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  • Where Garba Started In Indore; 92 Years Old Tradition, Worship Of Mother Did Not Stop Even In Curfew, Only In Memories For Two Years Due To Corona

सबसे पुराना गरबा लाल गली से एक रिपोर्ट:जहां से इंदौर में शुरू हुआ गरबा; 92 साल पुरानी परंपरा, कर्फ्यू में भी नहीं रुकी मां की आराधना, कोरोना के कारण दो साल से सिर्फ यादों में

इंदौर18 दिन पहले
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एमजी रोड की लाल गली, इंदौर का सबसे पुराना गरबा स्थल। शहर में गरबे की शुरुआत ही यहीं से हुई। इस साल यहां के गरबे को 92 साल पूरे हो रहे हैं। कोरोना को छोड़ दें तो यहां गरबों पर कभी ब्रेक लगा ही नहीं। पारंपरिक स्वरूप में गरबे यहां की पहचान रही है। ढोलक की थाप, तबले की धुन पर ही गरबे होते हैं।

गीत भी गुजराती परिवार व आयोजन से जुड़े लोग ही लिखते हैं। कोई फिल्मी गीत नहीं। गरबा आयोजन की सदस्यों में से एक 70 वर्षीय निर्मला देसाई कहती हैं उनकी चार पीढ़ियों ने यहां गरबे किए। पहले मां सरस्वती देवी गरबे करती थी, फिर उन्होंने किए। बाद में बेटी, नातिनी ने किए। ने गरबे किए।

ये गली जैसी आज सूनी है, वैसी कभी नहीं रही। पिछले साल और इस साल भी गरबे नहीं हो रहे हैं। गरबा आयोजन समिति से जुड़े शशिकांत पुराणिक कहते है यहां गरबे का अलग ही इतिहास है। जेल रोड व आसपास गुजराती परिवार काफी संख्या में रहते थे। शुरुआत में कुछ लोगों ने घर में गरबे शुरू किए। फिर गली में आकर करने लगे। आज गुजराती नवदुर्गा उत्सव मंडल (लाल गली) ‘बड़ी गरबी’ की अलग ही पहचान बन गई।

गुजराती नवदुर्गा उत्सव...उस दौर के किस्से जो कभी भूल नहीं पाते

  • 1929 के आसपास लाल गली में गरबा शुरू हुआ।
  • 02 साल का ब्रेक कोरोना के कारण इतने साल में रहा
  • 90 साल तक बिना ब्रेक गरबे का आयोजन हुआ

झूले से देवी का आगमन, यह दृश्य हर किसी को याद है

जेलरोड निवासी निर्मला देसाई बताती हैं करीब 55 साल पहले की बात है, नवदुर्गा की नृत्य नाटिका हुई थी। नौ देवियों में एक मैं बनी थी और बाकी आठ सहेलियां हमारे ही ग्रुप की थी। नृत्य नाटिका में रस्सी को बांध झूले से स्वर्ग की देवी का आगमन किया गया। जब इसका मंचन हुआ तो लगा मानो साक्षात देवी का आगमन गरबा स्थल पर हो रहा है। इतनी तालियां बजी, लोगों को इतना पसंद आया कि वो दृश्य आज भी हर कोई याद करता है।

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