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  • Wadhwani was sent back to jail by 13 July; Increased judicial custody of Sandeep Mata, Vijay Nair, Ashok Daga and Amit Bothra

ऑपरेशन कर्क / वाधवानी को 13 जुलाई तक फिर भेजा जेल; संदीप माटा, विजय नायर, अशोक डागा व अमित बोथरा की न्यायिक हिरासत बढ़ाई

फाइल फोटो। फाइल फोटो।
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फाइल फोटो।फाइल फोटो।

  • कोर्ट ने वाधवानी को यह राहत दी है वकील जेल में जाकर नए बयान और हस्ताक्षर ले सकते हैं, जिसे विभाग को सबमिट किया जा सकता है

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:21 AM IST

इंदौर. पान मसाला और सिगरेट की टैक्स चोरी के मामले में उद्योगपति किशोर वाधवानी को अब 13 जुलाई तक जेल में ही रहना होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. गौरव गर्ग ने डीजीजीआई के तर्क सुनने के बाद वाधवानी की हिरासत 13 जुलाई तक बढ़ा दी। इसके साथ ही इस टैक्स चोरी में शामिल संदीप माटा, विजय नायर, अशोक डागा और अमित बोथरा सभी की न्यायिक हिरासत 13 जुलाई तक बढ़ा दी है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की गई। हालांकि कोर्ट ने वाधवानी को यह राहत दी है वकील जेल में जाकर नए बयान और हस्ताक्षर ले सकते हैं, जिसे विभाग को सबमिट किया जा सकता है।


वाधवानी ने कहा था कि 15 से 18 जून के बीच विभाग द्वारा कोरे पन्नों पर उनके हस्ताक्षर लिए गए हैं। इस पर विभाग के विशेष लोक अभियोजक चंदन एरन ने जेल मंे जाकर हस्ताक्षर लेने पर आपत्ति नहीं जताई लेकिन यह कहा कि बयान की एक कॉपी विभाग को भी दी जाए। उल्लेखनीय है कि इसके पहले कोर्ट ने वाधवानी को 30 जून तक के लिए हिरासत में भेजा था। 

टैक्स चोरी के साथ हवाला की भी जांच
डीजीजीआई ने इस पूरे मामले में टैक्स चोरी के साथ ही पान मसाले की अवैध बिक्री से हुई कमाई के हवाला के जरिए इधर-उधर करने के मामले में भी जांच तेज कर दी है। वहीं उज्जैन के कारोबारी बंडू राठौर के यहां भी इसके कई हिसाब मिलने की बात कही जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि संदीप माटा के मोबाइल में भी लेन-देन के कई हिसाब मिले हैं। माटा द्वारा अवैध बिक्री के लेन-देन का हिसाब वाट्सएप के जरिए रखा जाता था। यह कागजों पर कोई हिसाब नहीं रखते थे और टैक्स चोरी के जरिए आई राशि के लिए वाट्सएप पर ही संदेश भेजते थे। इस तरह के कई संदेश विभाग ने माटा के मोबाइल, लैपटाप की जांच में पकड़े हैं।

पैकेजिंग मटेरियल की सप्लाय से निकाल रहे टैक्स चोरी
डीजीजीआई के छापे में कई जगह से मशीन, पैकिंग मटेरियल मिले हैं। इन पर सिगेरट आदि की कीमत भी लिखी हुई है। विभाग द्वारा इनके सप्लायर से पूछताछ कर पता लगया जा रहा है कि वह हर माह कितने की पैकिंग मटेरियल सप्लाय करते थे। इससे हिसाब लगेगा कि वाधवानी द्वारा कितने रुपए की सिगरेट बनाकर बेची जाती थी और कितनी टैक्स चोरी की जाती थी। इसके पहले भी एक फैक्टरी में मिले खाली बॉक्स व उन पर लिखी कीमत के आधार पर सिगेरट में 105 करोड़ की टैक्स चोरी की गणना हुई थी।

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