JNKV में व्यावसायिक खेती का सिखाते हैं गुर:MP की सबसे बड़ी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में 10 से दो महीने की मिलती है ट्रेनिंग

जबलपुरएक वर्ष पहले

खेती-किसानी रोजगार का प्रमुख माध्यम भी बन सकता है। इससे कमाई हो सकती है। इससे जुड़े इनोवेशन कर आप बड़े व्यवसायी भी बन सकते हैं। इसमें मदद करती है एमपी की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी में संचालित कृषि व्यवसाय प्रबंधन संस्थान। यहां 10 दिन से दो महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उनके इनोवेशन या नए आइडिया को मुकाम तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। यहां लोगों को कृषि से संबंधित व्यवसाय शुरू करने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। भास्कर खेती-किसानी सीरीज-15 में आइए जानते हैं एक्सपर्ट डॉ. सुनील बी.आर. नाहतकर, डायरेक्टर (इंस्टीट्यूट ऑफ एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, जेएनकेवी) से…

एग्री क्लीनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर्स योजना

18 से 60 वर्ष की उम्र का कोई भी कृषि स्नातक, इंटरमीडिएट या समुदायिक विज्ञान, जैव प्रोद्योगिकी, जैविक विज्ञान, जंतु विज्ञान आदि विषय से स्नातक इसका नि:शुल्क प्रशिक्षण ले सकते हैं। नाबार्ड के सहयोग से संचालित 45 से दो माह के प्रशिक्षण में उनके व्यवसाय जैसे डेयरी, मधुमक्खी पालन, मशरूम, मुर्गी, बकरी पालन आदि का डीपीआर तैयार कराते है।

उद्यम का प्रशिक्षण देकर डीपीआर तैयार कराने से लेकर सब्सिडी पर लोन भी दिलाते हैं।
उद्यम का प्रशिक्षण देकर डीपीआर तैयार कराने से लेकर सब्सिडी पर लोन भी दिलाते हैं।

फिर इसका प्रजेटेंशन बैंक के अधिकारियों के सामने करते हैं। प्रशिक्षण अवधि के बाद एक सर्टिफिकेट मैनेज हैदराबाद द्वारा दिया जाता है। इससे उद्यम स्थापित करने वाले को लोन पर 36 से 44 प्रतिशत की सब्सिडी मिलती है। लोन की सीमा पांच लाख से 25 लाख होता है। यदि कोई पांच के ग्रुप में जाए तो एक करोड़ तक मिल सकता है। तीन प्रशिक्षण बैच में अब तक 65 लोग शामिल हुए थे। इसमें 25 अपना उद्यम स्थापित चुके हैं।

जवाहर राबी योजना

कृषि मंत्रालय से प्रदत्त वित्तीय सहायता से संचालित इस प्रशिक्षण के लिए पूरे देश से आवेदन मांगे जाते हैं। जवाहर राबी में खेती-किसानों से जुड़े ऐसे यूनिक आइडिया को वित्तीय मदद पहुंचाई जाती, जो किसानों के लिए उपयोगी हो सकती हो। इसे जवाहर राबी की प्रेरणा योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए तक की वित्तीय मदद दो महीने के प्रशिक्षण के बाद मुहैया कराई जाती है।

जवाहर राबी की साकार योजना में इस तरह इनोवेशन को 25 लाख तक की ग्रांट दो महीने के प्रशिक्षण के बाद दिलाने की प्रक्रिया की जाती है।
जवाहर राबी की साकार योजना में इस तरह इनोवेशन को 25 लाख तक की ग्रांट दो महीने के प्रशिक्षण के बाद दिलाने की प्रक्रिया की जाती है।

वहीं यदि किसी ने यूनिक आईडिया पर पहले से काम करते हुए कुछ तैयार कर लिया है, तो उसे जवाहर राबी की साकार योजना के अंतर्गत पांच से 25 लाख रुपए की वित्तीय मदद दिलाई जाती है। अब तक 85 लोग इस तरह का ट्रेनिंग कर चुके हैं। इसमें 23 लोगों को 2.06 करोड़ रुपए का ग्रांट मिल चुका है।

बिजनेस प्लानिंग एंड डेवलेपमेंट यूनिट

कृषि आधारित प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना बिजनेस कैसे शुरू करें इसके बारे में सिखाया जाता है। यह पूरी तरह से स्ववित्तपोषित है। पांच से 10 दिन के प्रशिक्षण में इतने ही हजार रुपए रहने-खाने के एवज में लिए जाते हैं। कोविड में ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया। तब 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज किया गया था।

पूरे देश के लोग इस प्रशिक्षण में शामिल हो सकते हैं। अब तक 700 प्रशिक्षण ले चुके लोगों में 150 अपना बिजनेस स्थापित कर चुके हैं। इस प्रशिक्षण में लोगों को तकनीकी दृष्टि से उत्पादन प्रक्रिया बताते हैं। वे अपने उत्पाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग करें। नेटवर्किंग, मार्केटिंग, और मार्केट लिंकेज डेवलेप करना बताया जाता है।

जैसे मशरूम उत्पादन के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है मार्केटिंग न कर पाना। ऐसे में हम उन्हें बताते हैं कि वे अपने उत्पाद को पाउडर बनाकर, पापड़ बनाकर, आचार बनाकर बेच सकते हैं। पहले से स्थापित कर चुके उद्यमी से उन्हें कनेक्ट करा देते हैं। रॉ मटेरियल वे लोग खरीद लेते हैं। प्रशिक्षण के बाद इसका प्रमाण पत्र दिया जाता है। इसमें मधुमक्खी, मशरूम की खेती, जैविक खाद, बीज उत्पादन, उद्यानिकी आदि की जानकारी दी जाती है।

भास्कर खेती-किसानी एक्सपर्ट सीरीज में अगली स्टोरी होगी कि खीरा से दो महीने में किसान हो सकते हैं मालामाल। यदि आपका कोई सवाल हो तो इस नंबर 9406575355 वॉट्सऐप पर सकते हैं।

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