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पशु पालने वाले पटेल ब्रदर्स के माफिया बनने की कहानी:इंदौर में 'झगड़े की प्रॉपर्टी' हथियाते रहे, अफसर-नेता से सांठगांठ कर 30 साल में 350 एकड़ जमीन पर कब्जा किया

इंदौर8 महीने पहलेलेखक: कपिल राठौर
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दो मैरिज गार्डन और 80 दुकानों सहित 100 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जे को प्रशासन ने शुक्रवार को जमींदोज कर दिया। ये कब्जे थे इंदौर के खजराना के पटेल ब्रदर्स के। प्रॉपर्टी के धंधे में इनके पनपने की कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी है। पटेल बद्रर्स खजराना क्षेत्र के रसूखदार माने जाते हैं। 90 के दशक में इनकी पहचान खेती बाड़ी और पशु कारोबारी के रूप में थी।

नायता पटेल यानी यूनुस के परिवार वाले इलाके में किसी की नहीं सुनते थे। अपने रसूख का भरपूर उपयोग करते थे। अफसरों और राजनेताओं से साठगांठ के बलबूते यूनुस और सलीम पटेल विवादित जमीनों का सौदा करना ही पेशा बना लिया। दस्तावेज में हेरफेर कर 30 वर्षों में करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक बन गए। इनकी कई शिकायतें भी हुईं, लेकिन अफसरों ने हर बार मामला दबा दिया। आज पहली बार पुलिस-प्रशासन ने अवैध धंधे की कमर तोड़ दी।

बताया जा रहा है कि रिवाज गार्डन और प्रेम बंधन गार्डन पर शुक्रवार सुबह की गई कार्रवाई के बारे में गुरुवार रात में ही दोनों को जानकारी मिल गई थी। इसके बाद परिवार की महिलाओं को छोड़कर यूनुस, सलीम और सोहराब मोबाइल फोन बंद कर लापता हो गए। आसपास के लोग भी नहीं समझ पाए कि जिनके यहां अकसर बत्ती वाली सरकारी गाड़ियां आती रहती थीं, अचानक यह सब क्या हो गया?

यूनुस पर हत्या का भी आरोप
यूनुस पटेल विवादित सौदों को लेकर चर्चा में रहा है। जब कनाड़िया इलाके का विस्तार हुआ तो उसकी सर्वे नंबर 1392 की जमीन सड़क निर्माण के साथ व अन्य हिस्से में आ गई। दस्तावेज में हेरफेर कर यूनुस ने उन जमीनों के बदले पास की कुछ संस्थाओं की जमीन पर कब्जे शुरू कर दिए। जब शिकायतें हुईं तो अफसरों के साथ मिलकर वह मामले पर पर्दा डालता रहा। यूनुस का भाई सोहराब भी इस काम में मदद करता रहा। यूनुस का आपराधिक रिकाॅर्ड भी रहा है। वह हत्या के मामले में आरोपी भी रह चुका है।

विदेश की पुलिस पहुंची थी खजराना थाने
प्रेम बंधन गार्डन से जुड़ा सलीम पटेल कुछ समय पहले विदेश यात्रा पर गया था। उसने यहां कुछ विदेशियों के साथ फोटो भी सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे। इस दौरान सलीम पर कुछ आरोप भी लगे थे। हालांकि, आरोपों के संबंध में जानकारी नहीं मिल पाई थी। मामले में विदेश की पुलिस खजराना थाने भी पहुंची थी। इसके बाद मामले को रफा-दफा किया गया था। सीनियर पुलिस अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी जुटाई थी। उस समय सलीम के पासपोर्ट की जांच को लेकर मुद्दा भी उठा था।

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भाजपा से जुड़े पार्षद ने लगाए चक्कर, नहीं रुक पाई कार्रवाई
पटेल बंधु बहुत समय पहले प्रशासन की नजरों में आ गए थे। एक विधायक और मंत्री के करीबी होने के कारण वह कार्रवाई से बचते रहे। 2017 में दुकानों का निर्माण करवाते समय वे तत्कालीन निगम कमिश्नर मनीष सिंह की नजरों में आ गए थे, लेकिन भाजपा नेताओं की मदद से बच गए। इस बार भी भाजपा पार्षद ने दोनों को बचाने की कोशिश की थी। देर रात तक अधिकारियों से लेकर सीएम हाउस तक चर्चा होती रही, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

कांग्रेस शासन काल में SSP रुचिवर्धन मिश्र के पास भी शिव शक्ति नगर से लगी जमीनों के कब्जे को लेकर पटेल बंधुओं की जानकारी पहुंची थी, लेकिन रिटायर्ड अधिकारी के नजदीकी होने के चलते कार्रवाई टल गई थी।

बेटे पर भी हो चुकी है कार्रवाई
मैरियट होटल के एक कमरे में युनुस के बेटे फैजल का भारतीय मुद्रा को टॉयलेट में बहाते हुए वीडियो जारी हुआ था। इसमें वकील उपाध्याय की शिकायत के बाद DIG रहे हरिनारायण चारी मिश्र ने प्रकरण दर्ज करवाया था। मामले में फैजल को बाद में जमानत मिल गई थी। संयोगितागंज थाने में भी बिल्डर के बेटे के अपहरण के मामले में फैजान का नाम सामने आया था। इसमें पुलिस ने उस पर केस दर्ज किया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के चलते मामला दब गया।

350 एकड़ जमीन पर कब्जे
आरआई, पटवारी की मदद से यूनुस पटेल, सोहराब पटेल और सलीम पटेल ने 350 एकड़ जमीन पर कनाड़िया और बायपास की जमीनों पर कब्जा कर रखा था। नागपुर के एक परिवार ने भी इसकी शिकायत की थी। भू-माफिया ने होल्कर कालीन जमीन को भी अपने हिस्से की जमीन बताया था।

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