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चौराहे पर गोले बना पीएस को समझाया:पांच दिन में ट्रैफिक सर्वे कर बनाएंगे बंगाली फ्लायओवर की नई डिजाइन

इंदौर2 महीने पहले
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चौराहा देखने के बाद भी पीएस पुरानी डिजाइन के पक्ष में दिखे। - Dainik Bhaskar
चौराहा देखने के बाद भी पीएस पुरानी डिजाइन के पक्ष में दिखे।

बंगाली चौराहा फ्लायओवर को लेकर पांच दिन में ट्रैफिक सर्वे किया जाएगा। उसके बाद नई डिजाइन तय की जाएगी। यह फैसला पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई की मौजूदगी में संभागायुक्त कार्यालय में हुई बैठक में लिया गया है। बैठक से पहले मंडलोई बंगाली चौराहा पहुंचे, जहां अफसरों ने पिलर की प्रस्तावित जगह गोले बनाकर समझाया कि मौजूदा डिजाइन से क्या परेशानी आएगी।

हालांकि बैठक में वे फिर भी डिजाइन पर सहमत नजर आए, मंत्री तुलसी सिलावट और सांसद शंकर लालवानी ने संभावित परेशानियां रखीं तब उन्होंने माना कि बंगाली और एलआईजी से नवलखा तक एलिवेटेड काॅरिडोर के लिए ट्रैफिक सर्वे ही नहीं हुआ। बैठक में पूर्व निगम सभापति अजय सिंह नरुका ने कहा कि इसी जगह पर मेट्रो के पिलर भी आ रहे हैं। उनके आने के बाद तो जगह और कम बचेगी। मेट्रो का स्टेशन भी इसके पास ही बनेगा। मेट्रो के यात्रियाें के लिए अाने-जाने वाले वाहन, ऑटो, सिटी बस आदि कहां खड़े होंगे और कैसे निकलेंगे इसका भी ध्यान रखना होगा।

इस पर सांसद बोले कि जो चार पिलर आ रहे हैं उसके बजाए एक बीच में पिलर लेकर आएं। वह रोटरी के तौर पर काम आ सकता है। बैठक में सांसद लालवानी ने कहा कि एलिवेटेड ब्रिज पर बीआरटीएस लेन ऊपर होना चाहिए। पीएस मंडलोई बोले कि जो सुझाव प्राप्त हुए हैं उनका परीक्षण कराकर जल्दी संशोधित प्रस्ताव तैयार होगा।

डिजाइन डिफेक्ट पर ये तर्क दिए पीडब्ल्यूडी ने

1. बीच का पिलर हटाया तो चारों पिलर पर हैवी गर्डर डालना होगी। बाकी चारों पिलरों की स्ट्रैंथनिंग करना होगी। इससे इनके पास 12 मीटर की जगह कम हो सकती है। 2. बीच के हिस्से में आर्च बनाया तो ऊंचाई कम होगी। विजिबिलिटी घटेगी, बड़े वाहन नहीं निकल पाएंगे।

बैठक से भास्कर लाइव

पीएस- डिजाइन बढ़िया है। इसमें क्या परेशानी है। सांसद – नहीं, ट्रैफिक बढ़ेगा तो परेशानी होगी। अफसर – डिजाइन बदली तो लागत बढ़ेगी। मंत्री सिलावट – 10 करोड़ भी बढ़े तो मंजूरी मैं दिलाऊंगा। पीएस – ट्रैफिक की दिक्कत है तो सर्वे करा लेते हैं। सिलावट – एक सप्ताह में सर्वे कर रिपोर्ट व लागत का प्रस्ताव दें। 25 जून को मंत्री से इस पर चर्चा करेंगे। सांसद- एलिवेटेड कॉरिडोर की डिजाइन बदल जनप्रतिनिधियों व एक्सपर्ट से बात किए बिना वर्क ऑर्डर जारी कर दिए। अफसर- शासन से मंजूरी के बाद नियम से काम शुरू किया। पीएस- सर्वे के बाद ही कॉरिडोर का काम शुरू करेंगे। अतुल सेठ- पीडब्ल्यूडी में ट्रैफिक सर्वे डिपार्टमेंट ही नहीं है। पीएस- डिजाइन पर विशेषज्ञों से बात कर लेते हैं। सर्वे के बाद जनप्रतिनिधियों के बीच पूरा प्रोजेक्ट रखेंगे।

अफसरों का दावा-डेढ़ से साढ़े 9 करोड़ बढ़ सकती है लागत

बंगाली फ्लायओवर ब्रिज के बीच के हिस्से में बदलाव को लेकर पीडब्ल्यूडी अफसरों ने तीन विकल्प उसकी लागत के साथ बताए हैं।

1. वर्तमान डिजाइन में टी बीम और स्लैब के साथ अनुमानित लागत 1.40 करोड़ बढ़ेगी। पीडब्ल्यूडी ने सभी ब्रिज ऐसे ही बनाए हैं, जिनमें परेशानी आ रही है।

2. प्री स्ट्रेस आरसीसी गर्डर से बीच का हिस्सा बनाने पर 3 करोड़ खर्च होंगे। इस तकनीक से पीपल्याहाना फ्लायओवर बनाया गया है।

3. कंपोजिट गर्डर के साथ बनाने में 9.5 करोड़ का खर्च आ सकता है। इसमें नीचे स्टील, ऊपर कांक्रीट गर्डर रहती है। रेलवे ओवरब्रिज ऐसे ही बनते हैं।

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