे। नालों और नदियों में कचरा नजर न आए, इसके लिए 19 जोन पर तीन स्तर की व्यवस्था लगाई गई है। पहली लेयर में काम करने वाले निगमकर्मी हैं, दूसरी में CSI-दरोगा और तीसरी में नियंत्रणकर्ता अधिकारी। पूरी टीम सुबह 6 से मैदान संभाल रही थी और रात 12 बजे तक व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही थी।

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