कोरोना इफैक्ट / ट्रकों पर सवार श्रमिक परिवार के बच्चे बोले-हमें अब मुंबई और गुजरात वापस नहीं जाना, गांव में ही रहेंगे

Children of labor family riding on trucks said - We don't have to go back to Mumbai and Gujarat anymore, stay in village
X
Children of labor family riding on trucks said - We don't have to go back to Mumbai and Gujarat anymore, stay in village

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 07:35 AM IST

पीथमपुर. लाॅकडाउन के चलते काम बंद हाेने से बेराेजगार श्रमिक अपने परिवाराें के साथ बड़ी संख्या में अपने गृहक्षेत्र की ओर पलायन कर रहे हैं। यह सिलसिला लाॅकडाउन-चार के दाैरान भी निरंतर जारी है। सर्वाधिक श्रमिक वर्ग आगरा-मुंबई हाईवे से हाेकर गुजर रहा है। उन्हें गंतव्य तक ले जाने वाले वाहनाें में बैठे बच्चे इस परेशानी से इतने ऊब चुके हैं कि अपने माता-पिता से एक ही बात कह रहे हैं, अब हम वापस नहीं आएंगे। अपना गांव ही अच्छा है वहीं रहेंगे।

आगरा-मुंबई मार्ग स्थित संजय जलाशय पर जय गुरुदेव संस्थान द्वारा लगाए गए सेवा शिविर में श्रमिकाें काे राेका गया। यहां उन्हें नींबू और शकर मिलाकर शरबत व तरबूज आदि दिया गया। साथ ही रास्ते में खाने के लिए सेंव-परमल की थैलियां बांटी गई। यहां रुके ट्रक, मिनीट्रक, रिक्शा आदि में सवार बच्चाें से जब उनका मन लिया गया ताे उनका कहना था। वे दाे माह से परेशान हाे रहे हैं। न ताे ठीक तरह से हमारे माता-पिता व रिश्तेदाराें काे काम मिल पाया है न ही खानपान की व्यवस्था हाे रही है। इनमें शामिल आठ साल की बालिका निधि, 10 साल की बालिका रिद्धिमा और पांच साल की बालिका ज्योति से पूछा कि कहां से आ रहे हो, तो उन्होंने कहा हमें तो बस गांव जाना है। जब हमने उनके पिता कुलदीपसिंह, बृजेश्वर राय आदि से जानकारी लेना चाही ताे बच्चों को लगा कि जहां से आए हैं, वहीं जाने के लिए बोल रहे हैं। इस पर उनका कहना था पापा अब वहां नहीं जाना है। आप ताे अपने गांव चलो। उन्होंने बताया अब हम जीवन में कभी भी मुंबई लौटकर नहीं जाएंगे। मुंबई से जब हम चले तो मात्र एक जगह नासिक में हमें खाना मिला। यहां एमपी में प्रवेश करने के बाद ही जगह-जगह खाने पीने की व्यवस्था मिली। 

लल्लन सिंह ने बताया कि मेरे साथ करीब ऐसे 200 से 300 लोगों का जत्था था, जो सूरत से निकला है। हमारे छोटे-छोटे बच्चों के हमने स्कूलों में भर्ती करवाया था। अब उनको भी हम यही गांव में ही पढ़ाएंगे। वर्तमान हालात ये हैं कि 15 से 20 हजार मजदूर संजय जलाशय से होते हुए अपने-अपने गृहक्षेत्राें स्थित गांव को जा रहे हैं। तकरीबन 200 से 300 छाेटी-बड़ी गाड़ियां राेज यहां से गुजर रही हैं।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना