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  • After The Death Of The Woman's Husband And Two Brothers in law, The Accused Took The Compensation For The Canal In A Fake Manner, Filed An FIR After 16 Years.

जबलपुर में जेठ-भतीजा निकले जालसाज:महिला के पति और दो जेठ की मौत के बाद आराेपियों ने फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कर ले लिया नहर का मुआवजा, 16 साल बाद दर्ज कराई FIR

जबलपुर2 महीने पहले
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पनागर थाने में महिला ने जेठ व भतीजे के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर। - Dainik Bhaskar
पनागर थाने में महिला ने जेठ व भतीजे के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर।

जबलपुर में एक महिला के साथ उसके ही जेठ और भतीजे ने जालसाजी की। महिला के पति और दो जेठों की मौत के बाद आरोपियों ने नहर विभाग से मिला मुआवजा फर्जी हस्ताक्षर कर हड़प गए। आरोपियों की पोल 16 साल बाद खुली। महिला ने आरोपियों के खिलाफ पनागर थाने में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा का प्रकरण दर्ज कराया है।

पनागर पुलिस के अनुसार न्यू शोभापुर कॉलोनी रांझी निवासी जाहिदा बेगम (63) के परिवार की महगवां में कृषि भूमि है। उसके पति जहीन खान की 2005 में, जेठ सोहराव खान की 2000में और अफैजुल रहमान की 2013 निधन हो चुका है। एक अन्य जेठ शब्बीर खान अभी जिंदा है। पति व जेठों की मौत के बाद से शब्बीर खान ही उक्त सम्मिलित कृषि भूमि की देखभाल कर रहा है।

बरगी नहर निकली है पीड़िता के खेत से।
बरगी नहर निकली है पीड़िता के खेत से।

0.56 हेक्टेयर भूमि नहर में चला गया

जाहिदा के मुताबिक वर्ष 2002-03 में सम्मिलित कृषि भूमि से 0.56 हेक्टेयर भूमि नहर निर्माण में चला गया। नहर विभाग ने सभी के नाम पर अलग-अलग मुआवजा बनाया। 2005 में उसके पति के नाम पर 80 हजार रुपए का मुआवजा चेक बना था। जिसे फर्जी हस्ताक्षर कर 11 मई 2005 को शब्बीर खान और उसके बेटे इमरान खान ने हड़प लिया। उसके जेठ के नाम पर जारी मुआवजा राशि भी दोनाें हड़प गए।

नहर विभाग से कभी नोटिस जारी नहीं हुआ

जाहिदा ने बताया कि नहर विभाग के रिकॉर्ड में नोटिस जारी कर इसके बारे में बताया जाना दर्शाया गया है, लेकिन कभी उसे ये मिले नहीं। उसके जेठ शब्बीद खान ने बेटे के साथ मिलकर नोटिस को आने ही नहीं दिया। 16 साल बाद उसे जेठ और भतीजे की जालसाजी का पता चला। तब वह पनागर थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंची थी।

ओमती में भी दर्ज है फर्जीवाड़ा का मामला

शब्बीर काफी शातिर जालसाज है। उसके खिलाफ ओमती थाने में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा करने का प्रकरण दर्ज है। ये प्रकरण अभी न्यायालय में लंबित है। तब सब्बीर ने महिला पुष्पलता पवार की 24 अक्टूबर 1993 में मौत के बाद नगीमा बेगम को खड़ा कर उसकी जमीन बेच दी थी। नगीमा बेगम को ही उसने पुष्पलता बना दिया था।

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