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  • 500 Injections Needed Daily, One To One; Many Private Hospitals Do Not Have A Single Dose, The Same Situation In Government

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रेमडेसिविर इंजेक्शन खत्म, शहर में हाहाकार:500 इंजेक्शन की जरूरत रोज, एक-एक के लिए मारामारी; कई निजी अस्पतालों में एक भी डोज नहीं, सरकारी में भी यही स्थिति

जबलपुर11 दिन पहले
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद एक बार फिर रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड बढ़ गई है। हालात यह हैं कि बुधवार को जबलपुर में इंजेक्शन्स खत्म हो गए और हाहाकार मच गया। इंजेक्शन को बनाने वाली कंपनीज ने कोरोना के मामले कम होने के बाद प्रोडक्शन घटा दिया था, लेकिन पिछले कुछ ही दिनों में अचानक केस बढ़ने की वजह से प्रोडक्शन, डिमांड को पूरा नहीं कर पा रहा है। इसी के चलते न सिर्फ जबलपुर, बल्कि कई शहरों में यह स्थिति बनी हुई है।

जबलपुर में रोजाना अब 250 से ज्यादा केस आ रहे हैं। इनमें कई मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती होते हैं। इन्हें ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। वहीं शहर के अस्पतालों में रोजना 500 से ज्यादा इंजेक्शन्स की डिमांड है, लेकिन इंजेक्शन्स न होने के चलते मरीज के परिजन बेहद परेशान हैं। मरीजों की जान पर बन आई है। हालाँकि प्रशासन का कहना है कि जितनी जरूरत है, उतने इंजेक्शन्स मरीजों तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है। इंजेक्शन्स की मॉनीटरिंग के लिए टीम भी लगाई गई है।

क्यों जरूरी है रेमडेसिविर

डॉक्टर्स का कहना है कि रेमडेसिविर एक लाइफ सेविंग इजेक्शन है। विक्टोरिया हॉस्पिटल में कोरोना वार्ड में मरीजों का इलाज कर रहे डॉ. अालोक श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना के वे मरीज जिनमें लंग्स इंफेक्शन बढ़ता है, उन्हें यह लगाना बेहद जरूरी है। शरीर में पहुँचने के बाद यह इंजेक्शन वायरल लोड तेजी से कम करता है। कुछ मरीजों में इसके साइड इफैक्ट्स भी आते हैं, जो सामान्य हैं।

एक मरीज को 6 डोज

  • 1 मरीज को रेमडेसिविर के 6 डोज दिए जाते हैं।
  • पहले दिन 2 डोज दिए जाते हैं, जिसमें 200 मिलीग्राम दवा होती है।
  • दूसरे से छठवें दिन तक 100 मिग्रा यानी 1 डोज दी जाती है।

परिजन परेशान, कैसे हो इंतजाम ?
अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन बुधवार को अस्पतालों के चक्कर काटते नजर आए। पहुँच और सिफारिशों के बाद भी इंजेक्शन का इंतजाम नहीं हो सका। होता भी कैसे, जब शहर में इंजेक्शन थे ही नहीं।
डिमांड पर नजर रखने लगाए पटवारी
प्रशासन द्वारा निजी अस्पतालों की डिमांड पर नजर रखने के लिए पटवारियों को लगाया गया है, ताकि जितनी जरूरत हो, उतने ही डोज दिए जाएँ। इंजेक्शन की सप्लाई और डिमांड पर मॉनीटरिंग के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए गए हैं। हालाँकि इसके बाद भी इंजेक्शन की डिमांड और सप्लाई पर नियंत्रण उतना प्रभावशाली नहीं नजर आ रहा है।
^जिन भी डिपो से इंजेक्शन की सप्लाई हो रही थी, अभी फिलहाल बंद है। हमारे पास जो स्टॉक था, उसे अस्पतालों में उपलब्ध करा दिया गया है। कमी सभी शहरों में है। हमने डिमांड भेजी है, जल्द ही नए डाेज आ सकते हैं।
-आशीष पाण्डेय, अपर कलेक्टर एवं नोडल अधिकारी

कंट्रोल रूम: बेड स्टेटस जानने सबसे ज्यादा आए काॅल
प्रशासन द्वारा बनाए गए कोविड कंट्रोल रूम में राेजाना 400 से 500 कॉल्स का ट्रांजेक्शन हो रहा है। बुधवार को वैक्सीनेशन से जुड़े 125, सेनिटाइजेशन से जुड़े 3, कोरोना से हो रही असुविधा के लिए 28, टेलीमेडिसिन के लिए 54, डिस्चार्ज के लिए 3, बेड की स्थिति जानने 138 कॉल आए। इसके अलावा भी कई चीजों के लिए फोन किए गए। शहर के अस्पतालों में वर्तमान में 137 वेंटीलेटर हैं। वहीं लगभग 1200 ऑक्सीजन बेड, बिना ऑक्सीजन के 100 बेड और 450 बेड आईसीयू वाले मौजूद हैं।
मनमोहन नगर में मरीजों को भर्ती करने की तैयारी; कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए मनमोहन नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए तैयार कर दिया गया है। सीएमएचओ डॉ. रत्नेश कुरारिया ने बताया कि स्टाफ एवं चिकित्सकों की नियुक्ति की जा रही है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जारी किए विशेष निर्देश

कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार में काम आने वाले 'रेमडेसिविर इंजेक्शन' के उपयोग की ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा 'रिस्ट्रिक्टेड इमरजेंसी यूज़' के लिए ही अनुमति दी गई है। निर्देश में कहा गया है कि कोरोना का इलाज कर रहे चिकित्सक द्वारा अपने प्रिस्क्रिप्शन पर उन इमरजेंसी परिस्थितियों का उल्लेख किया जाए, जिनमें यह इंजेक्शन दिया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र; मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन द्वारा रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी और ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि इंजेक्शन की कमी के चलते मरीज परेशान हैं। जल्द से जल्द इसकी आपूर्ति कराई जाए।

एक्सपायर्ड इंजेक्शन भी बेचने तैयार
सूत्रों के अनुसार रेमडेसिविर इंजेक्शन की शॉर्टेज के चलते एक्सपाइरी डेट के इंजेक्शन भी दुकानदार बेचने तैयार हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि फरवरी और मार्च में एक्सपायर हुए इंजेक्शन्स डॉक्टरों की सलाह पर उपयोग किए जा रहे हैं।

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