आचार्य विद्यासागर का शहपुरा की ओर विहार:चातुर्मास के लिए जबलपुर के दयोदय में रुके थे आचार्य, दमोह के कुंडलपुर रवाना

जबलपुर23 दिन पहले
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चातुर्मास के बाद दयोदय से आचार्य विद्यासागर का शहपुरा के लिए विहार। - Dainik Bhaskar
चातुर्मास के बाद दयोदय से आचार्य विद्यासागर का शहपुरा के लिए विहार।

आचार्य विद्यासागर चातुर्मास की अवधि जबलपुर के दयोदय में गुजारने के बाद 6 अक्टूबर को शहपुरा के लिए निकल गए। तेवर में रात्रि विश्राम करने के बाद वे रविवार सुबह शहपुरा के लिए विहार कर गए। वे दमोह के कुंडलपुर के लिए रवाना हो गए। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी।

आचार्य विद्यासागर के पावर चरण जबलपुर की धरा पर 23 जुलाई को पड़ा था। तिलवाराघाट के दयोदय तीर्थ में उन्होंने अपना 54वां चातुर्मास प्रवास किया। चार महीने में उन्होंने अपनी अमृतवाणी से लगातार जीवन की शिक्षाएं दी। इस दौरान देश के गृहमंत्री अमित शाह, सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रह्लाद पटेल, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, सांसद राकेश सिंह, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा सहित कई लोग आशीर्वाद लेने पहुंचे।

आचार्य विद्यासागर ने शहपुरा की ओर किया विहार।
आचार्य विद्यासागर ने शहपुरा की ओर किया विहार।

भारत की पवित्र भूमि में जन्म से बड़ा पुण्य और क्या

15 अगस्त को आचार्य विद्यासागर ने अपने प्रवचन के दौरान राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ दी। बोले कि हमारा भारत देश कर्मभूमि का क्षेत्र है। हम इस महान कर्मभूमि में बैठे हैं। इसी भारत भूमि में हमारे तीर्थंकरों ने विहार किया। ऐसी पवित्र भूमि में हमारा जन्म हुआ। इससे बढ़कर पुण्य और क्या हो सकता है। देश से बड़ा कोई नहीं।

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14 अगस्त को 28 गृहस्थ ने छुल्लक दीक्षा लेकर सन्यास मार्ग पर निकल पड़े

चातुर्मास के दौरान 14 अगस्त को दयोदय में 28 गृहस्थ ने सांसारिक मोह-माया त्यागते हुए छुल्लक दीक्षा लेकर सन्यास की राह पर निकल पड़े। इसमें आईएएस राहुल जैन के पिता मल्ला कुमार जैन ने छुल्लक दीक्षा लेकर छुल्लक तत्व सागर बन गए। इसके अलावा गढ़ा निवासी निर्मलचंद, लम्हेटा निवासी मुन्ना और चमन उजयामूरी सहित 28 लोगों को छुल्लक की दीक्षा दी थी।

आचार्य विद्यासागर के चातुर्मास में दिए गए प्रवचन के अंश-

  • दुर्लभ वस्तु भाग्य से मिलती है, लेकिन नशीली वस्तु जब भाग्य फूटता है तब मिलती है।
  • समय काल को कोई नही पकड़ सकता।
  • आलोचना से लोचन खुलते हैं।
  • देश को अंको की शिक्षा नहीं अनुभव की शिक्षा की आवश्यकता है।
  • लालची को नर्क गति मिलती है।
  • हमें चरण नहीं आचरण छूना चाहिए।
  • भोजन आरोग्य वर्धक वैराग्य वर्धक होना चाहिए।
  • भारत की शिक्षा बोनी नहीं बोने योग्य है।
  • राजा राणा छत्रपति हथिन के असवार, मरना सबको एक दिन अपनी-अपनी बार।
  • व्यानुसारी आयो और आयनुसारी व्ययो।
  • अपने कर्मों को स्वयं भोगना पड़ता है।
  • जीवन में पुरुषार्थ आवश्यक है।
  • योग शुद्धि से उपयोग शुद्धि होती है।
  • साधना से कष्ट दूर होते हैं।
  • जब मन का भार उतर जाए तो आभार मानो।
  • आत्म लक्षण हमेशा विलक्षण होते हैं।
  • स्वाध्याय में आत्म चिंतन से पुण्य संग्रहित होते हैं।
  • अपने लिए तो सब रोते हैं जो दूसरों के लिए रोते हैं वही धर्म है।
  • बैरी के प्रति बैर भाव ना हो यह पूर्व जन्मों का कर्म है।
  • आरोग्य को सुधारो तो वैराग्य मिल जाएगा।
  • सैनिक मृत्युंजय बन कर देश की रक्षा करते हैं।
  • अष्ट कर्म आपके बुलाये हुए अतिथि हैं।

