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देखरेख का अभाव:मोद सागर : नहरें नहीं की साफ, कई स्थानों पर धंसी

राणापुरएक महीने पहले
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  • 38 साल पहले बनाई गई थी नहरें, देखरेख के अभाव में हो गई खराब

(हरेंद्र डोशी). रबी सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब 38 साल पहले बनाई गई योजना का लाभ अब किसानों को नहीं मिल पा रहा। इसके लिए मोद सागर तालाब बनने के बाद यहां से 5 गांवों की 800 हेक्टेयर जमीन को सींचने के लिए नहर का निर्माण किया गया था, जो अब कई जगह से टूट चुकी है। किसानों की माने तो करीब 10 वर्षों से नहरों में पानी नहीं आया।

मोद सागर तालाब से राणापुर विकासखंड के ग्राम बन, भूतखेड़ी, पुवाला, छायन सेमलखेड़ी और उदयगढ़ ब्लॉक (आलीराजपुर) के ग्राम जाम्बुखेड़ा तक वर्ष 1982 में करीब 14 किमी नहर बनाई गई थी। शुरुआत के करीब 20 साल तो किसानों ने इन नहरों के माध्यम से पानी लिया, लेकिन अब कई किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। देखरेख के अभाव में नहरों की दुर्गती हो गई।

आलम यह है कि जिन किसानों के खेतों में से नहर गुजरती थी वहां जब पानी आना बंद हुआ तो उन्होंने नहर बंद कर वहां भी खेती शुरू कर दी। करीब दस साल पहले जो किसान रबी और खरीफ दोनों फसल लेते थे, वे अब सिर्फ खरीफ की फसल ही ले पा रहे हैं।

पानी नहीं आने से नहर बंद कर जमीन पर कर रहे खेती

भूतखेड़ी के पांगला वालचंद, गुलाब, मीठु, केसू भाई ने कहा भूतखेड़ी के आधे भाग में 10 साल से नहर का पानी नहीं आ रहा है। हम रबी फसल नहीं ले पा रहें हैं। ग्राम पुवाला के मुनसिंह हेमला पुवाला, सागरसिंह नेमसिंह, गेंदिया, मड़िया, केशरसिंह व सागर ने कहा नहर का पानी नहीं आ रहा है। कई किसानों ने नहर बंद कर उस जमीन पर खेती चालू कर दी है।

6 साल पहले की गई थी नहरों की मरम्मत

छह साल पहले मनरेगा में राशि स्वीकृत हुई थी। तब जल संसाधन विभाग ने फीलिंग वाले भाग में पक्का निर्माण किया था। लेकिन भूतखेड़ी नर्सरी के सामने बनाई पक्की नहर दो साल पहले बारिश में बह गई। जिसकी रिपेयरिंग आज तक नहीं की गई। इसके चलते भूतखेड़ी और पुवाला में किसानों को पानी मिल रहा था उन्हें भी दो साल से नहीं मिल रहा है। छायन सेमलखेड़ी को 20 साल से पानी नहीं मिल पाया है।

जल समिति को जिम्मेदारी देने के बाद बिगड़ी स्थिति

शुरुआत में नहरों की देखरेख जल संसाधन विभाग कर रहा था। इसके अलावा बांध का निर्माण पूरा हो जाने के बाद टाइम कीपर और सब इंजीनियर संपूर्ण नहर पर नजर रखते थे और किसानों को जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध कराते थे। लेकिन करीब 15 साल पहले देखरेख की जवाबदारी जल समितियों को दी गई थी। इसके बाद से ही नहरों की सुध नहीं ली। आज स्थिति यह है कि नहर नजर ही नहीं आ रही।

जहां पहुंच रहा पानी, वहां से रास्ते में ही चोरी हो जाता है

नहर का पानी ग्राम बन में पहुंचता है, लेकिन कम दबाव के साथ। क्योंकि रास्ते में से ही कई किसान मोटर पंप लगाकर इसकी चोरी कर सिंचाई कर लेते हैं। जबकि विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।

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