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साध्वी सुलोचना जी ने ब्रह्मचर्य के महत्व काे समझाया:हमारी पांच इंद्रियां हैं और इनके 32 विषय कहे गए हैं

पेटलावद18 दिन पहले
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हमारी पांच इंद्रियां है और इनके 32 विषय कह गए हैं। जीव सबसे ज्यादा स्पर्श (काम ) इंद्री में उलझता है, जंगली शेर को पिंजरे में बंद करना सरल है। मदमस्त हाथी को जंजीरों में जकड़ ना सरल है, चंचल बंदर को नचाना सरल है। 100 ग्रंथों को पढ़कर याद करना सरल है, बड़ी से बड़ी तपस्या करना सरल है। लेकिन कामाग्नि को नियंत्रित कर ब्रह्मचर्य का पालन करना महा दुष्कर है। रावण ने परस्त्री में मन लगाया और मौत को प्राप्त हुए हैं। शास्त्रों में अपघात को महापाप बताया गया है। शील की रक्षा करते प्राणों की आहुति देने को पाप नहीं कहा गया है।

ब्रह्मचर्य ऐसी साधना है जिसकी वजह से सेठ सुदर्शन की सूली का सिहांसन बना तो विजया सेठ विजय सेठानी ने भरी जवानी मे ब्रह्मचर्य का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। उक्त उद्बोधन पर्व पर्युषण के तीसरे दिन स्थानक भवन में विराजित साध्वी सुलोचना जी ने ब्रह्मचर्य के महत्व पर बोलते हुए कहा।

उन्होंने कहा पर्व पर्यूषण को विशाल भवसागर से तीराने वाला जलयान बताया और कहा 8 दिन हमें तप आराधना कर प्रभु स्मरण में बिताकर अपनी आत्मा को निर्मल बनाना है। साध्वी कंचनपुर जी की ब्रम्हचर्य जीवन की प्रेरणादाई संघर्ष गाथा भी बड़े ही मार्मिक शब्दों में बताइ। रुपल जी महाराज साहब रोज शास्त्र का वाचन कर प्रेरक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

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