पूर्णायु आयुर्वेद चिकित्सालय का आचार्य ने किया शिलान्यास

दयोदय में ही पूर्णायु आयुर्वेदिक चिकित्सालय एवं अनुसंधान विद्यापीठ का शिलान्यास इस दौरान आचार्य विद्यासागर की मौजूदगी में हुआ। सूरत से पहुंचे राजा भैया और मुम्बई से पहुंचे प्रभात जैन, नवीन जैन व प्रशांत जैन ने किया। इस आयुर्वेद महाविद्यालय के आर्किटेक्ट कनाडा के स्नेहिल जैन और दुबई के बहाल चंद कुलकर्णी भी पहुंचे थे। वास्तुविद स्नेहिल जैन के मुताबिक यह पूरा भवन पुरातन वास्तु कला को ध्यान में रखकर तैयार की जायगी, इस वास्तु शिल्प में पत्थर और चूने का उपयोग ही किया जाएगा। कहीं भी लोहे का उपयोग नहीं किया जाएगा। देश में मौजूदा समय में हजारों वर्षों से इतिहास संजोकर हमारे सामने खड़ी हैं, वे सभी इसी पुरातन तरीके से निर्मित हुई हैं। पूर्णायु आयुर्वेद विद्यापीठ और 800 बिस्तरों का आयुर्वेद चिकित्सालय देश का सबसे बड़ा आयुर्वेद का केंद्र होगा। यहां पारंपरिक आयुर्वेदिक विधि से रोगों का इलाज किया जाएगा। 300 बिस्तर असहाय और गरीब मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।

आचार्य विद्यासागर शहपुरा ें पंचकल्याण महोत्सव में हो सकते हैं शामिल।
आचार्य विद्यासागर शहपुरा ें पंचकल्याण महोत्सव में हो सकते हैं शामिल।

शहपुरा में पंचकल्याणक महोत्सव में दे सकते हैं आशीर्वाद

आचार्य विद्यासागर चातुर्मास की समाप्ति के बाद दयोदय से निकल गए। वे शहपुरा-भिटौनी की दिशा में विहार कर रहे हैं। उम्मीद है कि वे 10 नवंबर से 16 नवंबर तक शहपुरा में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव में आशीर्वाद प्रदान करेंगे। दरअसल अनियमित विहारी, आचार्य के विहार की कोई भी जानकारी किसी को नहीं होती। इस कारण दिशा के अनुसार ही इस तरह की संभावना व्यक्त की जा रही है। आचार्य दमोह जिले के कुंडलपुर में जा सकते हैं। यहां पाषाण के विशाल जिनालय का निर्माण किया गया है, इसका प्राण प्रतिष्ठा समारोह भी फरवरी में संभावित है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु चल रहे साथ

आचार्य के दयोदय तीर्थ से गमन की सूचना मिलते ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु संघ के पीछे-पीछे नम आंखों से विहार करने लगे। आहार के पूर्व आचार्य ने संक्षिप्त उद्बोधन में कहा , चातुर्मास तो पहले भी जबलपुर में हुए हैं, दयोदय में भी हुए हैं और मढिया जी में भी हुए हैं, लेकिन यह चातुर्मास बहुत आनंददायक रहा। धर्म ध्यान हुआ, प्रतिदिन श्रद्धालुओं से आंगन भरा रहता था। आज भी आंगन भरा हुआ है। आप इसी तरह धार्मिक वातावरण और धर्म ध्यान में डूबे रहो यही आशीर्वाद है। आचार्य के साथ मुनि महाराज, छूल्लक महाराज, ब्रह्मचारी भैया, ब्रह्मचारिणी दीदी, और ज्ञानोदय विद्यापीठ की शिक्षक दीदी सहित हजारों श्रद्धालु भी विहार कर रहे हैं।

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