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33 दिन बाद स्टेशन पर घूमती मिली प्रिया:जबलपुर स्टेशन पर मिली, गोद लेने वाले मौसा-मौसी नहीं बन पाए ‘नंद’ और ‘यशोदा’

जबलपुर7 दिन पहले
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गोसलपुर के शांतिनगर से 33 दिन पहले लापता 12 वर्षीय प्रिया जबलपुर स्टेशन पर घूमते हुए मिली। - Dainik Bhaskar
गोसलपुर के शांतिनगर से 33 दिन पहले लापता 12 वर्षीय प्रिया जबलपुर स्टेशन पर घूमते हुए मिली।

गोसलपुर के कछपुरा गांव से गायब हुई 12 साल की बालिका प्रिया काछी जबलपुर स्टेशन पर बुधवार 9 जून को अकेली घूमती हुई मिल गई। प्रिया 6 मई की शाम चार बजे के लगभग रहस्यमय ढंग से गायब हो गई थी। 33 दिन प्रिया दो महिलाओं की सरपरस्ती में सुरक्षित रही। उसे गोद लेने वाले मौसा-मौसी ‘नंद’ और ‘यशोदा’ नहीं बन पाए। उससे घर के काम लेते थे। सब्जी बिकवाते थे। मौसा ने एक दिन पहले प्रिया पर हाथ उठाया था। सीडब्ल्यूसी ने काउंसलिंग के बाद प्रिया को उसके असल पिता धमकी निवासी बृजलाल और मां लक्ष्मी के साथ भेज दिया।

जीआरपी टीआई सुनील नेमा ने बताया कि प्रिया के गायब होने की तस्वीर ग्रुप में मिली थी। उसी के हुलिया से मिलती-जुलती बालिका को चार दिन पहले जबलपुर मुख्य स्टेशन से बाल निकेतन भिजवाया गया था। बाल निकेतन में पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम प्रिया काछी बताया। बुधवार को बाल निकेतन से इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद जीआरपी टीआई ने इसकी सूचना जबलपुर के पुलिस अधिकारियों और गोसलपुर टीआई को दी।

6 मई को गायब हो गई थी प्रिया

शांतिनगर गोसलपुर निवासी सूरज काछी ने रिश्तेदार की बेटी प्रिया काछी (12) को 11 साल पहले गोद लिया था। मौसी से मां बनी सुनीता के मुताबिक 6 मई की शाम 4 बजे प्रिया घर से अचानक लापता हो गई। 3 घंटे तक परिजन उसे कॉलोनी में ढूंढ़ते रहे, लेकिन पता नहीं चल पाया। 7 बजे पिता सूरज गोसलपुर थाने पहुंचा और अपहरण का प्रकरण दर्ज कराया। हैरानी की बात ये थी कि प्रिया को घर से या गांव से निकलते हुए 1200 की आबादी वाले गांव में किसी ने नहीं देखा।

परिजनों के साथ पुलिस ने भी ली राहत की सांस

पिछले एक महीने से भी अधिक समय से लापता प्रिया काछी की दस्तयाबी पुलिस के लिए भी मुश्किल साबित हो रहा था। एसपी ने उसकी दस्तयाबी पर 10 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। रात में जैसे ही पुलिस को प्रिया के मिलने की खबर पहुंची तो उसने घरवालों को भी इसके बारे में अवगत कराया। गोसलपुर टीआई संजय भलावी ने बताया कि गुरुवार 10 जून को प्रिया को सीडब्ल्यूसी के सामने पेश किया गया। वहां उसकी काउंसलिंग की गई। प्रिया ने बताया कि उसे मौसा-मौसी के घर नहीं रहना। इसके बाद उसके असल मां-पिता के साथ भेज दिया गया।

प्रिया काछी को कपड़े और गिफ्ट देकर पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द किया।
प्रिया काछी को कपड़े और गिफ्ट देकर पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द किया।

33 दिन की प्रिया ने ये बताई कहानी

प्रिया काछी ने बताया कि उसके दत्तक पिता सूरज काछी 5 जून को झाडू पोछा की बात डांट मार दिया था। 6 जून को जब उसकी मौसी सो गई तो वह दोपहर 3 बजे घर से बिना बताये पैदल खेतों के रास्ते और रेलवे पटरी पकड़ कर सिहोरा पहुंच गई। रेलवे स्टेशन में एक बूढी अम्मा जिन्हें कम दिखाई देता था के साथ ट्रेन में बैठकर कटनी चली गयी। रात में बूढी अम्मा ने उसे खाना खिलाया। अगले दिन सुबह ट्रेन में बूढी अम्मा के साथ जबलपुर स्टेशन आ गई। बूढी अम्मा के साथ कुछ दिन तक स्टेशन और ट्रेन में आने जाने वाले लोगों से भीख मांगती थी। बूढी अम्मा उसे खाना खिलाती थी और खुद भी खाती थी।

शारदा नाम की महिला के साथ रहने लगी

एक दिन उसे स्टेशन के बाहर पूनम नाम की 5 साल की बच्ची खेलते हुए मिली। वह भी उसके खेलने लगी। उसे अच्छा लगा तो वह बूढी अम्मा का साथ छोड़कर पूनम के साथ उसकी मां शारदा के पास चली गई। वहां 2 सप्ताह तक रही। सभी उसे खाना देते थे। कोई उसे परेशान नहीं करता था। 4 दिन पहले पुलिस वाले आए और पूछताछ के बाद उसे बाल निकेतन मे दाखिल करा दिए थे।

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