तीन स्टार्टअप्स की कहानी:युवाओं ने बेसिक नीड वाले सेक्टर में किया काम, अब पीएम मोदी ने दिया नया टास्क

इंदौर5 महीने पहले

शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मप्र स्टार्टअप कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने ने इंदौर के 2 और भोपाल के 1 स्टार्टअप संचालक से चर्चा की। उन्होंने न केवल स्टार्टअप संचालकों से उनके अनुभव, संघर्ष और चुनौतियों की जानकारी ली, बल्कि उन्हें अपने-अपने क्षेत्र में पूरे करने के लिए नए टास्क भी दिए। आइए जानते हैं पीएम से बात करने वाले तीनों स्टार्टअप संचालकों की कहानी उन्हीं की जुबानी...

'शॉप किराना' स्टार्टअप
इंदौर से संचालित होने वाले 'शॉप किराना' स्टार्टअप की शुरुआत तीन दोस्तों दीपक धनोतिया, तनु तेजस सारस्वत और सुमित घोरावत ने 2015 में की थी। पहले ही साल में स्टार्टअप का टर्नओवर लगभग 2 करोड़ रुपए था। 'शॉप किराना' की सफलता का अंदाजा इसी बात से ही लगाया जा सकता है कि शुरू होने के 4 साल बाद यानी 2019 में स्टार्टअप का टर्न ओवर 450 करोड़ रुपए हो चुका था।

'शॉप किराना' स्टार्टअप देश के 6 राज्यों के 30 शहरों में 1 लाख रिटेल दुकानों और 5 करोड़ उपभोक्ताओं के बीच अपनी सेवाएं दे रहा है। स्टार्टअप का टर्न ओवर 800 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष का है। कंपनी में 11 सौ लोग काम कर रहे हैं। 'शॉप किराना' को अब तक 400 करोड़ की फंडिंग मिल चुकी है। स्टार्टअप के फाउंडर तनु तेजस सारस्वत का कहना है कि हम कर्मचारियों को परिवार जैसा माहौल देते हैं। उनकी परेशानियों को हम अपनी व्यक्तिगत परेशानी मानते हैं।

पीएम ने दिया यह टास्क
मप्र की स्टार्टअप पॉलिसी लांचिंग के दौरान चर्चा में पीएम ने तनु तेजस को स्ट्रीट वेंडर्स को भी अपने नेटवर्क में शामिल करने का टास्क दिया है। पीएम ने सब्जी,फल और अन्य सामान बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर्स के बीच जाकर काम करने और उनके लिए स्टार्टअप के जरिए योजना बनाने को कहा है।

दैनिक भास्कर से सीधी बात

सवाल- स्टार्टअप का आइडिया कहां से आया?

जवाब- तनु ने बताया कि वह राजस्थान से हैं, 15 साल पहले इंदौर पढ़ने आए थे। दोस्त दीपक धनोतिया के पापा की किराना दुकान थी। उन्होंने किराना वालों की समस्या देख रखी थी। दीपक ने समस्या को हमें समझाया। जिसके बाद हमने यह काम शुरू किया।

सवाल- इसे शुरू करने में क्या-क्या चुनौतियां आई ?

जवाब- पहली चुनौती यह थी कि जब हमने काम शुरू किया तब किराना वालों के पास इंटरनेट नहीं हुआ करता था। वह समस्या पहले हमने दुर की। इसकी बाद दूसरी समस्या यह थी कि किराना दुकान वाले सालों से कागज पर आर्डर दे रहे थे, हमने उन्हें ऑनलाइन कराना शुरू किया।

सवाल- स्टार्टअप में जो परेशानी आई उन्हें कैसे हल किया?

जवाब- कोई भी व्यापार हो रोजाना नई नई परेशानी आती है। बस ऐसी टीम बनाओ जो आपकी तरह सोचती हो, स्टार्टअप में जुनून रहता है कि परेशानी से लड़कर सोल्यूशन ढुंढना।

सवाल- फ्यूचर प्लान क्या है?

जवाब- अभी हम 15 शहरों में काम कर रहे हैं। लगभग 1 साल में हमें 30 से 50 शहरों में जाना है। देश के सभी टीयर 2 सीटी में हमें हमारी उपस्थिति दर्ज कराना है।

उमंग श्रीधर डिजाइन

किशनगंज गांव की रहने वाली सुश्री उमंग श्रीधर का स्टार्टअप एक बिजनेस-टू-बिजनेस फैब्रिक सप्लायर प्लेटफॉर्म है। जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में उन महिलाओं/कारीगरों को सशक्त बनाना है, जो पारंपरिक/अंबर चरखा बनाना और हथकरघा पर बुनाई करना जानती हैं। उमंग श्रीधर डिजाइन ने करीब 1.5 करोड़ रुपये फंडिंग प्राप्त की है। उमंग ने यह स्टार्टअप साल 2017 में शुरू किया था। स्टार्टअप के साथ 15 सौ महिलाएं काम कर रही है।

पीएम बोले काशी में भी काम करें

उमंग से चर्चा में पीएम ने कहा कि आप काशी में भी काम करें। वहां के कारीगरों को अपने स्टार्टअप से जोड़कर उन्हें भी प्लेटफॉर्म मुहैया कराने की दिशा में प्लानिंग करें।

दैनिक भास्कर से सीधी बात

सवाल- स्टार्टअप का आइडिया कहां से आया?

