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तकनीक का कमाल, बढ़ेगी रफ्तार, घटेंगे हादसे:WCR ने 220 थिकवेब स्विच लगाए, रफ्तार 160 किमी करने की तैयारी, ट्रैक के क्राॅसिंग प्वाइंट पर ट्रेन के पहिए नहीं होंगे बेपटरी

जबलपुर16 दिन पहले
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रेल पटरी पर रेड में दिख रहा थिकवेब स्विच है। पटरियों की दिशा बदलने वाले प्वाइंट पर इसे लगाया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
रेल पटरी पर रेड में दिख रहा थिकवेब स्विच है। पटरियों की दिशा बदलने वाले प्वाइंट पर इसे लगाया जा रहा है।
  • दक्षिण अफ्रीका में इस तकनीक का पहले से हो रहा प्रयोग, अब देश भर में सामान्य प्वाइंट की जगह लगाई जा रही थिकवेब स्विच
  • एक थिकवेब स्विच लगाने में लगभग ढाई से तीन घंटे का ब्लॉक के साथ 30 से 40 कर्मियों की पड़ती है जरूरत

पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) में ट्रेनों को की स्पीड बढ़ाने के लिए दक्षिण अफ्रीका की तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। अब ट्रैक के क्राॅसिंग प्वाइंट पर सामान्य प्वाइंट की जगह थिकवेब स्विच लगाया जा रहा है। WCR को 150 थिकवेब स्विच लगाने का टारगेट मिला था, लेकिन उसने 220 लगा दिए है। एक स्विच लगाने में ढाई से तीन घंटे का ब्लॉक लेना पड़ता है। वहीं 35 से 40 कर्मियों की जरूरत पड़ती है। इसका बड़ा फायदा ये है कि इससे ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी की जा सकेगी। वहीं रेल के पहिए भी बेपटरी नहीं होंगे।

जानकारी के अनुसार रेलवे ने ये तकनीक बढ़ते हादसों के बाद 2017 में ही लागू करने का निर्णय लिया था। अब जाकर इसे लगाने की रफ्तार बढ़ी है। रेलवे लाइन में जहां पर पटरियों की दिशा बदली जाती है, उसे फेसिंग प्वाइंट कहा जाता है। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए इसका मजबूत और टिकाऊ होना जरूरी है। थिक वेब स्विच परंपरागत स्विच की तुलना में मोटा, डबल लॉकिंग और स्प्रिंग सेटिंग का होता है। इसमें स्पंदन भी कम होता है, जो हाईस्पीड के लिए आदर्श माना जाता है। थिकवेब स्विच के ऊपर से गुजरने वाली ट्रेनों के यात्रियों को पता तक नहीं चलता कि उनकी ट्रेन स्विच पर से गुजरी है।
ट्रेनों की रफ्तार डेढ़ गुना करने में मिलेगी मदद
सीपीआरओ के मुताबिक थिकवेब स्विच लग जाने पर ट्रेनों की स्पीड 110/130 से 160/180 किमी प्रति घंटा करने में मदद मिलेगी। इसी थिकवेब स्विच के लगाने के बाद बीना रेलखंड पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसकी एक बड़ी खूबी ये भी है कि इससे ट्रेनों के हादसे रूकेंगे। रफ्तार अधिक होने पर फेसिंग प्वाइंट पर ही डिरेलमेंट होने का खतरा अधिक होती है, लेकिन इसके लगने से इस तरह के हादसे पर रोक लग जाएगी।
जबलपुर सहित तीनों मंडल में ग्रुप-ए मार्गों पर लगाया जा रहा
WCR ने जबलपुर, भोपाल, कोटा रेल मंडल में यह कार्य स्वीकृत किया है। पहले चरण में मुख्य ग्रुप-एक ट्रेन मार्गों पर ही थिकवेब स्विच लगाया जा रहा है। पमरे इस कार्य को तीव्र गति से करने पर लगा है। इससे जोन क्षेत्र में ट्रेनों की रफ्तार बढाई जा सके। इस लगाने में रेलवे के इंजीनियरिंग, दूरसंचार एवं संकेत, परिचालन और विद्युत विभाग की मुख्य भूमिका होती है।
थिकवेब स्विच लगाने के ये मिलेंगे फायदे

  • ट्रेनों की गति 130 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 160 किमी प्रति घंटे की जा सकती है।
  • भारी मालगाड़ियों के भार को सहने की अदभुत क्षमता।
  • सामान्य प्वाइन्ट की तुलना में थिकवेब स्विच अधिक मजबूत व टिकाऊ है।
  • लगभग 3 गुना महंगा होने के बाबजूत नई रेल लाइनों में लगाया जा रहा है, जो सुरक्षा की द्वष्टि से महत्वपूर्ण है।
  • सामान्य स्विच की तुलना में थिकवेब स्वीच की लाइफ 3 गुना अधिक होता है। मेंटेनेंस भी कम करना पड़ता है।
  • अभी हाल में बिछाई गई बीना-भोपाल तीसरी लाइन में इसी स्विच को लगाया गया है।
  • भोपाल से इटारसी के लिए बिछाई जा रही तीसरी लाईन में इसी थिकवेब स्विच का प्रयोग किया जा रहा है।
  • ट्रेनों के प्वाइन्ट बदलने के समय यात्रियों को झटका नहीं लगेगा और न ही ट्रेन बेपटरी होगी।
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