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अब 18 को जबलपुर आएंगे अमित शाह:अमर शहीद राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में होंगे शामिल, जनजातीय समाज को जोड़ों अभियान का करेंगे शुभारंभ

जबलपुर12 दिन पहले
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अब 18 सितंबर को जबलपुर आएंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। - Dainik Bhaskar
अब 18 सितंबर को जबलपुर आएंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अब 18 सितंबर को जबलपुर आएंगे। पहले उनका कार्यक्रम 5 सितंबर को तय हुआ था, लेकिन इसमें तब्दील कर दी गई। अमित शाह अमर शहीद राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान आदिवासी वोटरों को लुभाने के लिए BJP के कार्यक्रम 'जनजातीय समाज को जोड़ों अभियान' का शुभारंभ भी करेंगे।

सांसद राकेश सिंह के मुताबिक, गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम की मंजूरी मिल चुकी है। इसके साथ कुछ और कार्यक्रम भी तय हो रहे हैं। जल्द ही इसकी जानकारी साझा करेंगे। सूत्रों की माने तो 5 सितंबर को जबलपुर आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से भी केंद्रीय गृहमंत्री के कार्यक्रम को लेकर सांसद राकेश सिंह की अहम चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के बहाने BJP की कोशिश आदिवासी वोटरों को लुभाने की है। इससे पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल दमोह में आदिवासी सम्मेलन का आयोजन करा चुके हैं। तब देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविद इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे।

गृहमंत्री अमित शाह के आगमन की सांसद राकेश सिंह ने दी जानकारी।
गृहमंत्री अमित शाह के आगमन की सांसद राकेश सिंह ने दी जानकारी।

2023 की तैयारी
यह पूरी कवायद आदिवासी वोटरों को अपने पक्ष में लाने की हो रही है। कांग्रेस जहां जयस की मदद से विधानसभा 2018 में बीजेपी को नुकसान पहुंचा चुकी है। वहीं बीजेपी की कोशिश 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी वोटरों को साधने की है। विश्व आदिवासी दिवस पर अवकाश को लेकर पहले ही बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ चुके हैं। कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम कमलनाथ ने 6 सितंबर को बड़वानी से आदिवासी अधिकार यात्रा की शुरुआत की है। इसी का जवाब बीजेपी 18 सितंबर को जनजातीय समाज को जोड़ों अभियान से देने जा रही है।

MP विधानसभा में आदिवासी वोटरों का महत्व
एमपी विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। इसमें 82 एससी और एसटी हैं। इसमें 47 सीटें अनुसूचित जनजाति की है। जबकि 31 अन्य सीट पर आदिवासी वोटर किसी की भी जीत-हार में अहम भूमिका निभाते हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में 47 सीटों में 30 पर कांग्रेस, 16 पर बीजेपी और एक सीट पर कांग्रेस समर्थित जयस प्रत्याशी हीरालाल अलाव ने जीत दर्ज की थी। जबकि 2013 के विधानसभा चुनाव में 82 एससी और एसटी सीटों में 59 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। आदिवासी सीटों पर पिछड़ने का परिणाम ये रहा कि बीजेपी 7 सीटों से बहुमत के आंकड़ से पीछे रह गई थी। उसे सत्ता में वापसी 15 महीने बाद मिली, जब कांग्रेस से बगावत कर समर्थकों संग ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गए।

अमर शहीद राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे अमित शाह।
अमर शहीद राजा शंकर शाह और उनके बेटे रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे अमित शाह।

महाकौशल में आदिवासी वोटरों की अच्छी तादाद है
महाकौशल में भी आदिवासी वोटरों की अच्छी तादाद है। जबलपुर से केंद्रीय मंत्री आदिवासी वोटरों को साधने की बीजेपी के अभियान को नई धार देंगे। जबलपुर के अलावा, डिंडौरी, मंडला, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट आदि जिलों में आदिवासी वोटरों को बीजेपी के पक्ष में जोड़ने में मदद मिलेगी। राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह सहित रानी दुर्गावती को लेकर आदिवासियों में भावनात्मक लगाव और सम्मान है। 18 सितंबर 1857 को शंकर शाह-रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर अमित शाह बीजेपी से आदिवासियों को जोड़ने की कोशिश करेंगे।

अमर शहीदों को अमृत महोत्सव के माध्यम से याद कर रही सरकार
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने 5 सितंबर (रविवार) को शंकर शाह रघुनाथ शाह के बलिदान स्थल पर जाकर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। प्रह्लाद पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75 साल पूर्ण होने पर अमृत महोत्सव मनाने की घोषणा की थी। जिसके चलते देश के ऐसे अमर शहीदों को अमृत महोत्सव के माध्यम से याद किया जा रहा है। इन शहीदों ने कीमत बड़ी चुकाई है, लेकिन उनकी चर्चा कम हुई। ऐसे लोगों को देश याद रखे इसलिए अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

बता दें कि शंकर शाह गोंडवाना साम्राज्य के राजा थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था। इसके बाद अंग्रेजों ने 18 सितंबर 1858 को राजा शंकर शाह और उनके बेटे कुंवर रघुनाथ शाह को तोप के मुंह पर बांध कर उड़ा दिया था।

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