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धर्मसभा आयोजन:पारा में जप-तप से मनाया गया क्षमापना पर्व

पारा12 दिन पहले
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पिछले जन्म का पुण्य प्रताप ही है कि हमें मानव जीवन मिला है। जैन धर्म में जन्म लेकर हम जप, तप, त्याग और अन्य कई कर्मों से मुक्त होकर अपने पापों के बंध को काट सकते हैं। साथ ही हर वर्ष की तरह पिछले वर्ष में हुई गलतियों को स्वीकार करते क्षमा मांग कर हम अपने संबंधों को बचा सकते हैं।

एक सुश्रावक को इन आठ दिनों में स्वधर्मी की भक्ति करना चाहिए तथा व्रत, नियम एवं पच्छखाण में रहते क्रोध, मान, माया, लोभ, राग, द्वेष, कषाय का त्याग करना चाहिए। स्थानीय मुख्य बाजार स्थित श्री राजेंद्र सूरी गुरु ज्ञान मन्दिर में प्रवचन देते आशीष कोठारी ने उक्त बातें कही।

इसके साथ ही कोठारी ने धर्म संबंधी विधााओं से बच कर अपने जीवन में परिवर्तन का महत्व समझाया। कोठारी ने प्रभु तथा आचार्य भगवंतों के जीवन के किस्से सुनाते सद्मार्ग पर चलने की बात बताई। क्षमापना दिवस में जो वर्ष में एक बार आता है।

इस दिन हम क्षमापना कर अपने पापों का प्रायश्चित भी करते हैं। पारा संघ अध्यक्ष प्रकाश तलेसरा व परिषद अध्यक्ष दिलीप कोठारी ने बताता कि नगर में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी पर्युषण पर्व के आठ दिनों में धर्म संबंधी विशेष क्रियाओं के साथ जप, तप किए गए।

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