जवाब- 2014 में दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी से फैशन डिजाइनिंग और क्लोदिंग टेक्नोलॉजी का कोर्स किया। जहां से मुझे आइडिया आया कि कैसे में गांव की महिलाओं को खादी के साथ जोड़कर उन्हें आगे बढ़ा सकते है और उन्हें रोजगार दिला सकते है।

सवाल- इसे शुरू करने में क्या-क्या चुनौतियां आई ?

जवाब- गांव में महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थीं। महिलाएं काम करना चाहती है लेकिन घर की समस्या के कारण वह बाहर आकर काम नहीं कर पाती है। उन्हें घर से बाहर निकाल कर काम करना यह सबसे बड़ी चुनौती थी।

सवाल- स्टार्टअप में जो परेशानी आई उन्हें कैसे दूर किया?

जवाब- महिलाएं काम नहीं कर पाती थी तो मैं गांव में जाकर उनके साथ बैठकर बात करती थी, जिससे वह मुझ पर विश्वास कर सके ओर अपना काम शुरू कर सकें।

सवाल- फ्यूचर प्लान क्या है?

जवाब- हमारा प्लान है कि 1 मिलियन आर्टिजन्स को हमारे साथ जोड़ सकें और उन्हें इनेबल करें की टॉप उद्यमी बन पाए और आगे बढ़ पाए।

ग्रामोफोन इंदौर

ग्रामोफोन के संस्थापक तौसिफ खान कहते हैं पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि गांवों, किसानों और पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ बड़ा काम करना है। आईआईटी खड़गपुर के बाद आईआईएम अहमदाबाद में भी हम बात किया करते थे कि किस तरह यह संभव हो सकता है। 2016 में मध्यप्रदेश के किसानों से जुड़ने का काम शुरू किया। इसके लिए इंदौर में ऑफिस स्थापित किया। पिछले 5 साल में 150 करोड़ रुपए का फंड जुटाया है हमनें। हमारे साथ 5 हजार लोग मिलकर काम कर रहे है।

निशांत वत्स, हर्षित गुप्ता, आशीष सिंह और मैं पहले हम चार पार्टनर थे, फिर 50 लोगों की टीम के साथ आसपास के कई गांवों में दायरा बढ़ाया। इस समय कंपनी की वैल्यू 200 करोड़ की हो गई है। तौसिफ ने बताया कि कंपनी की शुरुआत मात्र 6 लाख रुपए से हुई थी। किसानों की तरह तरह के सवाल का जवाब देने के लिए कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। मप्र ही नहीं, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के 4.50 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। हर दिन 3 हजार किसान विभिन्‍न समाधान के लिए संपर्क करते हैं। जो किसान स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करते हैं उन्हें बेसिक फोन से भी मिस्ड कॉल देकर समाधान देने की सुविधा दी गई है।

मप्र और इंदौर के आसपास करें केमिकल रहित जैविक खेती पर काम

चर्चा के दौरान पीएम ने तौसिफ से कहा कि आप खेती के क्षेत्र में काम कर रहे हैं, तो मप्र और खासतौर पर इंदौर के आसपास केमिकल रहित जैविक खेती को विकसित करने के क्षेत्र में काम करने का प्रयास करें।

दैनिक भास्कर से सीधी बात

सवाल- स्टार्टअप का आइडिया कहां से आया?

जवाब- हम खेती के बेक-ग्राउंड से आते है। पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि गांवों, किसानों और पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ बड़ा काम करना है।

सवाल- इसे शुरू करने में क्या-क्या चुनौतियां आई ?

जवाब- पहली चुनौती यह आई की हम इंदौर के थे नहीं। लेकिन इंदौर में लोकल सपोर्ट अच्छा मिला। दूसरी चुनौती यह आई की किसानों को राजी करवाना कि हम जैसा कह रहे है वैसा फॉलो करवाना। उन्हें भरोसा दिलाना सबसे बढ़ी चुनौती थी।

सवाल- स्टार्टअप में जो परेशानी आई उन्हें कैसे हल किया?

जवाब- टीम बनाकर, क्वालिटी और टैलेंट ढूंढ़ कर परेशानी को दुर किया। वहीं कैपिटल की समस्या थी, क्योंकि जब हमने काम शुरू किया था, तब एग्री में इतना कैपिटल नहीं था। लेकिन इन्वेस्टर्स ने हमारा विश्वास किया और हमें कैपिटल मिलता गया। जिससे परेशानी दूर होती गई।

सवाल- फ्यूचर प्लान क्या है?

जवाब- हम किसान को बीज बोने से लेकर बाजार में फसल बेचने तक की सभी सुविधा दे रहे हैं। अगले फेज में हम किसान को क्रेडिट देने के साथ ही रिटेलर्स और ट्रेडर्स को भी अपने साथ लाने पर काम कर रहे है।

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