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5 मिनट में वायरस खत्म!:इंदौर एयरपोर्ट को मिली नीलभस्मी मशीन, अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के आधार पर काम करेगी

इंदौरएक महीने पहले
ये मशीन अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के आधार पर काम करने वाली स्वचलित मशीन है।

राजा रमन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT) ने कोरोना से बचाव के लिए नीलभस्मी मशीन तैयार की थी। यह मशीन मंगलवार को देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को सौंप दी गई है। दरअसल, कोरोना जैसे वायरस को नष्ट के लिए करने के लिए कैट द्वारा तैयार ‘नीलभस्मी’ उपकरण से टर्मिनल को और सुरक्षित रखा जा सकेगा।

एयरपोर्ट डायरेक्टर अर्यमा सान्याल ने बताया, कैट द्वारा बनाए गए इस उपकरण की चार भुजाएं हैं, जो नीचे से ऊपर और हर दिशा में अलग-अलग सेट की जा सकती हैं। इसकी लगी अल्ट्रावॉयलेट किरणें जहां भी जाती हैं, वहां मौजूद वायरस को नष्ट कर देती हैं। इस यंत्र को दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), साउथ ब्लाॅक समेत कई और बड़े शासकीय कार्यालयों में लगाया गया है। अभी एयरपोर्ट पर उड़ानें कम होने से हम शाम 6 बजे एयरपोर्ट बंद कर देते हैं, इसलिए 6 बजे के बाद ही इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

ये मशीन अल्ट्रावॉयलेट रेडिएशन के आधार पर काम करने वाली चलित मशीन है। एक मीटर की दूरी से ही सतह और हवा को इसकी सहायता से बैक्टीरिया मुक्त किया जा सकता है। टॉवरनुमा इस मशीन की 4 भुजाओं में आठ लैंप लगे हैं, जो यूवी रेडिएशन उत्सर्जित करते हैं। ये मशीन एक मीटर के दायरे में आने वाली किसी सतह को पांच मिनट में बैक्टीरिया मुक्त कर देती है।

10 वर्गमीटर के कमरे को बैक्टीरिया मुक्त करने के लिए 45 मिनट का समय लेती है। कैट के अनुसार यूवी-सी लाइट के जरिए मर्स कोव और सार्स-कोव-1 जैसे कोरोना वायरस का खत्म होना साबित हो चुका है। हालांकि ये लाइट, कोविड-19 बीमारी के लिए जिम्मेदार सार्स-कोव-2 वायरस को भी खत्म करती है, यह अभी तक प्रमाणित नहीं हुआ है। मशीन तैयार करने वाले वैज्ञानिक एसके मजूमदार ने बताया, इस मशीन का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर किया जा चुका है। इसकी तकनीक के आधार पर बाजार में इस तरह की मशीनें तैयार की जा रही हैं।

यह है नीलभस्मी
- RRCAT के वैज्ञानिकों ने इसे तैयार किया है।
- 2 लाख रुपए इसकी लागत है।
- हैदराबाद के ESIC मेडिकल कॉलेज ने इसे प्रमाण पत्र दिया है।
- 8 यूवी लैंप का होता है उपयोग।
- 928 माइक्रोवाॅट प्रति सेंटीमीटर उर्जा से एक वर्गमीटर क्षेत्र एक मिनट में साफ होता है।
- 9000 घंटे एक यूवी लैंप की कार्यक्षमता।
- 99.9% वायरस को नष्ट करने में सक्षम।

एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग, 30 दिन तक रहता है असर, होटल-रेस्त्रां में कारगर

  • कोरोना वायरस के कारण शहर में एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग की मांग भी बढ़ी है। होटल, रेस्त्रां और बार में इसका उपयोग ज्यादा हो रहा है। डिसइन्फेक्शन एक्सपर्ट आलोक खोरे के अनुसार एंटीमाइक्रोबियल कोटिंग बहुत पहले से उपयोग में आ रही तकनीक है।
  • अस्पतालों में इसका उपयोग ज्यादा होता था। कोविड के बाद व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इसका उपयोग बढ़ गया है। अल्कोहल, केटेशोल, पॉलिसिलॉक्जेन, सिल्वर नेनौ पार्टिकल और क्वाटरनरी अमोनियम सॉल्ट जैसे अलग-अलग रसायनों के साथ ये कोटिंग की जाती है। एक सप्ताह से तीस दिनों तक के लिए ये कारगर होती है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि उस जगह पर लोगों की आवाजाही कितनी होती है।

10 से अधिक जगहों पर किया जा रहा है इस्तेमाल

नीलभस्मी को बनाने में महज 2 लाख रुपए की लागत आई है और इसे फिलहाल दिल्ली स्थित भाभा एटामिक सेंटर के गेस्ट हाउस और इंदौर में RR कैट परिसर समेत दिल्ली और उत्तराखंड के 10 से अधिक निजी उद्योगों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर सब कुछ अच्छा रहा तो आने वाले दिनों में इस उपकरण का इस्तेमाल सार्वजनिक क्षेत्रों जैसे अस्पताल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर किया जा सकता है।

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