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  • 6 Years Ago, Lamheta Was Decorated With The Purpose Of Tourism By The Responsible People, But In 6 Months It Was Shelved.

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नगर परिषद की लापरवाही:6 साल पहले लम्हेटा को टूरिज्म के उद्देश्य से सजाया-सँवारा जिम्मेदारों ने, लेकिन 6 माह में ही इसको ठिकाने लगा दिया

जबलपुरएक महीने पहले
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  • पर्यटन विकास निगम की कोशिश को चौपट कर दिया नगर परिषद ने, डोम बनाए वह गिरने की कगार पर, पेवर ब्लॉक उखड़कर बिखरे, बैंच टूटकर बिखर गईं, सब कुछ वीरान

भेड़ाघाट, न्यू भेड़ाघाट में जैसी सुंदरता है ठीक उसी तरह के मनोरम, असीम सुंदरता से कुदरत ने लम्हेटाघाट को भी नवाजा है। यहाँ नर्मदा सबसे अधिक गहराई के साथ बहती हैं। सवा लाख साल पुराने जलोदरों की शुरुआत यहीं से होती है। पर्यटन विकास निगम ने इस नैसर्गिक सुंदरता को समझा और 6 साल पहले लम्हेटा में डोम बनाए गए।

अलग-अलग जगहों पर बैंच लगाईं। इसी तरह पेवर ब्लॉक लगाए और कई तरह के विकास कार्य किये गये। इन विकास कार्यों की देखरेख बाद में भेड़ाघाट नगर परिषद को करनी थी। कुछ माह तो ऐसा लगा कि जैसे सब कुछ ठीक रहेगा, लेकिन परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने इन विकास कार्यों को अनदेखी भरे रवैये में 6 माह के अंदर ही ठिकाने लगा दिया। जिम्मेदारों की अनदेखी से लम्हेटा का डेवलपमेंट पूरी तरह से बदहाली का शिकार हो गया।

अब यहाँ पर हर तरफ टूटी बैंच के टुकड़े, बिखरे पेवर ब्लॉक, टाॅयलेट की टूटी हुईं सीटें और आसपास सिंगल यूज पाॅलीथिन, प्लास्टिक के अलावा कुछ भी सलीके का नहीं है। जिसे प्रकृति ने प्रचुर मात्रा में वरदान दिया उसे अधिकारियों के अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने से सब कुछ बिखरा-बिखरा सा कर दिया है।

सफाई कभी होती है, कभी कर्मी गायब
नर्मदा के सबसे अहम घाटों में से यह एक है। यहाँ नियमित रूप से सफाई होनी चाहिए। 4 कर्मचारी नगर परिषद ने तैनात किये हैं, पर ये कभी सफाई करते हैं तो कभी गायब हो जाते हैं। जहाँ कचरा देखकर आदमी का मन खिन्न हो जाता है वहाँ पर हर तरफ पाॅलीथिन के टुकड़े बिखरे हुये हैं। सफाई कर्मी नियमित सफाई करें तो कई तरह की अव्यवस्थाओं के बीच प्राकृतिक सुंदरता में कहीं कमी नहीं है, लेकिन हालत यह है कि सफाई भी ढँग से नहीं हो पा रही है।

अनेकों प्लान, पर दशा नहीं बदली
भेड़ाघाट, लम्हेटा और आसपास के पर्यटन स्थलों में संसाधन, सुविधाएँ बढ़ाने प्लान तो कई बने, पर इस पर गंभीरता पूर्वक अमल कभी नहीं हो सका। जो भी कुछ विकास कार्य बीते सालों में हुये उनको निर्माण के कुछ माह बाद ही चौपट कर दिया गया है। कभी इन क्षेत्रों को टूरिस्ट सर्किट से जोड़ने का वादा, कभी कुछ और दावे, लेकिन हालात नहीं बदल सके।

क्या है देखने लायक

  • नर्मदा की शांत असीमित गहराई।
  • शनि कुण्ड, इन्द्र गया कुण्ड, ऐतिहासिक सूर्य मंदिर।
  • काले-नीले पत्थरों के बीच नर्मदा का बहाव ।
  • घाट पर मानवीय हस्तक्षेप कम है जो आकर्षित करता है ।
  • यहाँ तैरना खतरनाक है, दूर से दर्शन ही सबसे बेहतर माना गया।
  • नाव द्वारा नर्मदा के उस पार लम्हेटी, न्यू भेड़ाघाट जा सकते हैं ।

जहाँ कमी वहाँ तुरंत सुधार होगा
हम लगातार लम्हेटा में भी भेड़ाघाट की तरह ही नजर रखते हैं। बारिश के समय जो हिस्सा थोड़ा क्षतिग्रस्त हुआ था उसमें सुधार किया जा रहा है। जहाँ कमी है उसको पूरी तरह ध्यान देकर दुरुस्त बनाया जाएगा। सफाई भी नियमित की जा रही है।
-एके रावत, मुख्य अधिकारी भेड़ाघाट नगर परिषद

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